समाजवादियों के गढ़ में होगी कांटे की टक्कर

सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र इन दिनों चुनावी बुखार में तपने लगा है. पुराने चेहरों के साथ कई नए चेहरों की फौज जनता की अदालत में गुहार लगाते घूम रही है. सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही समाजवादियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है, जहां से समाजवादी नेता स्व. रामविलास मिश्र, रामाश्रय साहनी एवं रामचंद्र सिंह निशाद चुनाव जीतते रहे हैं. इस बार इस सीट के लिए दिग्गजों के बीच कांटे की लड़ाई के आसार बताए जा रहे हैं.

आगामी विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के तहत होना है, जिसमें सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र की रूप-रेखा तो बदल ही गई है. इस क्षेत्र में डा. मोहन भागवत के कार्यक्रम संपन्न होने से भाजपा कार्यकर्ताओं में इस सीट को लेकर उत्साह बना हुआ है, क्योंकि यही एक सीट है जहां भाजपा को लगता है कि वह आगामी चुनाव में कमल खिलाने में स़फल रहेंगे. इस बात का अंदाज़ा बिहार भाजपा के शीर्ष नेता एवं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी है. भाजपा के खाते में यदि सरायरंजन सीट गई तो भाजपा के पूर्व प्रत्याशी चंद्रकांत चौधरी और भाजपा के मुख्य कार्यसमिति सदस्य शशिकांत आनंद प्रबल दावेदारों की सूची में रहेंगे.

नए सिरे से गठित सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में विद्यापति नगर प्रखंड के 14 पंचायत एवं सरायरंजन प्रखंड के 23 पंचायत को शामिल किया गया है. पिछले संसदीय चुनाव में नवगठित उजियारपुर क्षेत्र से राजद के पूर्व सांसद आलोक कुमार मेहता के मात खाने के बाद, इस बार नए परिसीमन में क्षेत्र के बदले मिजाज़ से राजद के मौजूदा विधायक रामचंद्र सिंह निशाद असमंजस की स्थिति में दिख रहे हैं. इनका गृह प्रखंड मोरबा इस बार नवगठित विधानसभा क्षेत्र बन गया है, वह आगामी विधानसभा चुनाव कहां से लड़ेंगे, इसका फैसला राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद पर छोड़ दिया है. वर्ष 2005 फरवरी में हुए चुनाव में  समस्तीपुर के पूर्व सांसद अजीत कुमार मेहता सरायरंजन से विधानसभा चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे, जबकि लोजपा प्रत्याशी  सज्जन मिश्र दूसरे स्थान पर रहे और राजद प्रत्याशी रामचंद्र निशाद से तक़रीबन दस हज़ार वोट से हारे. पुन: 2005 नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में राजद के रामचंद्र निशाद अपनी सीट बरकरार रखते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी को 9270 वोट से पछाड़ा था. इस चुनाव में रामचंद्र निशाद को 36995 मत मिले थे, जबकि इनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जदयू उम्मीदवार विजय कुमार चौधरी को 27725, लोजपा के बिनोद चौधरी को 21394, निर्दलीय सुरेश राय को 8519, शिवसेना के सुभाष प्रसाद सिंह को 6883 एवं भाकपा माले के फूलबाबू सिंह को 5960 मत प्राप्त हुए थे. इस बार सरायरंजन विधानसभा की सीट पर राजग गठबंधन के घटक दल भाजपा एवं जदयू में का़फी खींचतान होने के आसार दिख रहे हैं. क्योंकि ज़िले की विधानसभा के आगामी चुनाव में राजग गठबंधन के घटक दल भाजपा को खोने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है. भाजपा अपने स्थापना काल से आज तक ज़िले में जीत का खाता तक नहीं खोल पाई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी ज़िले के वारिसनगर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. संजय पासवान लोजपा प्रत्याशी विश्वनाथ पासवान से मात खा चुके हैं, वहीं विधान परिषद् चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुरेश राय राजद प्रत्याशी एवं पूर्व ज़िला परिषद् उपाध्यक्ष रोमा भारती से पराजित हो चुके हैं. इस बार सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में राजद-लोजपा की भी गहमा-गहमी है और लोजपा के पूर्व प्रत्याशी सह ज़िलाध्यक्ष बिनोद चौधरी का अध्यक्ष पद छिन जाने के बाद ज़िला लोजपा के कार्यकारी अध्यक्ष विजय किशोर सिंह गठबंधन राजनीति के तहत प्रत्याशी बनने का मंसूबा पाल रखे हैं. विजय किशोर सिंह विगत 1995 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के समता पार्टी का मशाल लेकर इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे थे. इस चुनाव में कांग्रेस के नंदू झा और राजद से रामाश्रय साहनी चुनाव मैदान में थे. चुनाव में राजद ने कांग्रेस को पछाड़ा वहीं समता पार्टी के प्रत्याशी विजय किशोर सिंह तीसरे पायदान पर रहे. वैसे लोजपा के युवा नेता एवं ज़िला मीडिया प्रभारी उमाशंकर मिश्र के समर्थक भी गठबंधन के तहत सरायरंजन सीट मिलने पर दावेदारी करने की चाहत रखते हैं. दलसिंह सराय विधानसभा क्षेत्र समाप्त हो जाने के बाद उक्त क्षेत्र के पूर्व ज़िला पार्षद एवं सीपीआई प्रत्याशी रामविलास राय विमल भी सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के हौसले को बुलंद करने में लगे हैं. इसबार विद्यापतिनगर प्रखंड सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में शामिल हो जाने से उक्त्त प्रखंड के सभी 14 पंचायतों में लोग सक्रिय हो उठे हैं. सरायरंजन के पूर्व विधायक स्व.रामविलास मिश्र के पुत्र सज्जन मिश्र जो लोजपा के टिकट पर अपना क़िस्मत आजमा चुके है. इस बार ज़िले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वास यात्रा के दौरान का़फी उत्साहित दिख रहे थे. समाजवादियों के गढ़ सरायरंजन विधानसभा में कांग्रेस ने कई बार परचम लहराया है. इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी तो कांग्रेस की ओर से ज़िला महामंत्री अमरकांत मिश्र, चर्तुभुज सिंह, घनानंद मिश्र एवं प्रवीण कुमार पंकज के नाम की चर्चा है. सरायरंजन क्षेत्र के बदलते स्वरूप में बसपा, भाकपा माले, शिवसेना भी कमर कस रही है.

