विंध्य क्षेत्र में बच्चों की उपेक्षा

कुपोषण के कारण ग़रीबी में जी रहे हज़ारों बच्चों की मौत की दर में सतना ज़िला अव्वल है. राज्य सरकार द्वारा बच्चों की सुरक्षा और सेहत के मामले में जारी किए गये कोई भी निर्देश सतना में प्रभावशील नहीं है. पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने राज्य में बच्चों की सुरक्षा पर हर साल औसतन दो रुपये और स्वास्थ्य पर पंद्रह रुपये खर्च किए हैं. एक ग़ैर सहकारी संगठन द्वारा जारी किये गए सर्वेक्षण रिपोर्ट से उपरोक्त तथ्यों का खुलासा हुआ है. वर्ष 2005 से लेकर 2009 तक क्रमश: 1603, 2060, 1688 और 1856 बच्चों की मौत सतना जिले में हुई है. वहीं रीवा और सीधी जिलों में क्रमश: इसी अवधि में 1051 और 573, 1324 एवं 1070, 972 एवं 1450, 702 एवं 1122 बच्चों की मौत हुई है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक बच्चे के स्वास्थ्य पर वर्ष 2004 से लेकर 2009 तक पंद्रह रुपया खर्च किया गया वहीं उड़ीसा राज्य द्वारा सत्रह रुपये और उत्तर प्रदेश द्वारा 60 रुपये व्यय किया गया. बाल सुरक्षा के मामले में प्रत्येक बालक पर सालाना खर्च मध्य प्रदेश में 01.94 रुपये और आंध्र प्रदेश द्वारा 27.54 रुपया किया गया. बलात्कार सहित बच्चों पर होने वाले अपराधों की संख्या भी प्रदेश में सबसे ज़्यादा है. राज्य सरकार द्वारा बाल शिक्षा पर 2004 से 2009 के मध्य प्रतिवर्ष प्रति बालक 1395 रुपये और इसी अवधि में हिमाचल प्रदेश द्वारा 4894 रुपये व्यय किए गए.

ग़ैर सहकारी संगठन संकेत डेवलपमेंट ग्रुप द्वारा जारी रिपोर्ट में वर्ष 2001 से वर्ष 2009 तक राज्य सरकार द्वारा बच्चों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर बजट प्रावधानों का अध्ययन किया गया. इस अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की शिक्षा शिशु विकास पर तुलनात्मक रूप से अधिक राशि खर्च की गई है जबकि बाल स्वास्थ्य और सुरक्षा को नज़रअंदाज़ किया गया है.

शिक्षा विकास सूचकांक में मध्य प्रदेश सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 25 वें नंबर पर गिना जाता है. आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में 0 से 30 प्रतिशत 60 प्रतिशत बच्चे कम वजन वाले है. 6 वर्ष तक शिशुओं के विकास पर राज्य सरकार द्वारा 2004 से 2009 तक 404 रुपये प्रति वर्ष खर्च किया जाते हैं. जबकि आन्ध्रा में 1339 रुपये व्यय किये जाते हैं. न्यू डव्लू.एच.ओ. ग्रोथ स्टेन्डेंट सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सतना ज़िले में 287328 बच्चों के सर्वेक्षण के बाद 2213 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए.

आंकड़ों के आधार पर मध्य प्रदेश का भिंड क्षेत्र राज्य शासन के एजेंडे में बच्चों के लिए संवेदनशील क्षेत्र नहीं माना जा सकता है. मध्य प्रदेश वर्ष 2004-05 से 2008-09 के मध्य बाल सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रति बालक बजट व्यय के मामले में उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आसाम जैसे राज्यों से ही पीछे रहा है. ग़ैर सहकारी संगठन संकेत डेवलपमेंट ग्रुप द्वारा जारी रिपोर्ट में वर्ष 2001 से वर्ष 2009 तक राज्य सरकार द्वारा बच्चों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर बजट प्रावधानों का अध्ययन किया गया. इस अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की शिक्षा शिशु विकास पर तुलनात्मक रूप से अधिक राशि खर्च की गई है जबकि बाल स्वास्थ्य और सुरक्षा को नज़रअंदाज़ किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार यही वजह है कि आठ सालों में बाल योजनाओं के कुल बजट में हर साल 620 करोड़ की औसत वृद्धि के बाद भी बाल सुरक्षा व स्वास्थ्य में प्रदेश की स्थिति खराब हुई है. भोजन के अधिकार अभियान ने जिले के मजगवां कुचहेरा ब्लॉक में 6 महीनें में 122 बच्चों की मौत की पुष्टि की थी.

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