बाबुओं पर नीतीश की नकेल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के करोड़पति नौकरशाहों (इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं) पर लगाम कसने की कवायद में अब अपना अगला कदम उठाने की तैयारी में हैं. उनकी यह कवायद यदि कामयाब होती है तो भ्रष्ट नौकरशाहों को न केवल अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने पर उनकी संपत्ति भी जब्त हो जाएगी. बिहार स्पेशल कोटर्‌‌स अधिनियम, 2009 को एक साल की प्रतीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी. इसके अंतर्गत राज्य सरकार को भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन के अलावा भ्रष्ट नौकरशाहों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार भी हासिल है. राज्य के मुख्य सचिव अफजल अमानुल्लाह का दावा है कि इस कानून के लागू होने के साथ ही सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में बिहार अन्य राज्यों से आगे हो गया है. नीतीश कुमार खुद भला ऐसे लोकलुभावन मुद्दों पर चुप कैसे रह सकते हैं. उन्होंने घोषणा कर दी है कि अधिकारियों से जब्त की गई संपत्ति से गांवों में नए स्कूल खोले जाएंगे. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह घोषणा मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि भ्रष्टाचार हमेशा ही बिहार में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है. हालांकि यह कहना मुश्किल है कि चुनाव के आते-आते इस मामले का कितना असर बरकरार रहेगा. राजनीति में एक साल का समय काफी लंबा होता है और बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि नीतीश सरकार राज्य के भ्रष्ट नौकरशाहों के खिलाफ कैसे आगे बढ़ती है. वैसे भी पुराने लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसी घोषणाओं और ऐसे कानूनों को अलग-अलग रूप में पहले भी कई बार देखा है.

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