आगामी विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के तहत होना है, जिसमें सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र की रूप-रेखा तो बदल ही गई है. इस क्षेत्र में डा. मोहन भागवत के कार्यक्रम संपन्न होने से भाजपा कार्यकर्ताओं में इस सीट को लेकर उत्साह बना हुआ है, क्योंकि यही एक सीट है जहां भाजपा को लगता है कि वह आगामी चुनाव में कमल खिलाने में स़फल रहेंगे. इस बात का अंदाज़ा बिहार भाजपा के शीर्ष नेता एवं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी है. भाजपा के खाते में यदि सरायरंजन सीट गई तो भाजपा के पूर्व प्रत्याशी चंद्रकांत चौधरी और भाजपा के मुख्य कार्यसमिति सदस्य शशिकांत आनंद प्रबल दावेदारों की सूची में रहेंगे. शशिकांत आनंद पिछले दो दशक से विद्यार्थी परिषद् एवं संघ परिवार की गतिविधियों से पूरी तत्परता से जुड़े रहे हैं, जबकि 2000 के विधानसभा चुनाव में ज़िला 20 सूत्री उपाध्यक्ष चंद्रकांत चौधरी को राजद के पूर्व विधायक रामाश्रय साहनी ने तक़रीबन 2500 मतों से पराजित किया था. महिला सशक्तिकरण अभियान एवं नीतीश कुमार के महिला आरक्षण नीति से उत्साहित भाजपा के लिए समर्पित नेत्री विमला सिंह का भी कहना है कि पार्टी की ओर से जो भी जबाबदेही मिलेगी इसमें शत प्रतिशत खरा उतरूंगी. भाजपा के पूर्व ज़िलाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार शर्मा का कहना है कि वे गठबंधन धर्म से बंधे हुए हैं, फिर भी पार्टी के नए प्रांतीय अध्यक्ष डा. सी. पी. ठाकुर को विशेष रूप से ज़िले की राजनीति का आंकलन करने की गुहार करेंगे. सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों पूर्व सांसद आलोक कुमार मेहता, पूर्व मंत्री नागमणि भी दौरा कर रहे हैं, राजद कार्यकर्ताओं में इनके यहां से चुनाव लड़ने की अटकलबाज़ी होती है. पूर्व सांसद अजीत कुमार मेहता चार बार लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक परिस्थितिवश सरायरंजन विधानसभा से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. राष्ट्रीय महिला राजनीतिक दल संयुक्त महिला मोर्चा की ज़िलाध्यक्ष संगीता कुमारी भी ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में महिला उम्मीदवार उतारने एवं स्वयं सरायरंजन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.

समतामूलक समाज निर्माण की दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ विकास की धारा बहाने के क्रम में पिछले छह फरवरी को सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के झखड़ा ग्राम में रात्रि विश्राम एवं जनता दरबार का आयोजन कर चुके हैं. ज़िले में  दो-दो विधानसभा उपचुनाव एवं विधान परिषद् चुनाव जीतकर राजद-लोजपा के उत्साहित कार्यकर्ता, इन दिनों लालू प्रसाद के क़रीबी रहे पूर्व राजद नेता सत्यजीत राय कुंदन हत्याकांड से सहमे हुए हैं, जिन्हें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने समस्तीपुर आकर हौसला बढ़ाया है.