हीरे और अलेक्‍जेन्‍ड्राइट की तस्‍करी जारी

राजधानी से कुछ ही दूरी पर स्थित हीरे की खदान में पिछले लंबे समय से अवैध उत्खनन का काम धड़ल्ले से जारी है. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास खनिज विभाग का ज़िम्मा भी है, इसके बावजूद सुरक्षा तंत्र इस अवैध खुदाई को रोक पाने में असक्षम है. उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश और महाराष्ट्र के खनिज मा़फिया, छत्तीसगढ़ से अवैध खनन कर हीरा निकालते हैं और बेरोक-टोक उसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंचाते हैं.

उल्लेखनीय है कि पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ और रूस में ही अलेक्जेन्ड्राइट पत्थर उपलब्ध हैं. बहुमूल्य होने के अलावा उपलब्धता कम होने के कारण भी इसकी क़ीमत करोड़ों में होती है. छत्तीसगढ़ के देवभोग और सेंधमुड़ा में इसी पत्थर की तलाश की जा रही है. देवभोग, मैनपुर, गरीयाबंद में दबे इस मूल्यवान पत्थर को बचाने के लिए राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है, हालांकि इस कार्रवाई की रूपरेखा का अभी तक कुछ पता नहीं है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मशहूर पायलीखंड की हीरा खदान स़िर्फ 150 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां इन दिनों उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र के खनिज माफिया की गतिविधियां ज़ोरों पर हैं. सरकार की नाक के नीचे हो रही इन गतिविधियों को रोक पाने में खनिज विभाग का ज़िम्मा संभाल रहे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी असक्षम हैं. खनिज विभाग के केंद्रीय उड़नदस्ते और खनिज निरीक्षकों की संयुक्त जांच से यह खुलासा हुआ है कि देवभोग के निकट सेंधमुड़ा से ही नहीं बल्कि पायलीखंड और बेहराडीह से भी फेंसिंग तोड़कर हीरे की तस्करी ध़़ड़ल्ले से जारी है.  संयुक्त टीम ने अवैध खुदाई की सूचना पर जब यहां छापा मारा तो उसने बड़े-बड़े गड्‌ढों में लोगों को हीरा तराशते हुए पाया. तस्कर इस टीम को देखकर भाग चुके थे. संयुक्त टीम की वापसी के बाद तस्करों ने स्थानीय बीटगार्ड और चौकीदार को बुरी तरह पीटा. चौकीदार की रिपोर्ट पर मैनपुर पुलिस ने आरोपियों के ख़िला़फ मामला भी दर्ज़ कर लिया है. बड़े पैमाने पर चल रही इस खुदाई का मुख्य मक़सद, बेशक़ीमती अलेक्जेन्ड्राइट पत्थर की तलाश को बताया जाता है, जिसका इस क्षेत्र में विशाल भंडार मौजूद है. मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 1991-92 में इसी पत्थर की सुरक्षा के लिए सात हज़ार वर्गफूट ज़मीन को कांक्रीट से ढका था. वर्तमान में इस सुरक्षा को भी तोड़ दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ और रूस में ही अलेक्जेन्ड्राइट पत्थर उपलब्ध हैं. बहुमूल्य होने के अलावा उपलब्धता कम होने के कारण भी इसकी क़ीमत करोड़ों में होती है. छत्तीसगढ़ के देवभोग और सेंधमुड़ा में इसी पत्थर की तलाश की जा रही है. देवभोग, मैनपुर, गरीयाबंद में दबे इस मूल्यवान पत्थर को बचाने के लिए राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है, हालांकि इस कार्रवाई की रूपरेखा का अभी तक कुछ पता नहीं है. लगभग 20 साल पहले 1989-90 में सेंधमुड़ा गांव के किसान को देवभोग से 7 किलोमीटर पहले हल चलाते समय एक रंगीन और चमकता हुआ पत्थर मिला था, जिसे उसके बच्चों ने खिलौना समझकर उठा लिया था. इसी क्षेत्र में कुछ ही दिनों में कई किसानों को इस तरह के पत्थर मिले. तब उड़ीसा के व्यापारी, किसानों से इन पत्थरों को 100 रू. में ही ख़रीद लिया करते थे. और तब से लेकर आज तक ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र में ज़मीन के नीचे अलेक्ज़ेन्ड्राइट पत्थर बड़ी तादाद में पड़े हुए हैं. हीरा खदान में अवैध खुदाई करने वाले लोगों के साथ पुलिस एवं वन अधिकारियों की कई बार मुठभेड़ हुई है. पड़ोसी राज्यों से आकर उत्खनन करने वाले लोगों को नियंत्रित करने में वर्तमान ज़िला प्रशासन पूरी तरह असक्षम है. नतीजतन, छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण खनिज संपदा अवैध रूप से बाहर ले जाई जा रही है.