समस्तीपुर में चुनावी सरगर्मी ब़ढी

झारखंड में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव एवं सरकार गठन के बाद अब बिहार में भी आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी दिखने लगी है. उत्तर बिहार के प्रमुख राजनीतिक केंद्र समस्तीपुर में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है. सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों में संभावित उम्मीदवारों की आवाजाही तेज़ हो चली है. ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में राजद-लोजपा, भाजपा-जदयू के अलावा कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की चहलकदमी देखकर ऐसा लगता है कि प्राय: सभी दलों में टिकट को लेकर सिर फुटौव्वल की स्थिति रहेगी, क्योंकि चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है.

बिहार कांगे्रस प्रभारी जगदीश टाइटलर के प्रभाव से प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा द्वारा प्रदेश कमेटी एवं पदाधिकारियों की सूची जारी करने के बाद ज़िले के पूर्व कांग्रेस विधान पार्षद हरिनारायण चौधरी एवं पूर्व बिहार युवा कांग्रेस अध्यक्ष तरुण कुमार के समर्थक फूले नहीं समा रहे हैं. कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जैसे ही सूची को हरी झंडी दी, वैसे ही बिहार कांग्रेस विधानमंडल के नेता डॉ. अशोक कुमार के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई. अभी से ही विधानसभा चुनाव 2010 के लिए ज़िले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से संभावित उम्मीदवारों के नामों की चर्चा शुरू हो गई है. ज़िले के कांग्रेसियों का दावा है कि बिहार में एकला चलो की नीति राजनीतिक रूप से कारगर साबित हुई है. इतना ही नहीं, पल-पल कांग्रेस समर्थकों की संख्या में इजाफा हो रहा है. ज़िले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में अभी से संभावित उम्मीदवारों को ज़िला कमेटी की ओर से बूथ कमेटी के गठन का निर्देश दे दिया गया है.

ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में राजद-लोजपा, भाजपा-जदयू के अलावा कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की चहलकदमी देखकर ऐसा लगता है कि प्राय: सभी दलों में टिकट को लेकर सिर फुटौव्वल की स्थिति रहेगी, क्योंकि चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है.

ग़ौरतलब है कि ज़िले की राजनीति पिछले संसदीय चुनाव से ही बदल रही है, क्योंकि पूर्व कांग्रेसी विधायक चंद्रबली ठाकुर, जो पिछला चुनाव विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़े थे, वह पुन: कांग्रेस में वापस आ गए हैं. वहीं पूर्व लोजपा विधायक प्रो. शील कुमार राय ने भी रामविलास पासवान का दामन छोड़कर राहुल गांधी का दामन थाम लिया और उन्होंने गत संसदीय चुनाव भी ज़िले के नवगठित उजियारपुर संसदीय क्षेत्र से लड़कर कांग्रेस में जान फूंक दी. पूर्व विधायक चंद्रबली ठाकुर की कांग्रेस में पुनर्वापसी को लेकर ज़िला कांगे्रस कमेटी में खलबली मची है. मौजूदा नेतृत्व भविष्य में इसे खतरे की घंटी के रूप में देख रहा है, क्योंकि पूर्व विधायक ज़िला कांगे्रस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष पद को सुशोभित कर चुके हैं और फिलहाल पूरे ज़िले में भ्रमण कर राहुल गांधी का संदेश पहुंचा रहे हैं. इसका सकारात्मक परिणाम भी खुलकर सामने आने लगा है. पिछले दिसंबर में कांग्रेस द्वारा जारी सदस्यता अभियान में बड़ी संख्या में भूले-भटके कांग्रेसजन फिर से अपने पुराने घर लौटे हैं. जबकि ज़िले में कांग्रेस की सुधरती स्थिति से सबसे ज़्यादा परेशान ज़िला भाजपा के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार शर्मा हैं और उन्होंने प्रखंडों का दौरा तेज़ कर दिया है.

