विवादों का बादशाह ललित मोदी

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हो सकता है कि ललित मोदी को क्रिकेट से बहुत प्यार हो. लेकिन सच यह है कि मोदी को क्रिकेट से कहीं ज़्यादा प्यार विवादों से है. विवादों को जन्म देना और विवादों में बने रहना, मानो उनका बचपन से शौक़ रहा हो. विश्वास नहीं होता तो इतिहास के पन्ने पलटिए और उनके छात्र जीवन पर नज़र डालिए. अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मोदी पर नशीली दवाओं के इस्तेमाल और अपहरण की कोशिश का आरोप लगा था. उन्हें इसके लिए सजा हुई थी और जुर्माना भी भरना पड़ा था. जवानी के जोश में युवा अक्सर ऐसी ग़लतियां कर बैठते हैं, लेकिन अब आईपीएल कमिश्नर की हैसियत से मोदी जो कुछ कर रहे हैं, वह महज़ जोश में की गई बयानबाज़ी भर नहीं है, बल्कि कुछ और है. इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है कोच्चि टीम को लेकर ललित मोदी और केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर के बीच जारी ताज़ा विवाद, जो अब अदालत तक पहुंच चुका है. कोच्चि टीम की फ्रेंजाइजी को लेकर मोदी द्वारा टि्‌वटर पर की गई टिप्पणी से शुरू हुआ यह मामला अब इन दोनों हस्तियों के बीच खुली लड़ाई में तब्दील हो चुका है.

इतिहास के पन्ने पलटिए और ललित मोदी के छात्र जीवन पर नज़र डालिए. अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मोदी पर नशीली दवाओं के इस्तेमाल और अपहरण की कोशिश का आरोप लगा था

दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई, जब ललित मोदी ने कोच्चि टीम प्रबंधन से फ्रेंजाइज़ियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की. साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि थरूर उन्हें इससे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि आईपीएल के नियम-क़ायदों के मुताबिक़ शेयरधारकों का नाम सार्वजनिक करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन मोदी आईपीएल के सर्वशक्तिमान अधिकारी हैं और अपनी मर्ज़ी से काम करना उनकी आदतों में शुमार है. जब टीम प्रबंधन ने उनकी बात मानने से इंकार किया तो उन्होंने ख़ुद ही टि्‌वटर पर इसका खुलासा कर दिया. शेयरधारकों में एक नाम सुनंदा पुष्कर का भी है, जो थरूर की महिला मित्र मानी जा रही हैं और चर्चाओं पर भरोसा करें तो थरूर जल्द ही उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखने वाले हैं. ज़ाहिर है, मोदी की यह टिप्पणी थरूर को नागवार गुजरी और उन्होंने आईपीएल कमिश्नर के ख़िला़फ मोर्चा खोल दिया. विवादों से चोली-दामन का रिश्ता रखने वाले मोदी भी भला कहां चुप बैठने वाले थे. उन्होंने कोच्चि टीम और सुनंदा के साथ थरूर के रिश्तों पर सवाल उठाए.

मोदी के खुलासे से भड़के थरूर और उनके सहयोगियों ने पलट वार करते हुए राजस्थान रॉयल्स टीम के साथ मोदी के संबंधों पर स्पष्टीकरण मांगा. यहां तक कह डाला कि आईपीएल कमिश्नर कोच्चि टीम की बोली रद्द कराना चाहते थे और इसके बदले अहमदाबाद की टीम बनाने के लिए जोर लगा रहे थे. फ्रेंचाइज़ियों के प्रवक्ता ने कहा कि मोदी अभी भी टीम का मालिकाना हक़ बेचने के लिए कंपनी पर दबाव डाल रहे हैं और तरह-तरह की धमकियां दे रहे हैं. सवाल यह है कि मोदी कोच्चि टीम के ख़िला़फ क्यों हैं? लेकिन बात इतने पर ही नहीं रुकी. मामला आगे बढ़ा तो एक और महिला का नाम सामने आया. गैब्रिएला दिमित्रिएदेस नामक यह महिला दक्षिण अफ्रीकी मॉडल हैं और आईपीएल के दूसरे सीज़न के दौरान मिस आईपीएल बॉलीवुड की दावेदार रह चुकी हैं. थरूर का आरोप है कि मोदी ने गैब्रिएला का वीजा रोकने के लिए उनसे आग्रह किया था. थरूर ने उनकी बात अनसुनी कर दी तो मोदी ने उनके ख़िला़फ मोर्चा खोल दिया.

