सार-संक्षेप

इंजीनियर को एक वर्ष का कारावास

आय से अधिक संपत्ति रखने और सरकारी नियमों के अनुसार उसका खुलासा न करने के आरोप में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री महेंद्र सिंह चौहान को विशेष न्यायालय जबलपुर ने एक वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हज़ार रुपये के ज़ुर्माने से दंडित किया है. महेंद्र सिंह चौहान जब जबलपुर में इंजीनियर पद पर कार्यरत थे, तब 24 फरवरी 1995 को लोकायुक्त-पुलिस ने उनके आवास पर छापा मारकर लाखों रुपये की अघोषित चल-अचल संपत्ति का पता लगाया था. इस पर 26 फरवरी 1995 को अपराध दर्ज़ कर जांच की गई तो पता चला कि चौहान के पास आय से अधिक सवा 18 लाख रुपये की संपत्ति है. इस पर लोकायुक्त कार्यालय स्थित विशेष न्यायालय जबलपुर में जनवरी 1999 में प्रकरण प्रस्तुत किया गया. इसका फैसला हाल में हुआ है.

डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की नकेल

मध्य प्रदेश सरकार ने ऐसे चिकित्सकों पर एक बार फिर से लगाम कसने का प्रयास किया है, जो मरीज़ों को ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं धड़ल्ले से लिखकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने हाल में एक आदेश जारी किया है कि अब सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक मरीज़ों के पर्चे पर जेनरिक दवाओं को ही लिख सकेंगे, ब्रांडेड दवाएं नहीं. इसके पीछे शासन की सोच यह है कि दवा कंपनियों से चिकित्सकों को मिलने वाले कमीशन और गिफ्ट पर रोक लग सके. इससे ग़रीब मरीज़ों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा, लेकिन आदेश को सरकारी चिकित्सकों के अलावा निजी चिकित्सकों पर भी सख्ती से लागू किया जाना ज़रूरी है. पांच साल पहले भी राज्य सरकार ने इस आशय का एक आदेश जारी किया था, जिसमें सरकारी डॉक्टरों को अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज़ों को ब्रांडेड कंपनियों के नाम न लिखने के निर्देश दिए गए थे. आदेश में स्पष्ट किया गया था कि डॉक्टर रोगी के पर्चों में दवाओं के केमिकल नाम भी लिखें, जिससे वह अपनी सुविधा के अनुसार दवाएं खरीद सके. लेकिन इस आदेश का पालन एक माह भी नहीं हो सका था.

भूजल स्तर गिरने से पन्द्रह हज़ार हैण्डपंप ठप्प

ग्रीष्म ऋतु के आते ही मध्य प्रदेश में जल संकट गहराने लगा है. राज्य में जिस तेज़ी से भूजल स्तर नीचे खिसक रहा हैं, वह चिन्ता का विषय बना हुआ है. हाल ही राज्य के मुख्य सचिव अवनि वैश्य ने पेयजल आपूर्ति और ग्रीष्म ऋृतु में संभावित जल संकट के बारे में लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आला अफसरों से चर्चा की. इस चर्चा में बताया गया कि राज्य में कुल चार लाख 40 हज़ार हैण्डपंप हैं, जिनमें से लगभग 15 हज़ार हैण्डपंप जल स्तर खिसक जाने से बेकार हो गए हैं. यह भी बताया गया कि राज्य में लगभग 2900 बस्तियों में स्वच्छ और निरापद पेयजल आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है. शासन ने ग्रीष्मकाल में जल संकट वाले क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए 115 करोड़ रूपए लागत की कार्ययोजना तैयार की है.

