अस्थावां विधानसभा क्षेत्र : आसान नहीं विधायक की राह

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बिहार विधान सभा के आगामी चुनाव में नए परिसीमन के अनुसार अब नालंदा ज़िले के आठ विधान सभा की जगह सात विधान सभा क्षेत्र में चुनाव होंगे. नए परिसीमन में जहां एक ओर चंडी विधान सभा क्षेत्र को विलोपित कर उसे हरनौत विधान सभा क्षेत्र में मिला दिया गया है, वहीं राजगीर (सुरक्षित) विधान सभा क्षेत्र के कतरीसराय प्रखंड के पांच पंचायत के लगभग तीस हज़ार मतदाताओं को अस्थावां विधान सभा से जोड़ दिया गया है. यह विधान सभा क्षेत्र पूर्व से संवेदनशील रहा है. बेलछी कांड के मुख्य अभियुक्त रहे स्वर्गीय इंद्रदेव चौधरी से लेकर कुर्मी चेतना महारैली के महानायक सतीश कुमार तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बिहार विधान सभा में कर चुके हैं. नालंदा का डॉन स्वर्गीय टी.पी. सिंह भी इस क्षेत्र से विधान सभा चुनाव में अपना भाग्य आज़मा चुके हैं.

अस्थावां विधान सभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र है. कुर्मी जाति के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख है. वहीं मुस्लिम जाति की संख्या लगभग 25 हज़ार, यादव की संख्या 10 से 15 हज़ार, पासवानों की संख्या 15 हज़ार, भूमिहार की संख्या 15 हज़ार एवं अन्य जातियों की संख्या 80 हज़ार है. ज़ाहिर है कि वर्तमान राजनैतिक हालात से तो संकेत यही है कि आगामी विधान सभा चुनाव में मतदाताओं की जातीय कतारबंदी अगर हुई तो कर्मी, भूमिहार, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एवं रविदास छोड़कर शेष महादलित एक खेमे मे होंगे और वह खेमा होगा जद (यू) का, मुस्लिम को रिझाने की दो तऱफा कोशिशें जारी है.

अस्थावां विधान सभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग दो लाख पचास हज़ार है जिसमें महिलाओं की संख्या 90469 है. पुराने परिसीमन के अनुसार अस्थावां विधान सभा क्षेत्र की भौगोलिक बनावट में बिंद, सरमेरा, एवं अस्थावां प्रखंड ही शामिल था. पिछले दो बार से इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व कर रहे जदयू के डा. जितेंद्र कुमार का विरोधी का खेमा सक्रिय होने लगा है, इस कारण जदयू से टिकट पाने वालों की आशा पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं में उपजी है. क्षेत्र के मतदाताओं का अनुमान है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर नालंदा में काम करने के आधार पर कुछ क्षेत्रों में प्रत्याशी बदलेंगे तो उसमें अस्थावां के वर्तमान विधायक डा. जितेंद्र कुमार का भी पत्ता कट सकता है. अगर अक्टूबर 2005 के अस्थावां विधान सभा चुनाव को देखें तो यह स्पष्ट है कि सबसे कम उम्मीदवार इसी क्षेत्र में थे, जहां से कुल पांच उम्मीदवार चुनाव लड़े थे. उनमें वर्तमान विधायक डा. जितेंद्र कुमार जद(यू) से, डा. कुमार पुष्पाजंय (निर्दलीय), अनुग्रह सिंह (निर्दलीय), ध्यान प्रकाश उ़र्फ ओम प्रकाश बीएसपी, एवं जितेंद्र प्रसाद एसएपी शामिल थे. जद(यू) के जितेंद्र कुमार ने कुल 40474 मत प्राप्त किया था वहीं निर्दलीय प्रत्याशी डा. कुमार पुष्पाजंय को 24988 मत प्राप्त हुए थे और 15486 मतों से डा. जितेंद्र कुमार ने जीत हासिल की थी.

