मगध में संभावना तलाशती कांग्रेस

  • Sharebar

बिहार में बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के बीच पिछले दो दशकों में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस मगध में सफलता की संभावनाएं तलाशने में लगी है. कांग्रेस राज्य से लेकर केंद्रीय स्तर तक के नेताओं एवं पदाधिकारियों को भेजकर वहां के राजनीतिक पहलुओं की जानकारियां एकत्र कर रही है, ताकि विधानसभा चुनाव में उसका परचम लहराए. कभी मगध प्रमंडल कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाना जाता था, लेकिन पिछले 20 वर्षों से मगध में वह तितर-बितर हो चुकी है. एक समय था, जब डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, डॉ. विजय कुमार सिंह जैसे नेता देश में अपनी सैद्धांतिक राजनीति के लिए चर्चित हुआ करते थे, लेकिन इन नेताओं द्वारा सींची गई राजनीतिक भूमि मगध आज कांग्रेस के लिए बंजर हो चुकी है. वजह, उनके बाद आए कांग्रेसी नेता पूर्व के नेताओं द्वारा छोड़ी गई राजनीतिक विरासत संभाल नहीं सके. नतीजा यह हुआ कि मगध में मतदाताओं से कांग्रेस की दूरी बढ़ती चली गई. आज 26 विधानसभा क्षेत्रों में से स़िर्फ एक यानी गया मुफस्सिल (विघटित) से कांग्रेस के अवधेश कुमार सिंह विधायक हैं. लंबे अर्से बाद अब कांग्रेस मगध में अपनी खोई ज़मीन की तलाश में लगी है. प्रदेश अध्यक्ष महबूब अली कैसर, मगध प्रमंडल के प्रभारी सांसद भक्तचरण दास, सांसद प्रेम चंद्र गुड्डू, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कृपानाथ पाठक एवं पर्यवेक्षक प्रो. उमाकांत सिंह मगध के पांच ज़िलों के सभी 26 विधानसभा क्षेत्रों के लिए संभावित प्रत्याशियों की तलाश में गया का दौरा कर चुके हैं. उक्त नेताओं ने गया में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से पुराने गिले-शिकवे भूलकर एकजुट होने की अपील की. आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने दर्जन भर पूर्व विधायकों और अल्पसंख्यक एवं महिला वर्ग के मज़बूत युवा नेताओं को लड़ाने की तैयारी में है.

फिलहाल रामाश्रय प्रसाद सिंह और जीतन राम मांझी नीतीश सरकार में मंत्री हैं, लेकिन आज के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अधिकांश नेता कांग्रेस में वापस आकर टिकट की दावेदारी करने में लगे हैं. गया ज़िले के दस विधानसभा क्षेत्रों में गया शहर, बेलागंज, वजीरगंज, अतरी, बोधगया, टिकारी, इमामगंज, बाराचट्टी, शेरघाटी एवं गुरुआ से जिन संभावित उम्मीदवारों के नाम कांग्रेस से आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रामजतन सिन्हा प्रमुख हैं. टिकारी विधानसभा क्षेत्र से उनकी मज़बूत दावेदारी है.

1990 के बाद बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर जब क्षेत्रीय दलों का बोलबाला शुरू हुआ तो कांग्रेस के बड़े नेताओं के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने लालू प्रसाद, नीतीश कुमार एवं रामविलास पासवान का दामन थाम लिया. रामाश्रय प्रसाद सिंह, रामजतन सिन्हा, जीतन राम मांझी, जयकुमार पालित समेत दर्जनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने दलबदल लिया. फिलहाल रामाश्रय प्रसाद सिंह और जीतन राम मांझी नीतीश सरकार में मंत्री हैं, लेकिन आज के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अधिकांश नेता कांग्रेस में वापस आकर टिकट की दावेदारी करने में लगे हैं. गया ज़िले के दस विधानसभा क्षेत्रों में गया शहर, बेलागंज, वजीरगंज, अतरी, बोधगया, टिकारी, इमामगंज, बाराचट्टी, शेरघाटी एवं गुरुआ से जिन संभावित उम्मीदवारों के नाम कांग्रेस से आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रो. रामजतन सिन्हा प्रमुख हैं. टिकारी विधानसभा क्षेत्र से उनकी मज़बूत दावेदारी है. अन्य सुरक्षित एवं सामान्य विधानसभा क्षेत्रों से जिन संभावित प्रत्याशियों के नाम सामने आए, उनमें जी एस रामचंद्र दास, रामस्वरूप पासवान, खान अली, बालिकराम, जयकुमार पालित, रामनरेश प्रसाद, डॉ. युगल किशोर प्रसाद, अभिराम शर्मा एवं सुरेंद्र प्रसाद तरुण आदि शामिल हैं. उक्त सभी लोग विधायक रह चुके हैं और कई तो मंत्री भी रह चुके हैं.

महिला प्रत्याशियों में गया नगर निगम की पूर्व मेयर आशा देवी (बाराचट्टी), पूर्व वार्ड पार्षद लाक्षो देवी (गया शहर), परवतिया देवी (इमामगंज), पूर्व सांसद राजेश मांझी की पत्नी सुनीता देवी (बोधगया), पूर्व सांसद स्व. दयानंद सहाय की पुत्रवधु एवं उद्योगपति संजय सहाय की पत्नी दुर्वा सहाय (गया शहर), अधिवक्ता सुनैना रानी अंजनी (बेलागंज) के नाम प्रमुख हैं. युवा अल्पसंख्यक नेताओं में मो. बख्तियार राणा (शेरघाटी), अलेक्जेंडर खां (शेरघाटी), मो. अयूब शेख गुड्डू (बेलागंज), मो. इकराम एवं सरवर खां (अतरी) के नाम मज़बूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं. इसके अलावा गया शहर विधानसभा क्षेत्र से गया नगर निगम के डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव, ज़िला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष बैजू प्रसाद गुप्ता, इंटक के ज़िलाध्यक्ष गोपाल लाल महतो, युवा कांग्रेस के बंटी, हाजी जमालुद्दीन एवं अमित गुप्ता, इमामगंज से पूर्व ज़िला पार्षद सुजीत मांझी एवं फकीर चंद्र मांझी, बाराचट्टी से मुकेश मांझी, शेरघाटी से चंद्रिका यादव, गुरुआ से शुद्धन सिंह, शंकर सिंह, शिशु यादव एवं शिवशंकर सिंह, बोधगया से राजेंद्र मांझी, बेलागंज से नाथुन प्रसाद, अतरी से भीम यादव, सुभाष चंद्र बोस एवं शिवशंकर सिंह भी दावेदारी जता रहे हैं. अल्पसंख्यक, महिला और सामान्य वर्ग से आने वाले कई ऐसे नेता हैं, जो आर्थिक रूप से काफी मजबूत और चुनाव लड़ने के लिए हर तरह से फिट माने जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस गया जिला समेत संपूर्ण मगध में विधानसभा चुनाव में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज कराएगी, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होगी. मतलब यह कि कांग्रेस अपनी खोई जमीन पाने के एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देगी. अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस की दावेदारी को मगध के मतदाता सफल बनाते हैं या नहीं.

चौथी दुनिया के लेखों को अपने ई-मेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें::

Leave a Reply

कृपया आप अपनी टिप्पणी को सिर्फ 500 शब्दों में लिखें