ये तीनों शख्सियतें कोई प्रसिद्ध नाम नहीं हैं, जिनकी पहचान बदलनी पड़े. इनकी पहचान बदलने के पीछे का कारण दरअसल इनका काम है. तीनों के काम करने के क्षेत्र अलग-अलग हैं. शायद तीनों कभी एक-दूसरे से मिलेंगे भी नहीं. तीनों अपने-अपने काम में माहिर हैं. अपने काम से जुड़ी हर ख़बर रखते हैं. बस एक बात है जिसकी ख़बर इन्हें नहीं है. वह यह कि ये तीनों एक ही संस्था के लिए काम करते हैं. वह संस्था जिसे हम सीआईए के नाम से जानते हैं.
दरअसल, इन तीनों को नहीं पता कि ये किस तरह से सीआईए के लिए काम करते हैं. शायद इस बात को वे कभी मानेंगे ही नहीं. यही तो सीआईए के काम करने का तरीक़ा है कि उसके लिए काम करने वाले भी नहीं जानते कि वे सीआईए के लिए काम कर रहे हैं. आप को भले ही यह सुन कर हैरानी हो, पर यह सच है कि दुनिया की सबसे ताक़तवर खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए काम करने के वाले अधिकतर लोग यह बात नहीं जानते भी नहीं कि वे सीआईए के लिए काम करते हैं.
अब उदाहरण के तौर पर राज के काम को ही लें, वह एक विदेशी पत्रिका के लिए काम करते हैं. भारत की राजनीतिक घटनाओं और बदलते समीकरणों पर लेख लिखते हैं. हर राजनीतिक दल के अंदर इनके संबंध हैं, और इन्हीं के बल पर इन घटनाक्रमों की गहन पड़ताल करते हैं. इन मुद्दों पर उनके लेखों के लिए उन्हें अच्छा ख़ासा व़क्त भी मिलता है और बदले में अच्छा पारिश्रमिक भी. उनके लिए यह उनका काम और पत्रकार धर्म दोनों है. हां, कभी-कभी उन्हें यह भले ही अजीब लगता है कि जिस विदेशी पत्रिका के लिए वह काम करते हैं, उसे भारत के छोटे-मोटे मामलात में क्यों दिलचस्पी है. दरअसल वह ये नहीं जानते कि जिस पत्रिका के लिए वह काम करते हैं, वह उनकी दी गई जानकारी का इस्तेमाल महज़ ख़बर के लिए ही नहीं करती. भारत के छोटे से छोटे मामलों की पड़ताल करते उनके आलेख दरअसल उस जानकारी के भंडार का हिस्सा बनते हैं. वह भंडार अमेरिका के लैंगली में रखे सुपर कंप्यूटरों में जमा किया जाता है. उनकी दी गई जानकारी पहुंचती है दुनिया की सबसे शातिर खुफिया एजेंसी के पास- सीआईए के पास. ऐसा ही कुछ डॉ. राजनाथन और रवींद्र के शोधों और जानकारियों के साथ भी होता है. उनकी जुटाई जानकारी अमेरिकी खुफिया विश्लेषकों को भारत की वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ी बातों को समझने में मदद करती हैं. जिन संस्थाओं के लिए वह काम कर रहे होते हैं वह कहीं-न-कहीं सीआईए से जुड़ी होतीं हैं. अपना काम पूरी शिद्दत और ईमानदारी से कर रहे इन पेशेवरों को रत्ती भर भी अंदाज़ा नहीं होता है कि वे सीआईए के लिए जानकारियां जुटा रहे होते हैं. अनजाने में ही वे सीआईए के एजेंट की भूमिका निभा रहे होते हैं. सीआईए के नेटवर्क के फैलाव के पीछे ऐसे कई लोग हैं. सीआईए अपने आधिकारिक एजेंटों के अलावा जानकारियां जुटाने के लिए ऐसे लोगों को अपने नेटवर्क से जोड़ती है. अक्सर किसी पुराने एजेंट के ज़रिए इन लोगों की पहचान की जाती है. ऐसे लोगों को चुना जाता है, जो किसी ऐसे काम में लगे हैं जिसकी जानकारी सीआईए के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे लोगों में से उन्हें चुना जाता है जिनका ख़ुद का नेटवर्क अच्छा हो और जो ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी जुटा सकते हैं. फिर इन लोगों को किसी ऐसे मध्यस्थ की मार्फत जोड़ा जाता है, जिस पर इन्हें शक़ नहीं हो सकता. इस तरह ये लोग बिना शक़-शुबहा के सीआईए के लिए काम करने लगते हैं. इन्हें इनके काम के लिए तमाम सुविधाएं, पैसे और पूरा व़क्त मिलता है, जो इन्हें कंपनी नीतियों के नाम पर दिया जाता है. इस तरह ख़ुशी से अपने काम में जुटे ये लोग सीआईए के खुफिया नेटवर्क का महत्वपूर्ण और फायदेमंद हिस्सा बन जाते हैं.
सुनने में यह भले किसी कहानी-सा लगता है लेकिन इस बात में सच्चाई है कि इस तरह का नेटवर्क सीआईए ने दुनिया भर में फैला रखा है. दुनिया की सबसे महंगी खुफिया एजेंसी(सीआईए का बजट दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था से भी ज़्यादा है) होने का पूरा लाभ उठाते हुए सीआईए पूरा धन लगाकर अपने संसाधनों में बढ़ोतरी कर लेती है. सीआईए के पास इस तरह दुनिया भर में हो रही मामूली-ग़ैर मामूली घटनाओं से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा होती रहती हैं. सीआईए के मुख्यालय लैंगली में बैठे विश्लेषक इन जानकारियों को ज़रूरी और ग़ैर-ज़रूरी की श्रेणियों में बांटते रहते हैं. जब भी कोई
महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है तो उस पर आगे की जानकारी या कार्रवाई के लिए सीआईए अपने आधिकारिक एजेंटों को भेज देती है. सीआईए का खेल इतना बड़ा है, जिसके कई चरण हैं और किसी के लिए यह समझना असंभव ही है कि उसका इस्तेमाल इस तरह से किया जा रहा है.
ऑफिसों में काम कर रहे आम कर्मचारियों से लेकर बड़ी वैज्ञानिक शोधों तक, हर जगह सीआईए की घुसपैठ है. यह नेटवर्क इतना विशाल और विस्तृत है कि इसे पहचान पाना नामुमकिन है. हां, यहां सवाल यह भी है कि कहीं आप के काम पर भी सीआईए की नज़र तो नहीं है? कहीं आप भी तो इस नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है? कहीं आप भी तो सीआईए के लिए काम करने वालों में नहीं हैं? ज़रा सोचिए.
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