हेमकुण्‍ड साहिब: आस्‍था के सहारे दुर्गम रास्‍ता तय करते हैं यात्री

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देवभूमि हिमालय में स्थित सिखों के पावनधाम हेमकुंड साहिब जाने वाले सैकड़ों यात्रियों को अव्यवस्था के चलते जान हथेली पर रखकर यात्रा करनी पड़ रही है. राज्य सरकार के लाख दावों केबावजूद हेमकुंड यात्रा मार्ग की हालत बेहद खराब है. घाघरिया से आगे दो स्थानों पर ग्लेशियर को काट कर रास्ते का निर्माण तो कर दिया गया, किंतु वहां रेलिंग न होने के कारण श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं.

हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू हो चुकी है. रोज़ाना दो से तीन हज़ार श्रद्धालु मत्था टेकने गोविंदधाम से हेमकुंड साहिब पहुंच रहे हैं, जिनमें चार सौ से पांच सौ तक दोपहिया वाहन शामिल हैं. हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गोविंदधाम से 19 किलोमीटर पर्वतीय मार्ग की पैदल यात्रा करनी पड़ती है.

सिखों के साथ हज़ारों हिंदू श्रद्धालु भी हेमकुंड साहिब में आस्था रखते हैं. हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू हो चुकी है. रोज़ाना दो से तीन हज़ार श्रद्धालु मत्था टेकने गोविंदधाम से हेमकुंड साहिब पहुंच रहे हैं, जिनमें चार सौ से पांच सौ तक दोपहिया वाहन शामिल हैं. हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गोविंदधाम से 19 किलोमीटर पर्वतीय मार्ग की पैदल यात्रा करनी पड़ती है. इस मार्ग की हालत बेहद खराब है. पैदल एवं खच्चर सवार यात्रियों को एक साथ चलना पड़ता है. हर वक़्त खाई में लुढ़कने का भय बना रहता है. विगत वर्ष खाई में गिरने के कारण लगभग दो दर्जन यात्रियों की मौत हो गई थी. इस वर्ष भी पुलना गांव के पास सुखविंदर नामक महिला यात्रा के दौरान घोड़े से गिर पड़ी, लेकिन पहाड़ की ओर गिरने के कारण उसकी जान बच गई. श्रद्धालुओं को गोविंदघाट से घाघरिया तक हर दो किलोमीटर बाद दुर्गम रास्ते से होकर गुज़रना पड़ता है. घाघरिया से आगे का लगभग 6 किलोमीटर मार्ग बेहद ज़ोखिम भरा है. कई जगह मार्ग की चौड़ाई मात्र तीन से साढ़े तीन फीट है. हर वर्ष प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर रेलिंग लगा दी जाती है, किंतु इस बार रेलिंग नहीं लगाई गई. ज़रा सी धक्कामुक्की श्रद्धालुओं को मौत के मुंह में धकेल सकती है. गोविंदघाट से आगे बढ़ते ही संचार माध्यम जवाब दे जाते हैं. हेमकुंड साहिब में यात्रियों को न तो मोबाइल की सुविधा मिलती है और न ही लैंडलाइन की. इलाके में मात्र दो सेटेलाइट फोन उपलब्ध हैं, जिनके संचालक यात्रियों से 50 रुपये प्रति काल वसूलते हैं. पूरे मार्ग में कहीं कोई अस्पताल नहीं है. केवल रास्ते में कहीं-कहीं प्राथमिक उपचार बॉक्स ही उपलब्ध कराए गए हैं. यदि यात्रा मार्ग में कहीं कोई दुर्घटना हो जाए तो घायलों को छह घंटे बाद ही डॉक्टर के दर्शन हो सकते हैं. हेमकुंड साहिब के दर्शनार्थ दोपहिया वाहन सवार तीर्थ यात्री बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. हर समय खुले आसमान में यात्रा करने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. राज्य के पुलिस महानिदेशक सुभाष जोशी ने बाइकर्स पर रोक लगाने के लिए पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सरकारों को पत्र भी लिखा था, लेकिन उनकी अपील बेअसर सिद्ध हुई. हर वर्ष दर्जन भर से अधिक बाइकर्स अपनी मनमानी के चलते काल के गाल में छलांग लगा लेते हैं. पूरी यात्रा स्थानीय लोगों की मनमानी एवं लूट की शिकार हो रही है. सूबे के पर्यटन मंत्री से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने सब कुछ प्रशासन के मत्थे मढ़ दिया.

यात्रा मार्ग खाद्य सामग्री एवं पेयजल के नाम पर सरासर लूट हो रही है. चार से पांच गुना ज्यादा दाम वसूले जा रहे हैं.

जोशीमठ में 25 रुपये में मिलने वाली पानी की बोतल यहां 50 रुपये में बेची जा रही है. खाद्य पदार्थों में मिलावट भी की जा रही है. प्रशासन को इस ओर ध्यानx देने की ज़रूरत है.

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