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ट्रक एंट्री का गोरखधंधा

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नीतीश सरकार एक ओर जहां राज्य की माली हालत एवं राजस्व की कमी का रोना रोते हुए विकास के लिए केंद्र से अतिरिक्त सहायता और बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अधिकारी-दलाल गठजोड़ के कारण राज्य को प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है.

ग़ौरतलब है कि पूर्णिया प्रमंडल से होकर कई राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिनमें से एनएच-31 पूर्णिया होते हुए किशनगंज, सिल्लीगुड़ी और उत्तर पूर्व के राज्य असम, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा एवं अरुणाचल प्रदेश होकर बांग्लादेश तथा म्यांमार की सीमा से होकर गुजरता है. राजमार्ग संख्या 57 पूर्णिया एवं अररिया होकर जोगबनी में नेपाल की सीमा को छूता है. वहीं दालकोला के निकट एनएच-31 से एक राजमार्ग कोलकता को जाता है. आज इन्हीं राजमार्गों से असम का कोयला, सीमेंट, चावल, गेहूं, दलहन, खाद्य तेल, सुपारी, चीनी, चायपत्ती, सिल्लीगुड़ी बेडमिसाली गिट्टी और तस्करी के लिए पशुओं आदि की ढुलाई ट्रकों द्वारा होती है.

किशनगंज, बंगाल के धनतोला, पांजीपाड़ा, दालकोला, डगरुआ, डंगराहा, गुलाब बाग, जीरो माइल एवं गेड़ाबाड़ी आदि जगहों पर एंट्री के दलालों ने दिखावे के लिए लाइन होटल खोल रखे हैं. यहीं से इस धंधे को वे संचालित करते और परिवहन विभाग के अधिकारियों पर नज़र रखते हैं. जानकारी के अनुसार, दलाल गाड़ी का नंबर एसएमएस द्वारा भ्रष्ट मोबाइल दारोगा, आरटीओ-एमवीआई एवं डीटीओ के निजी सहायक के मोबाइल पर भेजते हैं, जहां से ट्रक पास करने का क्लीयरेंस मिलता है.

उक्त ओवरलोड ट्रक मोटर वाहन अधिनियम का पालन किए बिना सड़कों पर दौड़ते हैं. सूत्रों से मिली जानकारी एवं स्थानीय ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, ट्रक एंट्री का धंधा वर्षों पुराना है, जिसे दलालों द्वारा परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित किया जाता है. बताया जाता है कि छह चक्का वाले ओवरलोड ट्रक से 600-800 रुपये, दस चक्का वाले ट्रक से 1000-1500 रुपये, 16 चक्का वाले ट्रक से 2000 एवं 18 चक्का वाले ट्रक से 2500 रुपये दलालों द्वारा वसूले जाते हैं. एंट्री दलाल एक निश्चित समय सीमा के अंदर ट्रकों को सड़कों पर छोड़ते हैं. वैसे अधिकांश ट्रक रात में ही सड़कों पर निकलते हैं.

किशनगंज, बंगाल के धनतोला, पांजीपाड़ा, दालकोला, डगरुआ, डंगराहा, गुलाब बाग, जीरो माइल एवं गेड़ाबाड़ी आदि जगहों पर एंट्री के दलालों ने दिखावे के लिए लाइन होटल खोल रखे हैं. यहीं से इस धंधे को वे संचालित करते और परिवहन विभाग के अधिकारियों पर नज़र रखते हैं. जानकारी के अनुसार, दलाल गाड़ी का नंबर एसएमएस द्वारा भ्रष्ट मोबाइल दारोगा, आरटीओ-एमवीआई एवं डीटीओ के निजी सहायक के मोबाइल पर भेजते हैं, जहां से ट्रक पास करने का क्लीयरेंस मिलता है. आश्चर्य की बात यह है कि इन अधिकारियों के पास विभागीय कर्मचारी बहुत कम रहते हैं. अधिकतर निजी लोगों को सुविधा के अनुसार रखा जाता है, जिनकी दलालों पर पकड़ होती है और वे उनके क्रियाकलाप से परिचित होते हैं.

ट्रक एंट्री के धंधे में कई सिंडिकेट काम कर रहे हैं. किसी के पास सिल्लीगुड़ी से आने वाले पत्थर बेडमिसाली एवं पाकुड़ स्टोन का काम है तो किसी के पास असम के कोयले का. ट्रक एंट्री माफियाओं के कई सरगनाओं ने पश्चिम बंगाल के दालकोला में दिखावे के लिए लाइन होटल खोल रखे हैं, लेकिन उनका वास्तविक काम ट्रक को एंट्री दिलाना है. एक सरगना डगरुआ में भी है, जो इस धंधे में पैठ बनाए हुए है. ऐसे लोग कभी-कभी परिवहन विभाग के अधिकारियों पर धौंस जमाने से भी बाज नहीं आते और उन्हें षड्‌यंत्र रचकर फंसाने का प्रयास करते हैं. इन्हीं लोगों के षड्‌यंत्र का शिकार अभी हाल में मोबाइल दारोगा महेंद्र प्रताप सिंह हुए, जिन पर एक मामला डगरुआ थाने में दर्ज़ किया गया. कई लोग राज्य परिवहन विभाग को करोड़ों का चूना लगा कर अपार संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं. कुछ ने तो अपनी राजनीतिक पैठ बना ली है और विधायक-सांसद बनने का सपना पालने लगे हैं. इनमें से कई पर डगरुआ एवं बायसी समेत कई थानों में विभिन्न मामले दर्ज़ हैं, लेकिन उनका धंधा जारी है. ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन की आड़ में भी बेडमिसाली स्टोन की एंट्री कराई जाती है. एक ट्रांसपोर्टर ने बताया कि आरटीओ की न्यूनतम कमाई प्रति माह दो से तीन लाख रुपये है. वहीं मोबाइल वालों की कमाई प्रति माह लाखों में है.

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