हिंदुस्तान के अब तक के सबसे बड़े घोटाले का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ है. अभी तो अंडरवर्ल्ड के किस्से का खुलासा होना बाक़ी है. ललित मोदी बीसीसीआई के पापों का घड़ा फोड़ने की धमकी दे रहे हैं क्योंकि आज हर कोई उनके ख़िला़फ है. आपने मारियो पूजो की किताब पर बनी फिल्म गॉडफादर देखी हो तो यह समझ लीजिए आज हालात उससे ज़्यादा अलग नहीं हैं. यदि किसी क्षण किसी बड़ी हस्ती पर गोलियां चलने लगे या फिर कत्ल हो जाए तो मत चौंकिएगा. सुना है कि प्यार और लड़ाई में सब कुछ जायज़ है लेकिन यहां तो सारा खेल ही नाजायज़ पैसों का है. वो भी करोड़ों का. अभी कई और चेहरे सामने आएंगे, जिनमें फिल्म स्टार्स से लेकर क्रिकेट खिलाड़ी, राजनेता और नौकरशाह तक शामिल हो सकते हैं. यह जंगल की आग की तरह है. इस खेल में कहां, कौन, कैसे और कब जलेगा, यह किसी को पता नहीं है.
चार सप्ताह पहले ही चौथी दुनिया ने एक सनसनीखेज ख़बर छापी थी, जिससे क्रिकेट की दुनिया में भूचाल आ गया. हमने पहली बार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, आईपीएल, ललित मोदी और अंडरवर्ल्ड के गोरखधंधे का पर्दा़फाश किया तो बाक़ी दुनिया बस मूक दर्शक बनी हुई थी. फिर अचानक जैसे एक धमाका हुआ और कोई कुछ समझ पाए, इससे पहले ही सारे गड़े मुर्दे उखड़ने शुरू हो गए. ललित मोदी द्वारा टि्वटर पर की गई एक टिप्पणी ने क्रिकेट के नाम पर चल रहे काले कारनामों पर से परदा हटाया. आज यह खेल गेंद और बल्ले के बीच के संघर्ष से कहीं दूर पैसा कमाने का धंधा, ब्लैक मनी को व्हाइट करने की मशीन में बदल चुका है. क्रिकेट का खेल महज़ एक छलावा बन कर रह गया है और क्रिकेट का जुनून पालने वाली देश की जनता बेवकूफ बन रही है. अंडरवर्ल्ड और क्रिकेट अधिकारियों की कृपा से यह अब ऐसा तमाशा बन चुका है, जिसमें खिलाड़ी से ज़्यादा बड़ी भूमिका सट्टेबाज़ों और सुंदर-कमसिन बालाओं की होती है. कोच्चि विवाद से चर्चा में आई सुनंदा पुष्कर ने अब सा़फ-सा़फ कहना शुरू कर दिया है कि आईपीएल में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के पैसे लगे हुए हैं. जो बात क्रिकेट से जुड़े हर नेता, अधिकारी और खिलाड़ी को पता है, वो सुनंदा अब कह रही हैं. उनका दावा है कि ललित मोदी दाउद इब्राहिम के एजेंट की तरह काम करता है. अब सुनंदा पुष्कर से यह बात पूछनी चाहिए कि अगर उन्हें अंडरवर्ल्ड और आईपीएल के रिश्ते के बारे में पता था, तो फिर भी वो आईपीएल से क्यों जुड़ना चाहती थी.
चौथी दुनिया ने जब यह बताया कि आईपीएल के तीसरे सीज़न का फाइनल मुक़ाबला दो छुपे रूस्तमों के बीच होगा और मुंबई इंडियंस टीम इस बार फाइनल तक जाएगी तो किसी को एकबारगी भरोसा नहीं हुआ. इसकी वजहें भी थीं. उस समय टूर्नामेंट अपने शुरुआती दौर में था और मुंबई की टीम लीग के पहले दो सीज़न में सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच सकी थी. लेकिन हमारी रिपोर्ट किसी पंडित की भविष्यवाणी नहीं थी. कई सटोरियों से बातचीत पर आधारित थी. उस समय न तो शशि थरूर का विवाद था, न ही मोदी के ख़िला़फ किसी कार्रवाई की सुगबुगाहट. फिर भी हमने चार सप्ताह पहले ही अपनी रिपोर्ट में राजनीतिज्ञों (ख़ासकर दो केंद्रीय मंत्रियों) की संलिप्तता की चर्चा भी की थी. साथ ही, यह भी बताया था कि ललित मोदी ने किस तरह आईपीएल के माध्यम से सट्टेबाज़ी के धंधे को कॉरपोरेट शक्ल दे दी है.
