विंध्‍य हर्बल सफल सहकारी संस्‍था

सरकारी प्रयासों से जनकल्याण के काम बिना रुकावट पूरे होते रहें, यह लगभग असंभव बात मानी जाती है. पर जब आप मध्य प्रदेश लघु वनोपज संघ के द्वारा बनाई गई विंध्य हर्बल संस्था के कामकाज को देखेंगे तो मानेंगे कि जनकल्याण के लिए सरकारी प्रयासों की कमी नहीं है. विंध्य हर्बल संस्था प्रदेश स्तर पर ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेदिक औषधियों से संबंधित संग्रहण, उत्पादन, शोधन, दवा निर्माण एवं उसकी बिक्री का काम करती है. इन सभी कामों में इस संस्था को सफलता हाथ लगी है. मध्य प्रदेश लघु वनोपज सहकारी संघ ने इस संस्था की शुरूआत मध्य प्रदेश में लघु वनोपज के संरक्षण संग्रहण एवं उनकी बिक्री के कामों को संतुलित बनाए रखने के लिए किया था. इसके अलावा राज्य में चल रहे अरबों रुपये के तेन्दूपत्ता व्यापार को व्यवस्थित रखने के लिए भी इस सहकारी संघ का निर्माण किया गया था. लघु वनोपज संघ ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाते हुए इसका ध्यान आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी बूटियों की ओर बढ़ाना शुरू किया. राज्य की वन संपदा में जड़ी बूटियों का विशेष महत्व है. मध्य प्रदेश के दूर दराज़ इलाकों में कई तरह की दुर्लभ जड़ी बूटियां पाई जाती हैं. मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ ने विंध्य हर्बल को अपने पंजीकृत ब्रांड के रूप में विकसित किया, जिसके बाद विंध्य हर्बल संस्था ने ग्रामीण एवं ज़िला स्तर पर गठित वन समितियों के माध्यम से आसपास रहने वाले आदिवासियों को जड़ी बूटियों के संग्रहण एवं व्यापार के लिए प्रेरित किया. इस नेक प्रयास से आज आदिवासी लोगों का जीवन यापन आसान हो चला है.

संघ द्वारा निर्मित की जाने वाली दवाइयों की बिक्री राष्ट्रीय स्तर पर की जाती है. विंध्य हर्बल राष्ट्रीय स्तर पर शुद्धता की पहचान बन चुका है. संस्था के प्रमुख, अखिल भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री अभय पाटिल का कहना है कि स्वच्छता और शुद्धता के मामले में यह संस्था किसी भी तरह का समझौता नहीं करती है. विंध्य हर्बल राष्ट्रीय स्तर पर अपने व्यवसायिक दायरे को क्रमश: बढ़ाती जा रही है.

भारतीय राष्ट्रीय वननीति 1998 में भी जंगलों पर निर्भर आदिवासी एवं ग्रामीणजनों को ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जड़ी बूटियों के उचित प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया गया है. मध्य प्रदेश औषधीय और सुगंधीय पौधों की खेती में एक अग्रणी राज्य है. पिछले कुछ सालों से यहां इन पौधों की पैदावार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इन औषधीय पौधों से जुड़े किसानों एवं संग्रहकों को तकनीकी जानकारियां पहुंचाने के उद्देश्य से राजधानी भोपाल में वर्ष 2002-03 में मध्य प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड की वित्तीय सहायता से लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केन्द्र (एमएफपी-पार्क) स्थापित किया गया. इस केंद्र में किसानों और संग्रहकों को तकनीकी जानकारियां उपलब्ध कराई जाती हैं. यह केंद्र औद्योगिक पौधों की मानक प्रयोगशाला भी है और इस केन्द्र में विंध्य हर्बल ब्रांड के औषधीय एवं खाद्य उत्पाद भी निर्मित किए जाते हैं. यहां प्रशिक्षण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला, शहद प्रसंस्करण प्रभाग, हर्बल प्रसंस्करण प्रभाग, मानव संसाधन विकास प्रभाग एवं नर्सरी हैं. प्रयोगशाला के तीन उप-प्रभाग हैं जहां पादप रासायनिक विश्लेषण, माक्रोबॉयोलोजी, वनस्पति विज्ञान से संबंधित कार्य किए जाते हैं. इस पार्क में सभी उत्पादों की प्रकृति ऑर्गेनिक है. उन्नत प्रयोगशाला में उत्पादों का गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है. ग्राम स्तर की प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से कच्ची जड़ी बूटियों का संग्रहण कराया जाता है. जड़ी बूटियों के संग्रहक किसानों को जागरूक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. यह संस्था प्राथमिक संग्रहकों को अपने लाभ में हिस्सेदार बनाती है. विंध्य हर्बल द्वारा वर्तमान में 233 आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण या शोधन किया जाता है, इसमें सभी तरह की दवाईयां शामिल हैं.

संघ द्वारा निर्मित की जाने वाली दवाइयों की बिक्री राष्ट्रीय स्तर पर की जाती है. विंध्य हर्बल राष्ट्रीय स्तर पर शुद्धता की पहचान बन चुका है. संस्था के प्रमुख, अखिल भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री अभय पाटिल का कहना है कि स्वच्छता और शुद्धता के मामले में यह संस्था किसी भी तरह का समझौता नहीं करती है. विंध्य हर्बल राष्ट्रीय स्तर पर अपने व्यवसायिक दायरे को क्रमश: बढ़ाती जा रही है. यहां तक कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में आज विंध्य हर्बल की दवाईयों को सर्वश्रेष्ठ मानकर उनका उपयोग किया जाता है. इस संस्थान से जुड़े श्री निगम के अनुसार संस्था को यहां तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के वनवासी एवं ग्रामीणों के अलावा स्थानीय स्तर पर कार्यरत आयुर्वेदिक औषधियों के जानकारों ने इसमें अहम भूमिका निभायी है. हमारा नाम ही शुद्धता की गारंटी है, इस भावना के साथ इस संस्था में पेटेन्ट आयुर्वेदिक दवाईयों का निर्माण किया जाता है. श्री अभय पाटिल ने यह भी जानकारी दी कि इस संस्था को आईएसओ 9001-2000 का प्रमाण पत्र भी प्राप्त है. संस्था में शोध संबंधी कार्यों को विशेष रूप से संग्रहित करके विभिन्न कार्यशालाओं में उनके उपयोग पर चर्चा भी आयोजित की जाती है. इस संस्थान द्वारा निर्मित शहद, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है. इस संस्था के पास प्रायोगिक तौर पर परीक्षण के लिए और दवा निर्माण में उपयोगी जड़ी बूटियों के उत्पादन के लिए खुद की नर्सरी भी है. लघु वनोपज संघ के वनांचलों में गठित 1066 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां और 60 ज़िला सहकारी वनोपज यूनियनों की एक शीर्ष संस्था होने के कारण इस संस्था को कच्चे माल की आपूर्ति में किसी तरह की परेशानी नहीं आती.

राज्य प्रशासन द्वारा निर्मित इस संस्था ने यह साबित कर दिया है अगर प्रशासनिक कामों को ईमानदारी और सच्चाई से अंजाम देने की कोशिश की जाए तो विंध्य हर्बल जैसी संस्थाओं की संरचना करना असंभव नहीं है. यह संस्था वर्तमान में लाभ में चल रही है. इसका पूरा श्रेय संस्था में काम करने वाले समर्पित सहयोगियों और अधिकारियों को ही जाता है.