अदानी समूह पर सरकार मेहरबान

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में बिजली संकट और कोयला संकट से निपटने के लिए जिस उदारता से निजी क्षेत्र का सहयोग लेती आई है, उससे घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार के संदेह जन्म लेने लगे हैं. विशेष रूप से गुजरात के अदानी उद्योग व्यापार समूह पर सरकार की अति मेहरबानी अनेक रहस्यों और संदेहों की अनकही कहानी बयां करती है.

बिजली और कोयला संकट के नाम पर शिवराज सिंह सरकार की एक विशेष औद्योगिक घराने के प्रति उदारता कई सवाल उठा रही है. मामले को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में खासी सरगर्मी है. प्रमुख विपक्षी नेताओं ने तो सीबीआई जांच की मांग तक कर डाली है.

वर्षों से बिजली संकट झेल रहे मध्य प्रदेश में 2008 के विधानसभा चुनाव के पूर्व राज्य सरकार ने बिजली संकट के समाधान के लिए अन्य राज्यों और निजी कंपनियों से बिना टेण्डर के लगभग दो हज़ार करोड़ रुपयों की बिजली खरीदी. लेकिन अज्ञात कारणों से मंहगी बिजली खरीदकर पॉवर बैंकिंग के नाम पर सस्ती दरों पर बिजली बेचने का भी काम किया. इस घाटे के अजब-ग़जब कारोबार को लेकर तरह-तरह की शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं. कांग्रेस के ज़िम्मेदार नेतागण तो खुलकर आरोप लगाते हैं कि बिजली खरीद और बेचने के गोरखधंधे में भारी भ्रष्टाचार कमीशनबाज़ी के रूप में हुआ है. जिन निजी कंपनियों के माध्यम से यह कारोबार हुआ, उनमें अदानी समूह के माध्यम से बिना टेण्डर लगभग 750 करोड़ रूपयों की बिजली खरीदी गई.

इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में राज्य विद्युत मंडल के अध्यक्ष राकेश साहनी पर विपक्ष ने गंभीर आक्षेप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग कई बार उठाई है. विधानसभा में प्रतिपक्ष की नेता श्रीमती जमुना देवी और विधायक राकेश सिंह ने बिजली विभाग में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा का तो यहां तक कहना है कि पिछले चार वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने 22 हज़ार करोड़ रूपयों की बिजली खरीदने और पॉवर बैंकिंग के नाम पर बेचने का कारोबार किया है और इस गोरखधंधे में अदानी कंपनी समूह तथा दूसरे तीन-चार दलालों ने तीन हज़ार करोड़ रूपयों की कमीशन से कमाई की है.

अब मध्य प्रदेश सरकार ने अदानी समूह से कोयला खरीदने का सौदा करके बदनामी का एक और मामला खोल दिया है. इस बीच कोयले में मिलावट और घोटाले की आशंका को लेकर श्रीमती जमुना देवी ने समूचे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर डाली है. गुजरात के जिस अदानी समूह के मा़र्फत राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में बिना निविदाओं के बढ़ी दरों पर साढ़े सात सौ करोड़ रूपए की बिजली खरीदी थी तथा शिवराज सरकार और तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश साहनी संदेहों के घेरे में आ गए और मामला लोकायुक्त तक गया उसी से अब कोयला खरीदने की तैयारी की जा रही है. उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश विद्युतमंडल के अध्यक्ष राकेश साहनी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा खरीदी गई महंगी बिजली पर विपक्षी दल कांग्रेस ने शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा किया था. इन आरोपों से लगी राजनीतिक आग अभी ठंडी भी नहीं हो पाई थी कि इस बीच सरकार ने विदेशी कोयले की खरीद के लिए फिर से अदानी समूह को आदेश जारी करने की तैयारी कर ली है, हालांकि सरकार कह रही है कि वैश्विक निविदा बुलाए जाने पर कोयले की सबसे कम दरें अडानी समूह की हैं. इसी आधार पर उससे कोयला खरीदने की तैयारी की जा रही है. अडानी समूह ने राज्य सरकार को 4850 रूपए प्रति टन की दर से डेढ़ लाख मैट्रिक टन कोयला देने की सहमति दी है. इसके लिए राज्य सरकार की गारंटी पर मध्य प्रदेश विद्युत उत्पादन कंपनी, सिंडीकेट बैंक से साढ़े नौ प्रतिशत ब्याज दर पर क़र्ज़ लेने जा रही है. इस बीच सूत्रों का कहना है कि अदानी समूह द्वारा निविदा में दी गई दरें भारतीय कोयला आपूर्ति कंपनियों एसईसीएल और डब्ल्यूसीएल की दरों से लगभग दो गुना ज़्यादा है.

सरकार के पास पैसे नहीं

एक ओर तो सरकार अदानी कंपनी समूह से आयातित कोयला खरीदने का फैसला कर चुकी है और इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं, तो दूसरी ओर सरकारी बिजली कंपनी पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने सतपुड़ा ताप बिजली घर सारणी के लिए जब विदेश से कोयला आयात करने के लिए सरकार से जनवरी माह में पैसे मांगे, तो खज़ाना खाली होने का बहाना बनाकर सरकार ने इस कंपनी को पैसा देने से सा़फ इंकार कर दिया.

