दिल्‍ली का बाबू : बाहरी करेंगे बाबुओं का मूल्यांकन

प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यक्षमता के आंतरिक मूल्यांकन की जगह यह काम किसी तीसरे पक्ष से करवाने की कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर की योजना ने असर दिखाना शुरू कर दिया है. चार अवकाश प्राप्त  नौकरशाहों की टीम जिसमें पी शंकर, एस एन मेनन, कुमुद बंसल और एस सी मेहता शामिल हैं, ने हाल ही में मूल्यांकन का काम किया है. इन बाहरी (तीसरा पक्ष) लोगों ने 130 बाबुओं की लिस्ट में से 80 बाबुओं को संयुक्त सचिव पद के लिए चिन्हित किया है.

लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस चयन प्रक्रिया ने ज़्यादातर बाबुओं को प्रमोशन प्रक्रिया से बाहर कर दिया है, जिससे इनका  रैंक नीचे की ओर खिसकेगा. फिर भी जिन अवकाश प्राप्त बाबुओं की टीम ने मूल्यांकन का काम किया है, उन सभी का सेवाकाल नि:संदेह ग़ैर-विवादित और त्रुटिरहित रहा है. साथ ही उक्त लोगअपनी नौकरी के दौरान भी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग करते रहे हैं. इन लोगों ने मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए संबंधित फील्ड में बाबुओं के अनुभव और दक्षता को महत्व दिया, न कि एसीआर को. मूल्यांकन की पुरानी व्यवस्था में माना जाता था कि अपने वरिष्ठों को प्रभावित करके अधिकारीगण ज़्यादा ग्रेड पा लेते थे. लेकिन, इस नई व्यवस्था को पारदर्शी माना जा रहा है, भले ही कुछ ऐसे असंतुष्ट बाबू इससे सहमत न हों, जो इस मूल्यांकन प्रक्रिया की वजह से पीछे रह गए हों. आशा है कि चंद्रशेखर व्यवस्था में सुधार के लिए ऐसी सार्थक पहल की शुरुआत करेंगे.

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