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मोसाद यानी ख़ौ़फ का दूसरा नाम

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इज़रायल का दूसरा सबसे बड़ा शहर है तेल अवीव. यहीं एक ऐसी एजेंसी का मुख्यालय है, जिसे हम मोसाद कहते हैं. मोसाद यानी दुनिया की सबसे ख़तरनाक ख़ु़फिया एजेंसी. मोसाद को क़रीब से जानने वालों की मानें तो यह दुनिया की सबसे ख़ौफनाक क़ातिल मशीन की तरह काम करती है. इस क़ातिल एजेंसी के मुखिया की सोच कैसी होगी, यह सोचकर ही रूह कांप उठती है. यह बात हम यूं ही नहीं कर रहे हैं. अपने पेशेवर क़ातिलाना मिशन की हक़ीक़त का ख़ुलासा ख़ुद मोसाद के मुखिया भी करते हैं. वर्ष 2000 से अभी तक मोसाद की कमान संभाल रहे मीर डागन का बयान हमारी उस बात की तस्दीक करता है, जिसमें हम अभी तक मोसाद के ख़तरनाक, बेरहम और क़ातिलाना मिशन की बात करते आ रहे थे.

मीर डागन कहते हैं, जब मैं लेबनान में लड़ रहा था तो उस व़क्त हमारे जेहन में मिशन के अलावा कुछ भी नहीं चल रहा था. हमारा मक़सद स़िर्फ और स़िर्फ एक ही था, दुश्मनों का ख़ात्मा. चाहे इसके लिए किसी भी रास्ते को अख्तियार करना पड़े. मीर डागन अपनी बात कुछ इस तरह समझाते हैं, जो महज़ एक मिसाल नहीं, बल्कि उनकी क्रूर और क़ातिल सोच का नतीजा है. डागन बताते हैं कि लेबनान में एक मिशन के दौरान वह एक घर में घुसे. अंदर घुसते ही उन्होंने ताबड़तोड़ हमला कर दिया. जब उन्होंने गोलियों की बरसात बंद की तो देखा कि एक शख्स के सिर में इतनी गोलियां लगी थीं कि उसका सिर धड़ से अलग हो गया था. उसके शरीर के पास उसकी बीवी और चार बच्चों की लाशें पड़ी हुई थीं. इतनी बेरहमी से हत्या के बावजूद उनके चेहरे पर शिकन की कोई लकीर नहीं थी और न ही अ़फसोस की कोई भावभंगिमा. यानी अपने दुश्मनों के ख़ात्मे के लिए वह औरत और बच्चों को भी नहीं बख्शते थे. मोसाद के मिशन की ज़द में जो कोई भी आएगा, उसका अंजाम भी कुछ इसी तरह या इससे भी ख़ौ़फनाक होगा. यही बात कही थी मीर डागन ने. दरअसल, मोसाद के नायकों या कहें कि ख़लनायकों की मानें तो यदि उनके दुश्मन के परिवार का एक भी शख्स ज़िंदा बच निकला तो एक न एक दिन वह भी मोसाद और इज़रायल के ख़िला़फ अपना सिर उठाएगा. इस तरह वह उनके लिए एक नई मुसीबत बनकर सामने आएगा. नतीजतन मोसाद इस मुसीबत की नौबत ही नहीं आने देती है और इसीलिए वह अपने दुश्मन के परिवार को भी पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देती है.

