चुनावी तड़काः एक पर एक फ्री का फंडा

पर्व के मौसम में बाज़ार का फंडा राजनीति में भी लागू हो रहा है. हो भी क्यों न, चुनाव भी तो एक पर्व है. निर्दलीय विधायक विजेंद्र चौधरी इसे अच्छी तरह समझ गए. राज्यसभा में रामविलास पासवान को वोट क्या दिया, उन्हें बाज़ार का नियम भी समझा दिया. अपने लिए उस समय चुनावी टिकट का वादा कराया, पर अब जब सिंबल मिलने का समय आया तो कहने लगे, अभी तो एक पर एक फ्री का मौसम है सर! रामविलास पासवान चौंके तो विजेंद्र चौधरी ने समझाया कि बाज़ार का नियम मानने से फायदा ही फायदा है. जब विजेंद्र को लगा कि वह पासवान जी को समझाने में सफल हो रहे हैं तो अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर दी. लगता है, यह सौदा पट ही जाएगा.

पूनम को देवरानी से परेशानी

खगड़िया की जदयू विधायक पूनम देवी यादव के लिए इस बार चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. दरअसल इस बार उनके लिए उनकी देवरानी ही परेशानी बनकर सामने आने वाली हैं. कल तक भाजपा से ताल्लुक रखने वाली ज़िला परिषद अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद रामशरण यादव की पुत्रवधू सुशीला देवी द्वारा लोजपा-राजद गठबंधन के टिकट पर खगड़िया से विधानसभा चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही है. पूनम देवी खगड़िया के पूर्व विधायक रणवीर यादव की पत्नी हैं, जबकि सुशीला देवी रणवीर के चचेरे भाई एवं कोसी विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत यादव की पत्नी हैं. सुशीला देवी पूनम देवी यादव के लिए कितनी भारी साबित होंगी, यह कहना तो शायद जल्दबाजी होगी, लेकिन यह कहने में शायद कोई संकोच नहीं है कि घर फूटे गंवार लूटे वाली बात पूनम के लिए साबित होने वाली है. इधर दो देवियों की इस लड़ाई को दिलचस्प बनाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य प्रीति वर्मा खम ठोकने को तैयार बैठी हैं. वह अपने दम पर चुनावी वैतरणी पार करने का दावा कर रही हैं. उनका कहना है कि कुशवाहा जाति के साथ-साथ अन्य बिरादरी के मतदाताओं का समर्थन उन्हें प्राप्त है. इस बार चुकती घराने की एक नहीं चलेगी.

टिकट दो और सीट लेकर जाओ

चर्चित आर्थोपैडिक डॉ. अबुल कलाम भी विधानसभा चुनाव लड़ने के मूड में हैं, बशर्ते कोई दल बुलाकर टिकट दे. उनका कहना है कि उनकी छवि जनसरोकार के लिए सर्वोत्तम है और उनके जैसे लोगों को टिकट हेतु दिल्ली-पटना की दौड़ लगानी पड़े, यह मुमकिन नहीं है. डॉ. कलाम रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव हैं और प्राकृतिक एवं अन्य आपदाओं के वक्त बिना कोई भेद किए पीड़ितों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं. उनकी धारणा है कि ग़रीबों की सेवा कभी बेकार नहीं जाती. हालांकि डॉ. कलाम महिषी विधानसभा क्षेत्र के भेलाही गांव के रहने वाले हैं और बाढ़ पीड़ितों को हर साल वह अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं. उनका कहना है कि आप हमें टिकट दो, हम आपको सीट जीतकर देंगे.

