राजस्थान के अर्द्धशुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र का भू-भाग शेखावाटी. यह इलाका सेठों की जन्मस्थली और वीरों की कर्मभूमि रहा है. रेतीले धारों के बीच यहां की हवेलियां और उन पर बने भित्ति चित्रों की भव्यता बेमिसाल है. इस क्षेत्र की प्रचलित लोक कलाएं, हस्तशिल्प और जीवनशैली पूरे देश में अपनी अमिट छाप रखती हैं. शेखावाटी की इसी कला, संस्कृति एवं परंपरा को पोषित और मशहूर करने के मक़सद से मोरारका फाउंडेशन पिछले पंद्रह वर्षों से शेखावाटी उत्सव का आयोजन करता आ रहा है. मोरारका फाउंडेशन के इस अभिनव प्रयास ने शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक सुंदरता को विश्व पटल पर ख्याति दिलाने में सफलता पाई है. इस साल भी यह उत्सव नवलगढ़ के सूर्यमंडल स्टेडियम में 12 से 14 फरवरी को आयोजित हुआ, जिसमें विविध सांस्कृतिक और पारंपरिक गतिविधियों का अद्वितीय संगम देखने को मिला. गणमान्य अतिथियों और हज़ारों देशी-विदेशी दर्शकों की मौज़ूदगी में जैसलमेर के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा पेश सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्रामीण खेलों की प्रतियोगिताएं, शेखावाटी की मशहूर हवेलियां, भित्ति चित्रों, कुएं, बावड़ी और ग्रामीण परिवेश की फोटो प्रदर्शनी के आयोजनों ने सभी का मन मोह लिया. ख़ासकर ऑर्गेनिक फूड बाज़ार ने लोगों को बेहद आकर्षित किया. मोरारका फाउंडेशन द्वारा संचालित ऑर्गेनिक फार्मिंग कार्यक्रम के तहत बिना ज़हर और रसायनों के पैदा होने वाले कृषि उत्पादों को मेले में आए लोगों ने ख़ूब सराहा. विशेषकर किसानों ने इसका लाभ उठाया. अगर यह कहा जाए कि शेखावाटी उत्सव ने आज इस क्षेत्र की सूरत बदल दी है तो ग़लत नहीं होगा. आज से दस साल पहले यहां की तमाम हवेलियों में ताला जड़ा रहता था. इनका संरक्षण करने की गरज से मोरारका फाउंडेशन ने मोरारका हवेली के माध्यम से इनका बचाव शुरू किया. इसे देख दूसरे उद्योगपतियों ने भी अपनी-अपनी हवेलियों के संरक्षण का सिलसिला शुरू कर दिया. कभी वीरानी में गुम ये हवेलियां आज शेखावाटी उत्सव की वज़ह से गुलज़ार हो चुकी हैं. इनकी ख़ूबसूरती को निहारने के लिए सालों भर देशी-विदेशी पर्यटकों का हुज़ूम उमड़ता है. शेखावाटी में ग्रामीण पर्यटन का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है. विदेशी आते हैं, किसानों के साथ घरों में रहते हैं, खेतों में काम करते हैं और भारत की ख़ूबसूरत तस्वीर लेकर वापस लौट जाते हैं. यक़ीनन शेखावाटी उत्सव ने इस क्षेत्र को नई पहचान और नया आयाम दिया है.
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