अ़फसरों के भोज में नदारद रहे मुख्यमंत्री

मध्य प्रदेश आईएएस ऑफीसर्स एसोसिएशन द्वारा ऑफीसर्स मेस में पिछले दिनों आयोजित भोज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के शामिल न होने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. पिछले दिनों आयकर विभाग ने छापामार कार्यवाही कर राज्य के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों और कुछ अन्य आला अफसरों के घर और दूसरे ठिकानों से करोड़ों रूपयों की अघोषित नगदी, जेवरात और अचल संपत्ति का पता लगाया है. इसके बाद प्रशासन की भ्रष्ट छवि को लेकर मुख्यमंत्री और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में भारी चिन्ता व्याप्त हो गई. अधिकारी अपराध बोध से ग्रस्त होकर, शासन की छवि सुधारने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिले और उनसे शासन प्रशासन के बीच उत्पन्न अविश्वास के माहौल को सुधारने की अपील की. मुख्यमंत्री ने भी राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों में परस्पर विश्वास की भावना विकसित करने पर ज़ोर दिया. इसी प्रक्रिया में आईएएस एसोसिएशन ने भोज का आयोजन किया था और आयोजन से तीन दिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को न्यौता दिया था जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन जिस दिन भोज का आयोजन होना था, उसी दिन वे अपने पूर्व निर्धारित मंडला प्रवास पर चले गए और वहां से जबलपुर होते हुए भोपाल आए. अचानक भोपाल हवाई अड्‌डे से मुख्यमंत्री सीधे इन्दौर रवाना हो गए.  इस भोज में राज्य के मुख्य सचिव अवनि वैश्य, पूर्व मुख्य सचिव और बिजली बोर्ड के अध्यक्ष राकेश साहनी सहित 90 आईएएस अधिकारियों ने भाग लिया. लेकिन मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर अफसरों में अटकलें लगाई जाती रहीं. ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अभी भी आईएएस अफसरों के कामकाज और व्यवहार से खुश नहीं है.

महिला सरपंच ने गांव छोड़ा

सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए चाहे जितने भी उपाय कर ले और चाहे कितने भी बिल पास कर ले, लेकिन पुरूष प्रधान समाज व्यवस्था में आज भी ऐसे कई लोग हैं, जो राजनीति में महिलाओं के वर्चस्व को बर्दाश्त नहीं करते हैं. मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले के महाराजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बुडरक की सरपंच श्रीमती हब्बीबाई पत्नी परमलाल कुशवाह, हाल ही ग्राम पंचायत चुनाव में जनादेश से सरपंच बनी हैं, लेकिन गांव के कुछ सवर्ण दबंग इस ग़रीब अनुसूचित जाति की महिला को अपना ग्राम प्रधान नहीं मानते हैं और उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करते हैं. दबंगों की प्रताड़ना से तंग आकर हब्बीबाई अपने परिवार सहित ज़िला मुख्यालय छतरपुर में डेरा डाले हुए है. उसने बताया कि 24 फरवरी की रात में कृष्णपाल सिंह उ़र्फ राजा और उसका रिश्तेदार बलवीरसिंह, छह-सात लोगों को लेकर उसके घर आ गए और ज़बरन दरवाज़ा खुलवाने की कोशिश करने लगे. दरवाजा न खुलने पर इन दबंगों ने घर के बाहर बंदूक से हवाई फायर करके सरपंच और उसके परिवार वालों को डराया, धमकाया. महिला सरपंच का कहना हैं कि कृष्णपाल सिंह एक आपराधिक मामले में फरार है और पुलिस को उसकी तलाश है, लेकिन वह गांव में बेधड़क रहता है और ग़रीब लोगों को डराता-धमकाता है. उसे हब्बीबाई का सरपंच पद पर आसीन होना पसंद नहीं है. इसीलिए वह उसे और उसके परिवार वालों को जब-तब डराता-धमकाता रहता है. इतना ही नहीं, मोबाईल फोन पर वह हब्बीबाई के खेत की फसल जला देने की धमकी भी देता है और जब कभी भी उसके परिवार का कोई सदस्य अपने खेत पर जाता है तो उसके साथ मारपीट भी करता है.  हब्बीबाई ने बताया कि उसने कृष्णपाल सिंह के खिला़फ थाना महाराजपुर में शिकायत भी की है, लेकिन अब तक पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है. उसने ज़िला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से संरक्षण देने की मांग की है और कहा है कि जब तक सरंक्षण नहीं मिलेगा वह अपने गांव वापस नहीं लौटेगी.

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