मोसाद पर कई बार इल्ज़ाम लगा कि वह अपने दुश्मनों के साथ बड़ी ही क्रूरता से पेश आती है और उनके ख़ात्मे के अलावा उसके जेहन में कुछ होता ही नहीं. इस पर मोसाद के ऑपरेशनल कमांडर का कहना है कि हमारे दुश्मन हत्या की कई वारदातों को अंजाम देकर पड़ोसी अरब देशों में छिप जाते हैं, जिससे उन पर मुक़दमा चलाना मुमकिन हो ही नहीं सकता. यही वजह है कि हम जवाब उन्हें उनकी ही भाषा में देते हैं. उन्हें खोज निकालना स़िर्फ मोसाद के ही बूते की बात है, इसीलिए हम ही उन्हें सज़ा देने के हक़दार हैं और यह सज़ा होती है, मौत के बदले मौत. मोसाद का यह निदेशक कहता है, मैं जब कभी भी किसी शख्स की आंखों में चालाकी और साज़िश की भूख देखता हूं तो हमेशा उसे ख़त्म कर देने की ही कोशिश करता हूं, ताकि उसकी आंखों में ख़ौफ देख सकूं. उसके जेहन के ख़ौ़फ को उसकी सांसों में महसूस कर सकूं. इसके लिए मैं कभी अपने हाथ, कभी चाकू तो कभी साइलेंसरयुक्त बंदूक़ का इस्तेमाल करता हूं. और, हत्या की अपनी इस कोशिश पर मुझे कभी कोई मलाल नहीं होता.

मीर अमित, जो 1963 से 1968 के दौरान मोसाद के निदेशक रहे, ने एक बार कहा कि हम एक सरकारी जल्लाद की तरह हैं, जिसके जेहन में उसके काम के अलावा कुछ भी नहीं रहता है. हमें जो निर्देश दिया जाता है, हम वहीं करते हैं. हमारे सारे मिशन इज़रायल के हित में होते हैं और जब मोसाद किसी की हत्या करती है तो वह कोई क़ानून या नियम नहीं तोड़ती, बल्कि वह इज़रायली प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन कर रही होती है. इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मोसाद के सारे क्रियाकलाप इज़रायली प्रधानमंत्री द्वारा निर्देशित होते हैं.

मीर अमित मोसाद के सबसे ख़तरनाक और कुछ अलग सोचने वाले प्रमुखों में से एक था. वह अपने मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाता था. यहां तक कि उसने इसके लिए महिलाओं को भी तैयार किया. हम आपको बता दें कि महिलाओं का इस्तेमाल उसने सैनिक के तौर पर नहीं किया. फिर भी मीर अमित का यह हथियार एक सैनिक के जज़्बे, जासूस की जांबाजी से कहीं अधिक कारगर था. उसके इस हथियार का निशाना हमेशा अचूक होता. मीर अमित के इस हथियार का नाम तो आप जान ही चुके हैं, वह है औरत. लेकिन महिलाएं किस तरह मोसाद के काम आती थीं, इसका ख़ुलासा ख़ुद मीर अमित ने किया. मीर अमित के मुताबिक़, महिलाओं का सबसे बड़ा हथियार है सेक्स. इसके ज़रिए वे किसी राज़ या ख़ु़फिया जानकारी को बड़ी आसानी से हासिल कर सकती हैं. वह कहते हैं, महिलाएं यह जानती हैं कि उन्हें इस हथियार यानी सेक्स का इस्तेमाल कैसे करना है. मीर अमित के मुताबिक़, ख़ु़फिया गतिविधियों और सेक्स के ज़रिए इसकी जानकारी जुटाने के बीच का नाता उतना ही पुराना है, जितना कि जासूसी करना. सेक्स महिलाओं का हथियार है. इस दौरान इधर-उधर की बातें करना इनके लिए कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए भी एक ख़ास क़िस्म के साहस की ज़रूरत पड़ती है. बात स़िर्फ अपने दुश्मन के साथ सोने की नहीं है, बल्कि सारा फोकस ख़ु़फिया जानकारी हासिल करने पर होता है.

इस तरह मोसाद अपने मिशन के प्रति जज़्बे और जुनून के लिए जानी जाती है. सफलता हासिल करने के लिए वह न स़िर्फ जोख़िम उठाती है, बल्कि हर तरह के हथकंडे भी अपनाती है. हथकंडे इसलिए कि दुश्मनों की तमाम अहम जानकारियां उसके पास रहें, जिससे किसी भी मिशन की सफलता सुनिश्चित की जा सके. जैसा हमने आपको बताया कि मोसाद के मिशन के लिए महिलाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है. आख़िर मोसाद के बारे में ऐसा यूं ही नहीं कहा जाता है कि दुनिया में स़िर्फ भगवान ही सारी बातें जानते हैं और वह स़िर्फ मोसाद के लिए काम करते हैं.

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