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नाम से ही सिहरा देती है सीआईए

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मार्च 1963, समय अहले सुबह, जगह क्यूबा की राजधानी हवाना के एक ख़ाली मकान की छत. चीनी का कटोरा कहलाने वाले क्यूबा की राजधानी में सब कुछ सामान्य ही था, सिवाय उस एक व्यक्ति के जो उस ख़ाली छत पर अकेला, घात लगाए बैठा था. उसकी स्नाइपर रायफल का निशाना सड़क पर था और उसे इंतज़ार था एक ख़ास व्यक्ति के आने का. वह ख़ास व्यक्ति थे-क्यूबा के करिश्माई कम्यूनिस्ट नेता और राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो. वह ख़ाली मकान उस रास्ते पर था, जिससे कास्त्रो रोज़ाना गुज़रते थे. दुनिया में सबसे सधी सुरक्षा के बीच रहने वाले फिडेल कास्त्रो को अपनी रायफल के निशाने तक ले आने वाला वह हमलावर था, एक अमेरिकी गैंबलर जॉन रोसेली. हालांकि उस रोज़ फिडेल कास्त्रो पर होने वाला हमला विफल रहा और रोसेली गिरफ़्तार हो गया. रोसेली से पूछताछ में पता चला कि वह अमेरिकी और क्यूबाई माफिया से जुड़ा एक मामूली आदमी था. अब सवाल यह था कि आख़िर एक मामूली माफिया क्यों क्यूबा के सबसे बड़े नेता को मारना चाहेगा? जवाब अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के लैंगली में बने एक दफ़्तर की कुछ गोपनीय फाइलों में क़ैद था. सीधा-सादा सा दिखने वाला वह दफ़्तर दरअसल दुनिया की सबसे शातिर और ख़तरनाक ख़ु़िफया एजेंसी का था, जहां स़िर्फ चंद लोग जानते थे कि रोसेली दरअसल उसी ख़ु़िफया एजेंसी के इशारों पर काम कर रहा था. वह ख़ु़िफया एजेंसी थी-अमेरिका की केंद्रीय ख़ु़िफया एजेंसी- सीआईए. सीआईए, पिछले पचास सालों के विश्व इतिहास में जितना प्रभाव इस नाम का रहा है, उतना असर शायद ही किसी और ने छोड़ा है. सीआईए अमेरिका की ही नहीं विश्व की सबसे बड़ी ख़ु़िफया एजेंसी है और इसके प्रभाव क्षेत्र में दुनिया का हर कोना है. अत्याधुनिक हथियारों से लेकर जासूसी के नए तरीक़ों तक में सीआईए ने ख़ु़िफया दुनिया में आए हर बदलाव का नेतृत्व किया है. शायद इसीलिए सीआईए दुनिया की सबसे महंगी ख़ु़िफया एजेंसी भी है. सीआईए का बजट 44 अरब डॉलर यानी क़रीब 22 खरब रुपये.   सीआईए भले ही केजीबी जितनी ख़ूंख़ार या मोसाद जितनी रहस्यमय न हो, लेकिन शातिर चालों और जोड़तोड़ के खेल में उसकी कोई सानी नहीं है. सीआईए का इतिहास अमेरिका के अंदरूनी और बाहरी दुश्मनों के ख़िला़फ साज़िशों और दुनिया को अमेरिकी हिसाब से चलाने की उसकी कोशिशों से भरा पड़ा है. तभी तो सीआईए को दुनिया की सबसे शातिर ख़ु़िफया एजेंसी के तौर पर जाना जाता है. सीआईए की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी ख़ु़िफया तंत्र को चलाने वाली संस्था के तौर पर हुई. हालांकि अमेरिकी ख़ु़िफया तंत्र पहले से ही काम करता था, लेकिन पहली बार दूसरे विश्व युद्ध के  दौरान उसे संगठित किया गया. इस संगठन की ज़िम्मेदारी दी गई एक पुराने वार-हीरो और वक़ील विलियम जे डोनोवन को. और, उस संगठन को नाम दिया गया-रणनीतिक सेवा विभाग यानी ओएसएस. दूसरा विश्व युद्ध ख़त्म होने पर ओएसएस को भंग करके उसकी जगह सभी ख़ु़िफया संगठनों को एक साथ लाकर 18 सितंबर 1974 को एक नई एजेंसी गढ़ी गई. इसका नाम रखा गया, केंद्रीय ख़ु़िफया एजेंसी (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी)-सीआईए. सीआईए का मक़सद था अमेरिका के ख़ु़िफया तंत्र पर नियंत्रण और उसके लिए जानकारी इकट्ठा करना. अपने पहले डायरेक्टर आर्थर डलेस की अगुआई में सीआईए का दायरा बढ़ता गया. सीआईए महज़ एक ख़ु़िफया एजेेंसी से आगे अमेरिकी प्रभुत्व स्थापित करने का सबसे बड़ा माध्यम बन गई. सीआईए शीत-युद्ध के समय में अमेरिका के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई. सोवियत संघ को पछाड़ने के लिए सीआईए ने केजीबी के एजेंटों को तोड़ना शुरू किया. एक-दूसरे के रहस्यों की जानकारी हासिल करने के साथ-साथ यह खेल अमेरिका और सोवियत वर्चस्व की लड़ाई बन गया. कहने की ज़रूरत नहीं कि इस खेल में जीत के लिए हर हथकंडा अपनाया गया. सीआईए ने भी इस खेल में कोई कसर बाक़ी नहीं रखी. सीआईए का नाम ही दुनिया के कई हिस्सों में ख़ौ़फ और आतंक का प्रतीक बन गया. अपने फायदे के लिए सत्ता पलट और आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी सीआईए पीछे नहीं रही. सीआईए राजनीतिक हत्याओं और विद्रोहों को आग देने के लिए बदनाम होती गई. सीआईए के बारे में यह कहा जाता है कि अपनी सुविधा के लिए लोगों को मरवाने और ग़ायब कराने में सीआईए को कोई हिचक नहीं रही. अमेरिकी सरकार के दुश्मनों के ख़िला़फ सीआईए ने कई दुश्मन खड़े कर दिए. सीआईए ने अपने राजनीतिक विरोधियों की हत्याओं के लिए न केवल ज़मीन तैयार की, बल्कि जब उसे किसी अन्य ग्रुप के द्वारा उस विरोधी की हत्या की योजना की जानकारी भी मिलती तो सीआईए ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की. सीआईए ने उन सभी घटनाओं से मुंह मोड़ लिया जो उसके लिए  सुविधाजनक थी. ईराक़ में जब तत्कालीन शासक क़ासिम को सद्दाम हुसैन क ी बाथ पार्टी ने सत्ता से हटा दिया तो इस पूरी योजना के पीछे सीआईए की मौन सहमति रही. जब क़ासिम के हश्र के बारे में बाथ पार्टी ने सीआईए से पूछा तो उसका जवाब था कि उन्हें कोई फर्क़ नहीं पड़ता की क़ासिम का क्या होता है, उन्हें बस उसे सत्ता से दूर रखना है. क़ासिम को कुछ दिनों के बाद गोली से उड़ा दिया गया. मज़े की बात है कि वही सद्दाम हुसैन और बाथ पार्टी बाद में सीआईए का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया. उसी तरह सीआईए के दुश्मन नंबर वन  अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को भी एक समय सीआईए की मदद मिलती रही. सीआईए के कई ऐसे कारनामे हैं जिन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे शातिर और मतलबी ख़ु़फिया संगठन का तमगा दिला दिया.