सच्चाई यह है कि ललित मोदी अपने सामने किसी की नहीं सुनते और विवाद तो मानो उनके व्यक्तित्व का एक हिस्सा है. छात्र जीवन के बाद उन्होंने क्रिकेट प्रशासन के क्षेत्र में क़दम रखे तो इसके लिए अपना नाम तक बदल लिया. राजस्थान क्रिकेट संघ का अध्यक्ष बनने के लिए उन्होंने राज्य सरकार की मदद से एसोसिएशन के संविधान को ही बदल डाला. उनके तानाशाही रवैये के ख़िला़फ असंतोष बढ़ा और अध्यक्ष के अलावा आईपीएल में उनकी हैसियत पर ख़तरा मंडराने लगा तो वह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के भी उपाध्यक्ष बन गए. आईपीएल की शुरुआत के बाद तो हर रोज़ विवादों के एक नए अध्याय की शुरुआत होने लगी. थरूर के साथ ताज़ा विवाद भी मोदी से जुड़े विवादों के अंतहीन सिलसिले का एक नया हिस्सा है. थरूर ने कोच्चि टीम के फ्रेंचाइज़ियों को एक साथ लाने के लिए परामर्शदाता की भूमिका निभाई तो अहमदाबाद की टीम बनवाने का उनका सपना धराशायी हो गया. वह थरूर के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हो गए और उनके व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक करने पर उतारू हो गए.

शशि थरूर और ललित मोदी के बीच का यह विवाद नैतिकता और नियम-कानून की सभी सीमाएं पार कर चुका है. अपने तानाशाही रवैये के चलते बार-बार विवादों में आने वाले ललित मोदी की राजनीतिज्ञों से निकटता जगज़ाहिर है, लेकिन इस बार उनका मुक़ाबला एक ऐसी शख्सियत से है, जो राजनीति के साथ-साथ कूटनीति का भी माहिर खिलाड़ी है. ऐसे में ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाज़ा लगाना काफी मुश्किल है.

आईपीएल टीम मालिकों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं

इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की शुरुआत को क्रिकेट के खेल के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है. बालीवुड की चाशनी में ग्लैमर के तड़के के साथ इसने गेंद और बल्ले के खेल को नया आयाम दिया, लेकिन इसके साथ ही विवादों का एक नया पिटारा भी खोल दिया. आईपीएल में हर साल अरबों रुपये का वारा-न्यारा होता है, लेकिन यह पैसा कहां से आता है और कहां जाता है, इसकी कोई तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध नहीं है. सबसे पहला सवाल तो यही है कि आखिर टीमों की खरीद-बिक्री में किसके पैसे लगे हैं और किसने कितने पैसे लगाए हैं. थरूर से भड़के मोदी आज भले कोच्चि टीम के शेयरधारकों के नामों को लेकर हल्ला मचा रहे हों, लेकिन उन्होंने यह रवैया दूसरी टीमों के लिए क्यों नहीं अपनाया. सूत्रों पर भरोसा करें तो आईपीएल में कई नामी-गिरामी शख्सियतों की काली कमाई लगी हुई है, जिसमें अंडरवर्ल्ड के कुछ लोग भी शामिल हैं, जो खेल से ज्यादा सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग से करोड़ों की कमाई करते हैं, लेकिन उनके नाम सामने नहीं आते. सामने आते हैं केवल प्रीति जिंटा और शाहरुख खान जैसे नाम, क्योंकि एक तो ये बिकाऊ चेहरे हैं और दूसरा यह कि छुपी बातें सामने आ गईं तो इससे लीग की प्रतिष्ठा और खुद मोदी के व्यक्तित्व पर आंच आने का खतरा पैदा हो सकता है.

सवाल केवल आईपीएल का ही नहीं है, सवाल देश में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई का भी है. दुनिया की सबसे अमीर खेल संस्थाओं में शामिल बीसीसीआई की कमाई पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन कमाई के सारे आंकड़े गोपनीयता के तहखाने में छिपे हैं. जानकारी हासिल करने के लिए कई लोगों ने सूचना अधिकार कानून के तहत दर्जनों अर्जियां दीं, लेकिन बोर्ड यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है कि बीसीसीआई की गतिविधियां इस कानून के दायरे में ही नहीं आतीं. लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? बीसीसीआई देश भर में मैचों का आयोजन करती है, जिसके लिए उसे केंद्र और राज्य सरकारों से मदद मिलती है. सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए वह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर है तो फिर उसके आर्थिक क्रियाकलापों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?

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