असलियत यह है कि आईपीएल के हर मैच में दो-दो जगहों पर मुक़ाबला होता है. एक मैदान के अंदर और एक मैदान के बाहर. मैदान के अंदर खिलाड़ियों के बीच बैट, बॉल और रनों का संघर्ष चलता है, लेकिन मैदान के बाहर सट्टेबाज़ों का अलग खेल होता है. यहां पैसे की जंग होती है. मैदान के अंदर का खेल टीवी पर दिखाई देता है, लेकिन जो असल खेल है वह दुनिया की निगाहों से बचा कर खेला जाता है. इस खेल को खेलने वालों का मक़सद आईपीएल के तमाशे से पैसा कमाने का होता है, जिसमें देश के कई नामचीन लोग शामिल हैं.
यह सारा खेल केवल पैसे का है. आज चारों ओर यह चर्चा है कि किंग्स इलेवन पंजाब की टीम सट्टेबाज़ी के गोरखधंधे में शामिल है. ख़बरें तो यह भी बताती हैं कि आयकर विभाग के अधिकारियों को इसके पूरे सबूत मिल चुके हैं. जो काम लीग के दूसरे सीज़न में कोलकाता नाइट राइडर्स ने किया था, तीसरे सीज़न में वही काम किंग्स इलेवन पंजाब की टीम ने किया. अब ज़रा इस साल के आईपीएल के आख़िरी लीग मैच को याद कीजिए. आईपीएल में सब टीमों पर भारी पड़ने वाली मुंबई टीम सबसे फिसड्डी टीम शाहरुख ख़ान की कोलकाता नाइट राइडर्स से हार गई. हालांकि, इस मुक़ाबले से पहले ही मुंबई की टीम का सेमीफाइनल में पहुंचना तय हो चुका था, फिर भी मुंबई की जीत निश्चित मानी जा रही थी. सट्टा बाज़ार में मुंबई की जीत पर हर एक रुपये पर 20 पैसे का भाव लगा था, जबकि कोलकाता की जीत की हालत में हर एक रुपये पर पांच रुपये का दांव लगा था. फिर भी, कोलकाता की टीम यह मैच जीत गई. इससे कोलकाता टीम के मालिक शाहरुख ख़ान को जमकर फायदा हुआ, लेकिन असली मलाई तो भारतीय टीम के एक पूर्व सलामी बल्लेबाज़ ने काटी. टीम के मालिकों से लेकर राजनेता और आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी तक रेवड़ियां समेट कर और पैसे को विदेशों में पहुंचाकर सुकून से हैं.
आईपीएल घोटाले में मंत्री भी शामिल हैं
न जाने इस देश को क्या हो गया है. जहां कहीं भी कोई बुराई नज़र आती है उसमें खादी पहनने वाले नेताओं का नाम आना अनिवार्य हो गया है. सट्टेबाज़ी के धंधे में शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल का नाम का़फी जाना-पहचाना है. इसके अलावा सत्यजीत गायकवाड़ और कांग्रेस आलाकमान के क़रीबी होने का दावा करने वाले बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें भरपूर दख़ल रखते हैं. जैसे जैसे आईपीएल घोटाले की तहक़ीक़ात बढ़ती जाएगी. कई और स़फेदपोश नेताओं पर छीटें प़डेंगे. नेताओं की चालाकी यह है कि ये खुलकर सट्टेबाज़ी नहीं करते, बल्कि यह ज़िम्मा कुछ ख़ास लोगों को दे देते हैं, जो इनके लिए एजेंट की तरह काम करते हैं. इन लोगों में रॉकी, पटेल, राजपूत और लावन्या के नाम लिए जा सकते हैं. डगलस मॉरिशस में बैठकर ललित मोदी के धंधे का संचालन करता है तो एंड्रयू लंदन में. पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी ललित मोदी के प्रियपात्र हैं तो विजय माल्या और प्रफुल्ल पटेल की दोस्ती जगज़ाहिर है. एक हाई प्रोफाइल एयरलाइन कंपनी को विशेष रियायतें दी जाती हैं क्योंकि दोनों रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर की टीम के साथ जुड़े हैं.
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