[सुवनशिरि पर बन रहे बांध को लेकर पर्यावरणविद आशंकित हैं. उनका कहना है कि इस नदी का चालीस फीसदी हिस्सा चीन में है. बाढ़ के समय सुरक्षा के हिसाब से यह बात ख़तरनाक साबित हो सकती है. एक उदाहरण से इस बात की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. 11 जून 2000 को अरूणाचल प्रदेश के अपर सियांग और ईस्ट सियांग ज़िले में सियांग नदी में अचानक बाढ़ आ गई. एक सौ फीट ऊंची पानी की धारा ने चारों तऱफ तबाही मचा दी. उस समय अरूणाचल प्रदेश या उत्तरी तिब्बत में बारिश भी नहीं हुई थी.]
सुवनशिरि नदी के पानी से पनबिजली पैदा करने के लिए अरूणाचल प्रदेश के गेरूकामुख में 446 फीट ऊंचे बांध का निर्माण कार्य शुरू किया गया है. बांध के निर्माण के दौरान नदी के पानी की निकासी के लिए नदी के पूर्वी किनारे की तऱफ पांच सुरंगों का निर्माण किया जाएगा. यह इलाक़ा असम में पड़ता है. पश्चिमी किनारे में निर्माणाधीन संयत्र में आठ टर्बाइन जेनेरेटर लगाए जाएंगे. हर जेनेरेटर की 250 मेगावाट का उत्पादन करेगा. एक तऱफ तो केंद्र सरकार का यह तर्क है कि अरूणाचल प्रदेश और देश के आर्थिक विकास के लिए सुवनशिरि पनबिजली परियोजना ज़रूरी है, लेकिन दूसरी तऱफ सुवनशिरि की घाटी, असम के उत्तरी लखीमपुर और माजुली के निवासियों की सुरक्षा और जीवित रहने के अधिकार का सवाल है.
सुवनशिरि की तरह अरूणाचल प्रदेश में हिमालय से उतरने वाली रंगा नदी में बांध बनाकर 405 मेगावाट के पनबिजली संयत्र की स्थापना की गई है. सुवनशिरि के मुक़ाबले रंगा नदी छोटी है, लेकिन इस छोटी नदी पर बांध बनने के चलते ही जून 2008 में असम के उत्तरी लखीमपुर ज़िले में तक़रीबन तीन लाख लोगों को बाढ़ की तबाही का सामना करना पड़ा. बारिश के मौसम में रंगा नदी में बहकर आने वाले पानी की मात्रा सुवनशिरि के पानी की मात्रा की तुलना में बेहद कम होती है. सुवनशिरि में प्रति सेकेंड 18,800 घनमीटर पानी बहकर आता है, जबकि रंगा नदी में प्रति सेकेंड 1529 घनमीटर पानी ही बहकर आता है. रंगा नदी पर बनाए गए 203 फीट ऊंचे बांध के ऊपर 57 फीट की ऊंचाई वाले पांच गेट बने हैं. सामान्य परिस्थितियों में रंगा नदी के पानी को इन दरवाज़ों के भीतर जलाशयों में ही रखा जाता है, लेकिन जब बाढ़ के समय पानी का स्तर 566 मीटर से ऊपर चला जाता है, तब गेट अपने आप खुल जाते हैं और सारा पानी बांध के ऊपर से बहकर आ जाता है. नदी में बा़ढ़ कभी दिन में आती है तो कभी रात में. इस तरह अतिरिक्त पानी निकलने से निचले इलाक़े में स्वाभाविक रूप से तबाही मच जाती है, लेकिन नीपको ने बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा देने का कोई प्रावधान नहीं बनाया है.
सुवनशिरि पर बन रहे बांध को लेकर पर्यावरणविद आशंकित हैं. उनका कहना है कि इस नदी का चालीस फीसदी हिस्सा चीन में है. बाढ़ के समय सुरक्षा के हिसाब से यह बात ख़तरनाक साबित हो सकती है. एक उदाहरण से इस बात की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. 11 जून 2000 को अरूणाचल प्रदेश के अपर सियांग और ईस्ट सियांग ज़िले में सियांग नदी में अचानक बाढ़ आ गई. एक सौ फीट ऊंची पानी की धारा ने चारों तऱफ तबाही मचा दी.
उस समय अरूणाचल प्रदेश या उत्तरी तिब्बत में बारिश भी नहीं हुई थी. फिर भी लोगों के घर, पेड़-पौधे उजड़ गए. सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तीन पुल भी बह गए. 36 व्यक्तियों की डूबने से मौत हो गई. सरकार ने इस अप्रत्याशित बाढ़ के कारण का पता लगाने का ज़िम्मा इसरो को सौंपा. सेटेलाइट की मदद से इसरो ने पता लगाया कि चीन में सियांग नदी पर एक बांध टूट गया था, हालांकि चीन ने इस ख़बर का खंडन किया. हालांकि, जानकारों के मुताबिक अरूणाचल प्रदेश पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए चीन ने जानबूझ कर एक बांध तोड़ दिया था. अगर चीन सुवनशिरि के बांध के साथ भी इसी तरह खिलवाड़ करेगा तो उसका ख़ामियाज़ा अरूणाचल प्रदेश और असम की आम जनता को भुगतना पड़ सकता है.
जानकार अरूणाचल प्रदेश के प्राकृतिक परिवेश को अस्थिर (अनस्टेबल) का दर्जा देते हैं. उनका कहना है कि यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज़ से बहुत संवेदनशील है. ऐसी हालत में पर्यावरण और भौगोलिक संतुलन में मामूली परिवर्तन करने से भयंकर नतीजे सामने आ सकते हैं. इसीलिए पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों से मिट्टी काटने, नदी के पानी को बांध बनाकर रोकने, पानी में रेत और पत्थर जमा करने, भूमिगत जल-स्तर से छेड़छाड़ करने और जंगलों को काटने के काम में सावधानी बरतने की आवश्यकता है.
अरूणाचल प्रदेश के इलाक़े में हिमालय की भौगोलिक बनावट असाधारण है. 7756 मीटर ऊंचे नामचा-वारवा नामक पहाड़ को हिमालय के मध्य में स्थित गांठ माना जाता है, जहां हिमालय से मुड़ता है.नामचा-वारवा पहाड़ हर साल तीन से पांच मिलीमीटर ऊंचा होता जा रहा है. इसके साथ ही हिमालय की चोटियों की ऊंचाई भी बढ़ती जा रही है. इस बदलाव के साथ ही भू-स्खलन की रफ़्तार भी तेज़…..
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पाकिस्तान जैसा गन्दा देश पुरी दुनिया में नहीं है,उशकी छवि इतनी ख़राब है की शब्दों में बया करना नामुमकिन है अगर गटर को शाफ करते है तो saaf हो जाता है लेकिन पाकिस्तान कभी नहीं साफ़ होने वाला गटर है भाई मै तो इतना ही कहुगा जो गढ़हा दूशरे के लिए खोदता है उश्मे खुद ही गिरता है
जय हिंद! वन्दे मातरम