बताया जाता है कि कंपनी ने सरकार से 72 करोड़ रुपयों की मांग की थी. सरकार ने जब पैसे देने से मना कर दिया, तो कंपनी ने जबलपुर के सिंडिकेट बैंक से साढ़े नौ प्रतिशत ब्याज दर पर 72 करोड़ रुपए ऋृण लेने के प्रयास किए. लेकिन बैंक ने सा़फ कर दिया कि यदि राज्य सरकार इस ऋण के लिए गारंटी देगी, तभी कंपनी को ऋण प्रदान किया जा सकेगा. बताते हैं कि सरकार ने गारंटी देना मान लिया है. इससे यह सवाल उठता है कि अगर सरकारी कंपनी द्वारा कोयला खरीदी के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, तो सरकार अदानी कंपनी समूह से अरबों रूपयों का कोयला कहां से खरीदेगी या फिर यह भी कि सरकार को अदानी कंपनी को उपकृत करना है, इसीलिए उसने अपनी बिजली कंपनी को कोयला कंपनी के लिए पैसे देने में असमर्थता जताई है.

टैक्स चोरी में पकड़े गए

गुजरात की अदानी समूह के प्रमुख कर्ताधर्ता राजेश अदानी पिछले दिनों केंद्रीय सरकार के सेंट्रल एक्साइज एवं आयात शुल्क विभाग द्वारा करोड़ों रूपयों की कर चोरी के मामले में गोवा में गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी है, लेकिन फिर भी इस कंपनी से कोयला आयात करने का क़रार मध्य प्रदेश सरकार ने किया है.

मध्य प्रदेश में कई कोयला खदानें हैं और इन खदानों का कोयला देश भर में भेजा जाता है. कोयले के इस कारोबार में खदान से लेकर कोल डिपो और परिवहन प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में कोयला चोरी होता है और अच्छी गुणवत्ता के कोयले को चुराकर वजन पूरा करने के लिए कोयले के ढेर में पत्थर और कचरा मिलाया जाता है. यही पत्थर और कचरायुक्त कोयला बिजली संयंत्रों को भेजा जाता है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बिजली उत्पादन कंपनियों के आला अफसर कई बार शिकायत कर चुके हैं कि राज्य के बिजली संयंत्रों को मिलने वाले कोयले में बड़ी मात्रा में पत्थर और कचरा होता है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित होता है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि कोयला कंपनियां तो अच्छा कोयला ही भेजती हैं. बीच में कोयला परिवहन करने वाले और भंडारण करने वाले कोयला चोरी करते हैं और उसमें पत्थर कचरा मिलाकर वजन पूरा कर देते हैं. इस गोरखधंधे में कोयला कंपनियों और बिजली संयंत्रों के ज़मीनी अधिकारियों की मिली भगत से इंकार नहीं किया जा सकता है. कोयला चोरी करोड़ों रुपयों का लाभदायक धंधा है और इस कमाई का बंटवारा ऊपर से नीचे तक होता है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में तो कोयला चोरी का बड़ा मामला संसदीय जांच समिति ने पकड़ा भी है, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी किसी का ध्यान नहीं गया है. यह चोरी का कोयला उद्योगों, कल कारखानों और कोयला आपूर्ति करने वाली व्यापारिक कंपनियों के भंडार में ही जाता है.  विधानसभा में प्रतिपक्ष की नेता जमुना देवी ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा है कि मिलावटी और पत्थरयुक्त कोयले की आपूर्ति के पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है. उन्होंने कहा है कि कोयला परिवहन ठेकेदारों, अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत के बिना यह काम नहीं हो सकता है. उन्होंने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की है.

कोयला आयात पर आशंकाएं

मुख्यमंत्री और बिजली संयंत्रों के आला प्रबंधकों ने मिलावटी कोयले की बार-बार शिकायत करके बिजली संयंत्रों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले के आयात के समर्थन में माहौल तैयार किया और केंद्र सरकार से आयात की अनुमति भी ले ली है. लेकिन इस बारे में कांग्रेस नेताओं को पूरी आशंका है कि कोयला आयात का धंधा भ्रष्टाचार से प्रेरित है. कांग्रेस के प्रवक्ता अरविंद मालवीय के मुताबिक़ राज्य सरकार अदानी समूह के माध्यम से कोयला आयात कर रही है, वह अपने लाभ के लिए बिजली संयंत्रों को घटिया विदेशी कोयला ही बेचेगी. मालवीय ने बताया कि देशी कोयले में नमी का प्रतिशत 12 तक रहता है, जबकि आयातित कोयले में नमी का प्रतिशत 14 तक रहता है.

अरविन्द मालवीय ने सेवानिवृत्त मुख्य सचिव राकेश साहनी को मध्य प्रदेश विद्युत मंडल का अध्यक्ष बनाने पर भी आपत्ति की है और आरोप लगाया है कि पिछले वर्षों में बिजली विभाग में हुए भ्रष्टाचार के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद भी विद्युत मंडल के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करने के पीछे मुख्यमंत्री की क्या मजबूरी है, यह मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए. भाजपा के कुछ नेताओं ने भी राकेश साहनी की इस तरह की नियुक्ति पर एतराज जताया है लेकिन मुख्यमंत्री ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है.

एक यह भी आशंका जताई जा रही है कि देश में बड़ी मात्रा में हो रही कोयला चोरी को ठिकाने लगाने के लिए कुछ कंपनियां, बिजली संयंत्रों को कोयला बेचने के लिए लालायित हैं और हो सकता है कि मध्य प्रदेश सरकार का आयातित कोयला खरीदने का फैसला भी इन कंपनियों के दबाव का ही नतीजा हो.

You May also Like

Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *