जीटी रोड पर अवैध कारोबार

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गया ज़िले में ग्रैंड ट्रंक रोड, अब राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या दो में क़रीब 72 किलोमीटर का हिस्सा तमाम तरह के अवैध कारोबार करने वालों के लिए अभयारण्य बन गया है. इस बात का पुख्ता प्रमाण जीटी रोड पर पड़ने वाले गया ज़िले के चार थाने -आमस, शेरघाटी, डोभी और बाराचट्टी, पुलिस पदाधिकारियों तथा शेरघाटी अनुमंडल मुख्यालय में प्रशासनिक पदाधिकारियों की पदस्थापना के लिए ऊंची पहुंच और मोटी रक़म चर्चा का विषय बन गए हैं. इस बात से गया ज़िला ही नही, बल्कि छोटी-मोटी समझ रखने वाले आम लोगों से लेकर पुलिस प्रशासन के उच्च पदाधिकारी भी वाक़ि़फ हैं.

राज्य के परिवहन विभाग द्वारा डोभी के निकट बनाए गए जांच चौकी पर एंट्री माफिया का़फी सक्रिय हैं. प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों को जांच चौकी के पदाधिकारियों की मिलीभगत से पार कराकर अवैध रूप से राशि वसूली जाती है. इसके लिए एंट्री माफियाओं द्वारा सांकेतिक भाषा तथा मोबाइल फोन का उपयोग किया जाता है. यदि जांच चौकी पर पदस्थापित पदाधिकारी से लेकर पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन का प्रिंट आउट निकाला जाए, तो पता चल जाएगा कि राज्य सरकार को किस तरह राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है.

जीटी रोड पर जिस्म़फरोशी से लेकर अवैध कोयला, खाद्यान, एलपीजी गैस, किरासन तेल, स्प्रिट, अवैध शराब, नकली सामानों के निर्माण से लेकर अन्य तरह के कारोबार इन दिनों बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं. इनमें एक धंधा दस टन से अधिक माल ले जाने वाले ट्रकों को ग़लत तरीक़े से पार कराने का है, जिसे एंट्री का कारोबार कहते हैं. इससे बिहार सरकार को प्रति माह लाखों ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है. आमस थाना से लेकर इस सड़क की पूर्वी सीमा बाराचट्टी थाना क्षेत्र तक बनी झोपड़ियों में ट्रक चालकों द्वारा कोयला चोरी कर बेच दिया जाता है. यह कारोबार धड़ल्ले से संबंधित पदाधिकारियों को सेवा शुल्क देकर किया जा रहा है. इसी क्षेत्र में डोभी थाना के अंतर्गत पड़ने वाले पोखरा नामक स्थान पर कई लाइन होटलों में ट्रकों से माल काटने का कारोबार ट्रक चालकों की मिलीभगत से किया जा रहा है. बताया जाता है कि मलकटवा गिरोह ट्रक चालकों के इशारे पर या फिर अपनी चालाकी से लाइन होटलों पर लगे ट्रकों से पलक झपकते ही माल सा़फ कर देते हैं. चोरी के इन मालों को तुरंत ठिकाने भी लगा दिया जाता है.

राज्य के परिवहन विभाग द्वारा डोभी के निकट बनाए गए जांच चौकी पर एंट्री माफिया का़फी सक्रिय हैं. प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों को जांच चौकी के पदाधिकारियों की मिलीभगत से पार कराकर अवैध रूप से राशि वसूली जाती है. इसके लिए एंट्री माफियाओं द्वारा सांकेतिक भाषा तथा मोबाइल फोन का उपयोग किया जाता है. यदि जांच चौकी पर पदस्थापित पदाधिकारी से लेकर पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन का प्रिंट आउट निकाला जाए, तो पता चल जाएगा कि राज्य सरकार को किस तरह राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है. इसी प्रकार जीटी रोड के किनारे स्थित लाइन होटलों में जिस्म़फरोशी का धंधा भी होता है. शाम होने के साथ ही जीटी रोड के लाइन होटलों में जिस्म़फरोशी का धंधा परवान चढ़ने लगता है. इस रोड पर रात के समय पुलिस के आने का खतरा भी नही रहता है, क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण शाम के बाद पुलिस का सारा ध्यान नक्सली गतिविधियों पर लगा रहता है. यदि कोई इस धंधे में पकड़ा भी गया, तो पैरवी के कारण थाने से ही छोड़ दिया जाता है. यही कारण है कि एक रिपोर्ट के अनुसार शेरघाटी अनुमंडल क्षेत्र से ही एचआईवी पॉजीटिव से पीड़ित मरीजों की रिपोर्ट सर्वाधिक है. जीटी रोड पर बाराचट्टी थाना क्षेत्र के रोही गांव में बड़े पैमाने पर नकली चाय पत्ती बनाने का कार्य किया जा रहा है. बताया जाता है कि चना के छिलके की भूसी को पीसकर चाय पत्ती में मिलाकर उसे ट्रकों से कोलकाता भेजा जाता है. इस कार्य में रोही गांव के ही कई लोग लगे हुए हैं. इसके लिए संबंधित थाने के पुलिस पदाधिकारियों को भी भरोसे में रखा जाता है. उपर्युक्त कारोबार के अलावा पेट्रोलियम पदार्थों, कैरासिन तेल के साथ-साथ अन्य कई तरह के अवैध कारोबार किए जा रहे हैं. हालांकि परिवहन जांच चौकी पर पदस्थापित पदाधिकारी एंट्री माफियाओं के द्वारा सीमा से अधिक लदे माल वाले ट्रकों को पार कराए जाने की बात से अनभिज्ञता ज़ाहिर करते हैं. शेरघाटी अनुमंडल में पदस्थापित पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी इस अनुमंडल के अंतर्गत जीटी रोड पर किए जा रहे अवैध कारोबार के संबंध में कुछ भी बोलने से मना करते हैं.  प्राचीन काल में व्यापार के लिए सम्राट अशोक ने भारत के जिस सिल्क मार्ग का निर्माण कराया था और बाद में जिस सड़क का जीर्णोद्धार और विस्तार प्रसिद्ध शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड के रूप में पेशावर से कलकत्ता तक कराया, उसकी यह दशा इलाक़े के लोगों के लिए चिंता का विषय है.

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