छपरा विधान सभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं. राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र अति संवेदनशील माना जाता है. नए परिसीमन के बाद होने वाले इस विस चुनाव में विभिन्न पार्टियों से जु़डे सक्रिय दावेदारों की फेहरिस्त काफी लंबी है. यह यादव बहुल क्षेत्र माना जाता है, जिसकी वजह से दशकों तक इस सीट पर एक ही जाति विशेष का क़ब्ज़ा रहा है. ग़ौरतलब है कि 2005 में हुए विस चुनाव में यहां से जदयू के राम प्रवेश राय विजयी हुए थे. उन्हें पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के हनुमान के तौर पर जाना जाता है. इससे पूर्व इस सीट पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के क़रीबी समझे जाने वाले पूर्व मंत्री उदित राय का क़ब्ज़ा था. वह लगातार तीन बार यहां से विजयी हुए. सारण की राजनीति की दिशा तय करने वाली छपरा विधानसभा सीट पर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की भी पैनी नज़र है. प्रभुनाथ सिंह के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा से जुड़ी है, क्योंकि उन्हें पूरे सारण में नीतीश कुमार को अपनी ताकत का अहसास कराना है. यही वजह है कि अभी से ही दिग्गजों के बीच शह और मात का खेल शुरू हो गया है.
वर्तमान में विभिन्न दलों से टिकट के दावेदारों में कुछ पुराने चेहरे को छोड़कर शेष युवा पीढ़ी के दावेदार नज़र आते हैं. इनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. राम जयपाल सिंह यादव के पौत्र व भ्रष्टाचार निवारण संस्थान के अध्यक्ष प्रवीण कुमार यादव, पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार सिंह, मुरारी सिंह और सुरेंद्र बागी शामिल हैं. इसके अलावा पिछले दस साल से सारण ज़िला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अनिल कुमार सिंह, राजद के पूर्व मंत्री उदित राय के साथ ही लोजपा के ज़िला अध्यक्ष रामबाबू राय और सामाजिक कार्यकर्ता झरीमन राय का नाम सुर्खियों में है.
नए परिसीमन के बाद विधान सभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति में हेरफेर हो जाने से जातीय समीकरण में व्यापक बदलाव हो गया है. नए जातीय समीकरण के हिसाब से इस सीट पर राजपूत मतदाताओं की संख्या काफी बढ़ गई है. 2,62,888 मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में राजपूत वोटरों की संख्या अब सबसे ज्यादा है. इस विधान सभा क्षेत्र में राजपूत 60 हज़ार, यादव 40 हज़ार, मुस्लिम 28 हज़ार, बनिया 26 हज़ार, भूमिहार 16 हज़ार, ब्राह्मण 12 हज़ार, दलित 10 हज़ार के साथ ही शेष अन्य जाति के मतदाता हैं, जिसके परिणाम स्वरूप राजपूत वर्ग के दावेदारों की संख्या अधिक दिखती है. संख्याबल के लिहाज से दूसरे स्थान पर यादव समुदाय आता है. परिसीमन के बाद पहली बार होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में ज़िले की राजनीति से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज राजनेताओं के अलावा सब कुछ नया है, क्योंकि परिसीमन के तहत इस विधान सभा क्षेत्र के यादव बहुल सदर प्रखंड के चौदह पंचायतों के बदले रिवीलगंज प्रखंड को शामिल कर दिया गया है, जो राजपूत बाहुल्य क्षेत्र है. इसी तरह छपरा सदर प्रखंड के सात पंचायत सहित छपरा शहर के 44 वार्ड रिवीलगंज नगर पंचायत एवं प्रखंड को मिलाकर बनाए गए छपरा विस क्षेत्र में राजपूत वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. वैसे यादव और मुसलमान का वोट संतुलन बनाने में कारगर सिद्ध हो सकता है.
वर्तमान में विभिन्न दलों से टिकट के दावेदारों में कुछ पुराने चेहरे को छोड़कर शेष युवा पीढ़ी के दावेदार नज़र आते हैं. इनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. राम जयपाल सिंह यादव के पौत्र व भ्रष्टाचार निवारण संस्थान के अध्यक्ष प्रवीण कुमार यादव, पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार सिंह, मुरारी सिंह और सुरेंद्र बागी शामिल हैं. इसके अलावा पिछले दस साल से सारण ज़िला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अनिल कुमार सिंह, राजद के पूर्व मंत्री उदित राय के साथ ही लोजपा के ज़िला अध्यक्ष रामबाबू राय और सामाजिक कार्यकर्ता झरीमन राय का नाम सुर्खियों में है. वहीं दूसरी ओर परिसीमन के तहत जलालपुर विस क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो जाने से स्थानीय भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री जर्नादन सिंह सीग्रीवाल की निगाहें भी इस सीट पर लगी हुई है. पिछली बार सूत्रधार की भूमिका निभाकर जदयू से टिकट दिलाने तथा छपरा सीट से रामप्रवेश राय को जिताने तक अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं.
इससे अलग सारण संसदीय क्षेत्र से विगत लोक सभा चुनाव में राजग प्रत्याशी के रूप में लालू प्रसाद के खिला़फ चुनाव ल़डे भाजपा नेता व राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूढ़ी की नज़रें भी इस सीट पर लगी हैं. उनके क़रीबी कार्यकर्ता बलवंत सिंह का कहना है कि विगत लोक सभा चुनाव में राजग के कुछ स्थानीय राजनेताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के बावजूद रूढ़ी छपरा विस क्षेत्र में लालू प्रसाद से साढ़े पांच हज़ार वोटों से आगे रहे थे. यह बात दीगर है कि उस चुनाव में रूढ़ी लालू प्रसाद से शिकस्त खा गए. सूत्रों का कहना है कि रूढ़ी अपने किसी खासमखास को छपरा के चुनावी अखाड़े में उतार सकते हैं. जानकारों का मानना है कि कुल मिलाकर नए परिसीमन के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में छपरा सीट के लिए राजनीतिक दिग्गजों के बीच शह-मात का खेल होना तय है.
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