रहस्यमयी क्रिप्टोज
सीआईए का मुख्यालय अमेरिका के वर्जीनिया प्रांत के लैंगली में स्थित है. किसी क़िले की तरह मज़बूत सुरक्षा वाला सीआईए मुख्यालय कई एकड़ में फैला है और इसमें सीआईए की अधिकतर शाखाएं हैं. सीआईए के मुख्यालय के अंदर प्रवेश करते ही दीवार पर उसका मोटो यानी उद्देश्य वाक्य लिखा है. अंग्रेजी में लिखी बाइबिल की इस उक्ति का अर्थ है- सत्य की खोज ही आपका एकमात्र उद्देश्य है और यही सत्य आपको मुक्त भी करेगा. मुख्यालय के अंदर ही एक दीवार पर उन एजेंटों का स्मारक है जिन्होंने सीआईए के लिए काम करते हुए अपनी जान दी. इन सबके सम्मान में एक-एक सितारा दीवार पर सजाया गया है. मुख्यालय के पिछले हिस्से में उन दो एजेंटों के सम्मान में एक स्मारक बना है जो सीआईए के मुख्यालय पर हुए हमले में मारे गए थे. सीआईए के डायरेक्टर रहे जार्ज बुश सीनियर के राष्ट्रपति बनने पर उनके सम्मान में मुख्यालय का नाम जार्ज बुश सेंटर रखा गया. हालांकि इस इमारत के अंदर बनने वाली योजनाओं की तरह ही इसके बाहर बनी क्रिप्टिक संरचना क्रिप्टोज भी रहस्यमय है. क्रिप्टोज का निर्माण एक कोड के तौर पर किया गया है और यह कोड आज भी एक पहेली बना हुआ है.

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