मुसलमान प्रत्याशी और रामनाथ की पीड़ा

समस्तीपुर विधानसभा से लगातार तीन बार से जीत रहे जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं बिहार सरकार के मंत्री रामनाथ ठाकुर के बारे में चर्चा है कि वह इस बार क्षेत्र बदल सकते हैं. जदयू नेतृत्व को लगने लगा है कि ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में सफलता के लिए किसी भी एक विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम प्रत्याशी देना पार्टी की सेहत के लिए ज़्यादा अच्छा रहेगा. समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से मुख्य विपक्षी दल राजद पिछले कई चुनावों से मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतार रहा है. ज़िले की राजनीति में ऐसा समझा जाता है कि राजद को मुस्लिम प्रत्याशी  देने का लाभ पूरे ज़िले में मिलता है. इस प्रकार की चर्चा से जदयू में भी मुस्लिम उम्मीदवारी की मांग जोर पकड़ने लगी है. पटना में कुछ आला नेताओं को समझाया जा रहा है कि समस्तीपुर से मुस्लिम प्रत्याशी देना ठीक रहेगा. बस इसी बात से मंत्री जी की नींद उड़ी हुई है. जगह-जगह बोल रहे हैं कि समस्तीपुर से ही चुनाव ल़ड़ूगा.

अफवाह से परेशान सुरेंद्र यादव

कहते हैं कि अफवाह तो राजनीति में रस घोलती है. अगर यह न हो तो राजनीति का मजा ही जाता रहेगा, लेकिन राजद के पूर्व मंत्री एवं गया के बेलागंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र यादव विरोधियों द्वारा चुनाव क्षेत्र बदलने की फैलाई गई अफवाह से खासे परेशान नज़र आ रहे हैं. ऐसी नौबत आ गई कि कभीकभार ही लिखित बयान देने वाले सुरेंद्र यादव को विज्ञप्ति जारी करके यह सफाई देनी पड़ी कि मैं क्षेत्र नहीं बदल रहा हूं, बेलागंज से ही चुनाव लड़ूगा. नए परिसीमन में बेलागंज विधानसभा क्षेत्र का कुछ हिस्सा जो भूमिहार बहुल होने के बावजूद सुरेंद्र यादव का समर्थक था, वह कटकर नए बने टिकारी विधानसभा क्षेत्र में जुड़ गया है. इसी आधार पर अफवाह फैली या फैलाई गई कि सुरेंद्र यादव अब बेलागंज से चुनाव नहीं लड़ेंगे. इस अफवाह से परेशान सुरेंद्र यादव को चुनाव से पहले ही लड़ाई शुरू कर देनी पड़ गई है.

सुनीता कांग्रेस में तो कुंदन भागलपुर में

पत्नी ने दल क्या बदला, बाहुबली पति की जेल बदल दी गई कारण जो भी हो, पर लोजपा को छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई समस्तीपुर ज़िला परिषद उपाध्यक्ष सुनीता सिंह का कहना है कि ज़िले में सूपड़ा सा़फ होता देख नीतीश ने उनके पति कुंदन सिंह को भागलपुर जेल भेज दिया है. सुनीता सिंह द्वारा चुनाव लड़ने की तैयारियां शुरू करने के साथ ही रोसड़ा जेल में बंद उनके बाहुबली पति कुंदन सिंह को भागलपुर स्थानांतरित कर दिए जाने के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं. चर्चा है कि ज़िले के एक मंत्री के इशारे पर यह कार्रवाई की गई है. मंत्री जी का आकलन था कि अगर कुंदन सिंह इस इलाक़े में रहा तो सुनीता सिंह को काफी मदद मिल जाएगी. भागलपुर से चुनावी तार जोड़ने में दिक्कत आएगी.

पत्रकारों पर मेहरबान हुए नेता

पत्रकार भाई तो आम दिनों में कुछ नेताओं के चहेते बने रहते हैं, लेकिन फिलहाल मौक़ा चुनाव का है, सो लगभग सभी नेताओं ने पत्रकारों के लिए इन दिनों अपना दिल खोल दिया है. उनका जमकर स्वागत-सत्कार हो रहा है, लेकिन इस मामले में राजद-लोजपा ने सभी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. राजद-लोजपा के तो चुनावी घोषणापत्र में ही पत्रकारों के लिए आवास एवं पेंशन की बात रखी जा रही है. इस तरह के प्रस्ताव से जदयू एवं कांग्रेस दुविधा में है. आ़खिर वे करें तो क्या करें. एक समर्थक ने राय दी कि बड़ी लाइन खींच दीजिए, सब संकट खत्म हो जाएगा.

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