पिछले दो विधान सभा चुनाव में जीत हासिल कर रहे वर्तमान विधायक डा. जितेंद्र कुमार द्वारा अपने क्षेत्र में विकास कायोर्र्ं की कथित धीमी गति से मतदाताओं के बीच का़फी रोष देखा जा रहा है. इस क्षेत्र से डा.जितेंद्र कुमार के पिता अयोध्या प्रसाद ने वर्ष 1985 में एवं डा. कुमार पुष्पाजंय के पिता आर.पी. शर्मा वर्ष 1985, 1990, एवं 2000 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. डा. कुमार पुष्पाजंय वर्ष 2005 में दो बार हुए चुनावों में राजद एवं निर्दलीय टिकट पर चुनाव लड़े , परंतु उन्हें दोनों ही बार हार का मुंह देखना पड़ा. वर्तमान में भी इनके जनाधार में कोई इज़ा़फा नज़र नहीं हो रहा है. फिर भी इनका प्रयास इस बार लोजपा से टिकट लेने का है. वर्ष 2009 में कुमार पुष्पाजंय जद(यू) के टिकट पर विधान परिषद का सीट भी लोजपा प्रत्याशी राजू यादव से हार चुके हैं.

इस क्षेत्र से कुर्मी चेतना महारैली के नायक सतीश कुमार जो वर्ष 1995 में अस्थावां क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और इस बार पुन: स्वयं या अपने पुत्र को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं. जहां तक श्री सतीश कुमार की बात है कुर्मी चेतना महारैली को सफल बनाने के बावजूद उन्हें कोई ख़ास लाभ नहीं मिल पाया है. पिछले 2009 के लोकसभा चुनाव में सतीश कुमार ने नालंदा संसदीय क्षेत्र से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा परंतु जदयू के प्रत्याशी से बुरी तरह पराजित हुए. अस्थावां विधान सभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र है. कुर्मी जाति के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख है. वहीं मुस्लिम जाति की संख्या लगभग 25 हज़ार, यादव की संख्या 10 से 15 हज़ार, पासवानों की संख्या 15 हज़ार, भूमिहार की संख्या 15 हज़ार एवं अन्य जातियों की संख्या 80 हज़ार है. ज़ाहिर है कि वर्तमान राजनैतिक हालात से तो संकेत यही है कि आगामी विधान सभा चुनाव में मतदाताओं की जातीय कतारबंदी अगर हुई तो कर्मी, भूमिहार, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एवं रविदास छोड़कर शेष महादलित एक खेमे मे होंगे और वह खेमा होगा जद (यू) का, मुस्लिम को रिझाने की दो तऱफा कोशिशें जारी है. परंतु तय है कि उक्त चुनाव में मुस्लिम मतदाता वहीं होंगे जहां भाजपा नहीं होगी. यादवों, पासवानों का राजद लोजपा खेमे में रहना तय है तो रविदासों का बसपा में रहना भी. अगर ललन फैक्टर ने काम किया तो भूमिहार मतदाताओं की वर्तमान स्थिति में परिवर्तन हो सकता है.

जदयू से टिकट पाने वालों में वर्तमान विधायक डा. जितेंद्र कुमार के अतिरिक्त सक्रिय रूप से अस्थावां से राजनीति कर रहे अनिल कुमार उ़र्फ महाराज जी, राज्य परिषद सदस्य (महिला प्रकोष्ठ) जद (यू) अनिता सिंह शामिल है जो सभी एक ही कुर्मी जाति (घमैला उपजाति) के हैं. इस क्षेत्र से वर्तमान विधायक डा. जितेंद्र कुमार को जदयू ने टिकट दे भी दिया तो इनके विरूद्ध जदयू के बागी सक्रिय प्रत्याशी का चुनाव लड़ने की का़फी संभावना बनी हुई है और यह सीट जदयू की झोली में पुन: जाए इसके लिए पार्टी को का़फी मशक्कत करनी पड़ सकती है.

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