मनरेगा रोजगार नहीं, धोखा है

मध्य प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन हक़ीक़त यही है कि राज्य में कहीं भी ग्रामीण श्रमिकों को औसतन 60 दिन का काम भी नहीं मिल रहा है. जबकि क़ानूनी तौर पर श्रमिकों को कम से कम 100 दिन का रोज़गार मिलना चाहिए. इसके अलावा मध्य प्रदेश में मज़दूरों को ज़्यादातर भुगतान नगद में ही किया जाता है, उन्हें बैंक खाते या पोस्ट ऑफिस के खाते के ज़रिए भुगतान करने की किसी को नहीं सूझती. रोज़गार गारंटी योजना की विभागीय समीक्षा के दौरान इसके क्रियान्वयन और प्रगति पर खुलकर विचार किया गया. मिली जानकारी के अनुसार समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के ग्रामीण इलाक़ों में ग़रीबी रेखा के नीचे रहने  वालों की संख्या बढ़ती जा रही है और गांवों में बेरोज़गारी भी बढ़ रही है. इस तरह रोज़गार गारंटी योजना के तहत काम की उम्मीद रखने वालों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है.

आमतौर पर राज्य के लगभग सभी ज़िलों से ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार, घपलों, घोटालों और घटिया स्तर के निर्माण कार्यो की शिक़ायत आती रहती है.

ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि राज्य में कुल एक करोड़ 12 लाख ग्रामीण श्रमिकों के ही जॉबकार्ड बनाए गए हैं, जिनमें से पिछले साल केवल 52 लाख श्रमिकों को ही काम दिया गया. कुल मिलाकर श्रमिकों को औसतन 57 दिन ही काम मिला. वर्ष 2008-09 में रोज़गार गारंटी योजना के लिए मध्य प्रदेश को केन्द्र से 4068 करोड़ रुपये  मिले थे और राज्य सरकार ने अपनी ओर से 528 करोड़ रुपये भी इस योजना में लगाए. पर इस पूरी राशि में से स़िर्फ 3552 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए. 50 प्रतिशत से ज़्यादा की राशि, निर्माण सामग्री ख़रीदने और दूसरे सरकारी ख़र्चों में ही लगा दी गई. पूरे साल कुल दो लाख 12 हज़ार काम पूरे हुए और तीन लाख से ज़्यादा काम अधूरे रह गए. सरकार को ज़िलों से जो हिसाब मिला है उसके अनुसार 2196 करोड़ रुपये मज़दूरी के रूप में बांटे गए, जिसमें से 835 करोड़ रुपये राष्ट्रीयकृत बैंकों या पोस्ट ऑफिस में श्रमिकों के अकांउट खाते खुलवाकर, उनके नाम जमा किए गए. इस समीक्षा बैठक में उपस्थित ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने असंतोष और गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में सुधार की ज़रूरत है और इस योजना पर पूरे समय निग़रानी रखे जाने की भी ज़रूरत है.

आमतौर पर राज्य के लगभग सभी ज़िलों से ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार, घपलों, घोटालों और घटिया स्तर के निर्माण कार्यो की शिक़ायत आती रहती है. इन शिक़ायतों पर नज़र रखने के लिए मंत्री जी ने सांसदों, विधायकों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों का सहयोग लेने की ज़रूरत पर भी बल दिया.

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