दो टूक : कॉमनवेल्थ गेम्स की सच्चाई

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One Response to “दो टूक : कॉमनवेल्थ गेम्स की सच्चाई”

  • सतपाल तंवर (हमेशा आपके साथ-आपके पास) says:

    खा गए-खा गए,
    कुत्ते शेरा को खा गए,
    खेल-खेल में मिल-बाँट कर खा गए,
    बोटी तो क्या,
    हड्डी भी चबा गए,
    जब गए पाखाना वास्ते,
    तो साले करप्सन की दुर्गन्ध को भी दबा गए,
    ये देश है अब विदेशी मेहमानों का,
    जिनकी गोद में बैठकर ये सफ़ेद दलाल,
    भारत माता को भी बेचकर खा गए!!

    सतपाल तंवर
    (हमेशा आपके साथ-आपके पास)
    satpaltanwar.sonu@yahoo.com

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