अलौली में ज़मीन तलाशती कांग्रेस

खगड़िया में चुनावी नगाड़ा अभी से बजने लगा है. कहीं इसकी आवाज़ हल्की है तो कहीं तेज़, लेकिन अलौली विधानसभा सीट (सुरक्षित) पर चुनाव की आहट सा़फ सुनाई दे रही है. टिकट पाने की चाहत में नेता पटना से दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं. वे अपने कामों का बखान करके पार्टी आलाकमान को रिझाने की कोशिश में लगे हैं, ताकि उन्हें टिकट मिल जाए. वैसे तो सभी दलों के दर्जनों नेता टिकट के लिए अपने-अपने आका की चौखट चूम रहे हैं, लेकिन कांग्रेसी नेताओं में टिकट के लिए कुछ ज़्यादा ही होड़ मची है. बिहार के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की बातों को अगर थोड़ी देर के लिए दरकिनार भी कर दिया जाए तो खगड़िया के अलौली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के कई दिग्गज नेता टिकट के लिए साम, दाम, दंड और भेद की नीति अपना रहे हैं. पार्टी से किसे टिकट मिलेगा और कौन हाथ मलता रह जाएगा, यह कहना तो अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इस क्षेत्र से डॉक्टर विद्यानंद दास, चंद्रदेव रजक, अविनाश कुमार अविनाश, वकील चौधरी एवं भानु प्रताप उर्फ गुड्डू पासवान सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन वहीं कुछ लोग अपना नाम उजागर करने से बच रहे हैं.

अलौली विधानसभा क्षेत्र के अहुना-धुसमुरी निवासी चंद्रदेव रजक लगभग 40 वर्षों से राजनीति कर रहे हैं. मुखिया होने के बाद उन्होंने ग्रामीणों के लिए कई बेहतर काम किए हैं. लोगों का कहना है कि स्थानीय होने के साथ-साथ चंद्रदेव ने समाज के लिए जो काम किए हैं, उनसे यह प्रमाणित हो गया है कि अगर वह विधायक बन गए तो क्षेत्र का विकास तय है. चंद्रदेव का कहना है कि अपने लिए तो सब जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीने का आनंद ही कुछ और है.

अभी तक जो स्थिति दिख रही है, उसके मुताबिक़ भावी प्रत्याशियों में डॉक्टर विद्यानंद दास को छोड़कर अन्य कोई भी चुनावी अखाड़े में नहीं कूदा है, लेकिन इस बार चुनाव में कूदने के लिए कई नेता बेताब दिख रहे हैं. लगभग 15 वर्षों से बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ से जुड़े डॉक्टर विद्यानंद पासवान इसके पूर्व भी अलौली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन तब वह हार गए थे. इस बार अपनी जीत के प्रति आश्वस्त विद्यानंद का कहना है कि उन्होंने लोगों के सुख-दु:ख में काफी साथ दिया है. 15 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े रहकर उन्होंने समाज के लोगों का काफी भला किया. अगर उन्हें अलौली से टिकट मिला तो निश्चित रूप से जनता का आशीर्वाद भी उन्हें ही मिलेगा और वह कांग्रेस का परचम लहराएंगे. अगर अविनाश कुमार की बात की जाए तो उन्होंने भी सामाजिक कार्यों में खूब बढ़-चढ़कर भाग लिया. अविनाश को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता स्वर्गीय बागेश्वर पासवान कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में 1985 में अलौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए. अविनाश का कहना है कि अलौली का कई वर्षों से प्रतिनिधित्व कर रहे पशुपति कुमार पारस ने आज तक क्षेत्र के विकास में रुचि नहीं दिखाई. अलौली आज भी वहीं का वहीं है. कहीं भी विकास नहीं दिख रहा है. मुसहर बाहुल्य इस क्षेत्र के लोग आज भी विकास के लिए तरस रहे हैं.

अलौली विधानसभा क्षेत्र के अहुना-धुसमुरी निवासी चंद्रदेव रजक लगभग 40 वर्षों से राजनीति कर रहे हैं. मुखिया होने के बाद उन्होंने ग्रामीणों के लिए कई बेहतर काम किए हैं. लोगों का कहना है कि स्थानीय होने के साथ-साथ चंद्रदेव ने समाज के लिए जो काम किए हैं, उनसे यह प्रमाणित हो गया है कि अगर वह विधायक बन गए तो क्षेत्र का विकास तय है. चंद्रदेव का कहना है कि अपने लिए तो सब जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीने का आनंद ही कुछ और है. चुनाव जीतने के बाद वह सर्वप्रथम क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने की कोशिश करेंगे. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त हुए ओलापुर गंगौर निवासी वकील चौधरी का कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है, लेकिन उनके पिता बनारसी चौधरी ने अपने समय में समाज के लोगों की सेवा करके परिवार की जो साख बनाई है, उसका फायदा उन्हें मिलेगा. जिस तरह उन्हें लोगों का समर्थन मिल रहा है, उससे तो यही लग रहा है कि उनकी राह में कोई भी कांटा नहीं बन सकेगा. वकील चौधरी ने कहा कि उनका इरादा जनता की सेवा करना है.

जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके भानु प्रताप उर्फ गुड्डू पासवान भी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया है कि वह किसी भी स्थिति में सुरक्षित क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि अगर पार्टी से टिकट मिला तो उनकी जीत सुनिश्चित है. ऐसी परिस्थिति में यह कहना शायद ज़्यादा श्रेयस्कर होगा कि किसी चहेते को टिकट दिलाने की कोशिश में ही भानु अपनी दावेदारी से इंकार कर रहे हैं. बहरहाल किसे पार्टी प्रत्याशी बनाया जाएगा और कौन हाथ मलता रह जाएगा, यह तो टिकट बंटवारे के बाद ही स्पष्ट होगा. फिलहाल पार्टी में टिकट के लिए होड़ मची हुई है. सभी खुद को प्रबल दावेदार बता रहे हैं.

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