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रेत माफिया के कारण घडि़यालों पर संकट

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खनिज और रेत माफिया मध्य प्रदेश के एक और अभ्यारण्य को समाप्त करने जा रहा है. जैव विविधता की परिकल्पना मध्य प्रदेश में अलग-अलग माफियाओं के चलते इन दिनों संकट में है. विंध्य क्षेत्र की सबसे बड़ी नदियों में शामिल की गई सोन नदी के तट पर बना घड़ियाल अभ्यारण्य राज्य शासन की उपेक्षा और अनदेखी का शिकार बन चुका है.

मध्य प्रदेश में विलुप्ति की कगार पर जा रहे घड़ियाल, मगरमच्छों की दुर्लभ जलीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए इस केंद्र की स्थापना की गई थी. इस अभ्यारण्य के लिए राज्य सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रूपए का बजट आवंटित करती है. प्रतिबंधित क्षेत्र में रेत माफिया द्वारा लगातार किया जा रहा अवैध उत्खनन राज्य शासन के स्थानीय अधिकारियों के लिए चिंता का विषय नहीं है. रेत माफिया स्थानीय अधिकारियों और नेताओं से ही पिछले दो वर्षों से सक्रिय है.

सोन घड़ियाल अभ्यारण्य मध्य प्रदेश में सोन नदी की विविधता और प्राकृतिक सौन्दर्य को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन के आदेश से 23 सितम्बर 1981 को स्थापित किया गया था. उस समय के एक सर्वेक्षण के अनुसार इस क्षेत्र में मगरमच्छ और घड़ियालों की कुल संख्या 13 बताई गई थी, जबकि वास्तविकता कुछ और थी. क्षेत्र में कार्यरत पर्यावरणविदों के अनुसार इस क्षेत्र में घड़ियालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है और उसका प्रमुख कारण सोन नदी के तट पर अनधिकृत रूप से कार्यरत रेत माफिया हैं.

रेत माफिया के अवैध संग्रहण के कारण मगरमच्छ और घड़ियाल सोन नदी से करीब बसाहट वाले गांव में घुसकर जानवरों और ग्रामीणों को शिकार बना रहे हैं. जिला चिकित्सालय वैढ़न में पदस्थ चिकित्सक डॉ. आर.बी. सिंह के अनुसार प्रतिवर्ष 40 से 50 लोग घड़ियालों के हमले का शिकार होकर यहां आते है, जिनमें से कुछ को तो बचा लिया जाता है पर कई लोग अकाल मौत का भी शिकार हो जाते हैं. रेत माफिया सोन नदी से अवैध रूप से उत्खनन करने के लिए नदी को लगातार खोदने का काम करता है, परिणामत: पानी में होने वाली लगातार हलचल के परिणाम स्वरूप घड़ियालों के लिए निर्मित किए गये इस प्राकृतिक वातावरण में परिवर्तन आता है.

इस अभ्यारण्य का उद्घाटन प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह द्वारा 10 नवम्बर 1981 को किया गया था. अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 209.21 किमी का है. इसमें सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल जिले में प्रवाहित होने वाली सोन नदी के साथ गोपद एवं बनास नदी का कुछ क्षेत्र भी शामिल है. सोन घड़ियाल अभ्यारण्य नदियों के दोनों ओर 200 मीटर की परिधि समेत 418.42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र संरक्षित घोषित है.

मध्य प्रदेश में विलुप्ति की कगार पर जा रहे घड़ियाल, मगरमच्छों की दुर्लभ जलीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए इस केंद्र की स्थापना की गई थी. इस अभ्यारण्य के लिए राज्य सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रूपए का बजट आवंटित करती है. प्रतिबंधित क्षेत्र में रेत माफिया द्वारा लगातार किया जा रहा अवैध उत्खनन राज्य शासन के स्थानीय अधिकारियों के लिए चिंता का विषय नहीं है. रेत माफिया स्थानीय अधिकारियों और नेताओं से ही पिछले दो वर्षों से सक्रिय है. सूत्रों की मानें तो भारत शासन द्वारा घड़ियाल अभ्यारण्य में खर्च की जाने वाली राशि फर्जी बिल बाउचर्स के जरिए वन अधिकारियों एवं स्थानीय अधिकारियों के निजी खजाने में जा रही है. सोन नदी के जोगदाह पुल से कुछ आगे रेत का अवैध उत्खनन व्हील बना हुआ है, जहां से रेत माफिया इस क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हैं.

सोन घड़ियाल के प्रभारी संचालक ने चौथी दुनिया को बताया कि 200 किलोमीटर संरक्षित क्षेत्र के लिए केवल 13 सुरक्षाकर्मी उपलब्ध है. मगरमच्छ एवं घड़ियालों की सुरक्षा के लिए प्रतिवर्ष 30 लाख रूपये का बजट आवंटित किया जाता है. अब तक तकरीबन 250 मगरमच्छ एवं घड़ियालों के बच्चे संरक्षित क्षेत्र में छोड़े गए हैं, जिनकी संख्या अब लगभग 150 के करीब है. श्री वर्मा के अनुसार शीघ्र ही वैज्ञानिक सर्वे कराया जाना प्रस्तावित है, इसके बाद भिन्न प्रजातियां एवं उनकी वास्तविक संख्या का आंकलन किया जा सकेगा.वरना बाघों की तरह इनके दर्शन भी दुर्लभ हो जाएंगे.

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Comments (1)

  1. khabar ne adhikariyo ki kholi poll…is khabar ko padh kar gyat hota hai ki kitna bhrastachar hai…hamari chothi dunia ke lekhak ko shubhkamnaye or badhai..

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