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे मौजूदा विधायक से लेकर पूर्व विधायक एवं पार्टियों के संभावित उम्मीदवारों का दौरा विभिन्न क्षेत्रों में ब़ढता जा रहा है. आगामी विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के अंतर्गत होगा, जिसमें कल्याणपुर एवं रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र सामान्य से सुरक्षित और वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित से सामान्य हो जाने से वहां के मौजूदा विधायक निकट के विधानसभा क्षेत्रों में डेरा डालने लगे हैं. ज़िले में राजद के छह और लोजपा, कांग्रेस, सीपीएम एवं जदयू के एक-एक विधायक हैं, जिनमें कल्याणपुर, रोसड़ा, वारिसनगर, दलसिंहसराय, सिंघिया विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को नया क्षेत्र पकड़ने के लिए ज़िले से लेकर राज्य के पार्टी कार्यालयों में नियमित रूप से हाजिरी देनी पड़ रही है. नए परिसीमन के अतंर्गत सिंघिया एवं दलसिंगसराय क्षेत्र को खत्म कर कुशेश्वरस्थान, मोरबा एवं उजियारपुर विधानसभा क्षेत्रों का गठन किया गया है. कांगे्रस बिहार विधानमंडल के नेता डॉ. अशोक कुमार के कुशेश्वरस्थान से चुनाव लड़ने की चर्चा काफी ज़ोरों पर है. वहीं दलसिंहसराय विधानसभा क्षेत्र समाप्त हो जाने से मौजूदा राजद विधायक रामलखन महतो नवगठित उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की बात अपने समर्थकों से कह रहे हैं. इसी तरह कल्याणपुर एवं वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप बदल जाने से वहां के राजद विधायक क्रमश: अशोक वर्मा एवं लोजपा विधायक विश्वनाथ पासवान परेशानी में हैं कि आखिर अगला चुनाव वे किस क्षेत्र से लड़ेंगे? रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित हो जाने से वहां के मौजूदा राजद विधायक गजेंद्र प्रसाद सिंह वारिसनगर क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी करते दिख रहे हैं. जदयू के पूर्व विधायक अशोक कुमार उर्फ मुन्ना भी रोसड़ा छोड़कर वारिसनगर की ओर मुखातिब हो चुके हैं. यदि पूर्व जदयू विधायक अशोक कुमार उर्फ मुन्ना वारिसनगर क्षेत्र से किस्मत आजमाएंगे तो रोसड़ा सुरक्षित सीट पर भाजपा कोई दमदार प्रत्याशी देकर चुनाव में सरगर्मी पैदा करेगी. आगामी विधानसभा चुनाव में ज़िले में एक बार फिर पूर्व सांसदों के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है, जिसमें राजद के पूर्व सांसद पीतांबर पासवान एवं भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. संजय पासवान के नाम सामने आ रहे हैं.

ज़िले की राजनीति में रोसड़ा सुरक्षित सीट राजद, कांग्रेस, लोजपा, जदयू एवं भाजपा के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा वाली मानी जा रही है. इस सीट को लेकर दोनों गठबंधनों के दलों में रस्साकशी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. वामपंथियों के लेनिनग्राद के रूप में विख्यात विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र से सीपीएम विधायक दल के नेता रामदेव वर्मा लगातार चार बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं. हर बार उनका सामना पूर्व विधायक चंद्रबली ठाकुर से हुआ. इस बार फिर रामदेव वर्मा और चंद्रबली ठाकुर आमने-सामने होंगे. वाम मोर्चा यदि आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ती है तो इस क्षेत्र से पूर्व लोजपा प्रत्याशी रामबालक सिंह  एक बार फिर बंगला निशान लेकर मैदान में निश्चित रूप से उतरेंगे, क्योंकि पिछले चुनाव में वह मामूली अंतर से हार गए थे. जिले के अन्य राजद विधायक रामचंद्र सिंह निषाद सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र एवं मोहिउद्दीनगर के राजद विधायक अजय कुमार बुल्गानिन क्षेत्र के बदले हुए मिजाज को भांपते हुए किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में पलायन की रणनीति में जुटे हैं. नवगठित मोरबा एवं उजियारपुर विधानसभा क्षेत्रों में भी रोज-रोज नए संभावित प्रत्याशियों की चर्चा होती है, जिसमें उजियारपुर के पूर्व प्रखंड प्रमुख दुर्गा प्रसाद सिंह एवं मोरबा के वर्तमान प्रखंड प्रमुख भाजपा नेता सुरेश राय के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. लोजपा से कांगे्रस में आने के बाद से पूर्व विधायक प्रो. शील कुमार राय की निगाहें मोरबा विधानसभा पर टिकी हैं. इस विधानसभा क्षेत्र से राजद के टिकट पर जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र डॉ. विरेंद्र ठाकुर के नाम की भी चर्चा है. कर्पूरी ठाकुर के प्रतिनिधित्व वाले समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से बिहार सरकार के मौजूदा विधि सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री रामनाथ ठाकुर लगातार तीन बार से चुनाव जीत रहे हैं. इस बार वहां से पूर्व विधायक एवं शिक्षा मंत्री अशोक सिंह की भी चर्चा हो रही है. पिछले संसदीय चुनाव में पूर्व शिक्षा मंत्री ने लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान को छोड़कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दामन थाम लिया है. इस क्षेत्र से कई दमदार नेता चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं, जिनमें राजद के प्रो. शाहिद अहमद, ज़िला पार्षद शकुंतला वर्मा, कांग्रेस के प्रांतीय सचिव तरुण कुमार, वरीय कांग्रेसी नेता विश्वनाथ साह एवं विशेश्वर राय प्रमुख हैं.

उत्तर बिहार का प्रमुख राजनीतिक केंद्र होने के कारण समस्तीपुर में अक्सर विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं का दौरा होता रहता है. हर दिन किसी न किसी राजनेता के यहां अगवानी में हज़ारों लोग जुटे रहते हैं और संभावित उम्मीदवारों को टिकट मिलने की चर्चा जोर-शोर से होती रहती है. हर गठबंधन की ओर से सभी क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारे जाने की संभावना है. संभावना यह भी है कि हर क्षेत्र में कांग्रेस मुख्य मुकाबले में होगी.

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