पाकिस्‍तान, क्रिकेट, अंडरवर्ल्‍ड, सेक्‍स और मैच फिक्सिंग


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मैच फिक्सिंग के आरोप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की एंटी करप्शन यूनिट की जांच के घेरे में आए पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज़ मोहम्मद आसिफ की पूर्व गर्लफ्रेंड वीना मलिक ने दावा किया है कि आसिफ पहले भी मैच फिक्सिंग में लिप्त रहे हैं. और तो और, वीना ने यहां तक कहा है कि खिलाड़ियों को फंसाने के लिए आसिफ लड़कियों का इस्तेमाल करते रहे हैं. इन लड़कियों में मॉडल, अभिनेत्रियां, बार डांसर आदि शामिल हैं. वीना ख़ुद को इस अंदाज़ में पेश कर रही हैं, जैसे आसिफ ने उन्हें प्यार में धोखा दिया है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है. सच तो यह है कि सट्टेबाज़ी और सेक्स का रिश्ता नया नहीं है और वीना जैसी न जाने कितनी हसीनाएं इसमें अपनी भूमिका बख़ूबी निभाती हैं. यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि क्रिकेट में सट्टेबाज़ी का खेल अंडरवर्ल्ड के इशारे पर खेला जाता है. टेस्ट क्रिकेट से लेकर टी-20 तक, इस खेल की हर चाल पर अंडरवर्ल्ड का साया है. अरबों के इस काले कारोबार में खिलाड़ियों की भूमिका तो बस प्यादों की होती है, इसके असल सूत्रधार तो विभिन्न देशों के राजनीतिज्ञ, क्रिकेट अधिकारी और फिल्म जगत के सितारे होते हैं.

हर मुक़ाबला फिक्स, हर गेंद फिक्स, हर रन फिक्स यानी क्रिकेट के मैदान पर होने वाली हर चाल पर करोड़ों का दांव लगा होता है. दर्शकों को लगता है कि खिलाड़ी मैदान पर शानदार खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन असली खेल ड्रेसिंग रूम के अंदर और मैदान के बाहर खेला जाता है, जहां यह तय होता है कि कौन सा बल्लेबाज़ कौन सी गेंद पर चौका या छक्का लगाएगा और किस गेंद पर उसकी गिल्ली उड़ जाएगी. या फिर कौन गेंदबाज़ कब वाइड या नो बॉल फेंकेगा और कब अपनी ही गेंद पर छक्के लगवाएगा. यह पर्दे के पीछे की ऐसी कहानी है, जिसे सुनकर करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के कलेजे छलनी हो जाएंगे.

कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जो सट्टेबाज़ी के धंधे में अपनी मर्जी से शामिल होते हैं, उन्हें अक्सर इसके लिए मजबूर कर दिया जाता है. खिलाड़ियों को फांसने के लिए अंडरवर्ल्ड पैसे के साथ-साथ हर वह हथकंडा अपनाता है, जिसके दम पर उन्हें मनमुताबिक़ काम करने को मजबूर किया जा सके. अंडरवर्ल्ड के लोग अपने सूत्रों के माध्यम से खिलाड़ियों से संपर्क स्थापित करते हैं, मीठी-मीठी बातें कर उसे अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करते हैं. यदि बात इतने से ही बन जाए और पैसे के लालच में खिलाड़ी अंडरवर्ल्ड के कहे मुताबिक़ काम करने को राजी हो जाए तो अच्छा है, लेकिन घी सीधी उंगली से न निकले तो सट्टेबाज़ दूसरे तरीक़े अपनाने से बाज नहीं आते. इसके बाद शुरू होता है सेक्स और ड्रग्स का खेल. मैदान के बाहर होने वाली अनौपचारिक पार्टियों या समारोहों में खिलाड़ियों को चोरी-छुपे या जानबूझ कर नशीली चीजें दी जाती हैं. फिर लड़कियों को उनके पास भेजा जाता है. खिलाड़ियों का युवा मस्तिष्क सट्टेबाज़ों के इस खेल को समझ पाए, उससे पहले ही वे उनके जाल में फंस चुके होते हैं. व्यक्तिगत जीवन में उनके ग़लत-सही कामों की सीडी बन जाती है और फिर वे वही करते हैं, जो करने के लिए उनसे कहा जाता है.

क्रिकेट के खेल में मैच फिक्सिंग और अंडरवर्ल्ड का यह तमाशा नया नहीं है. 1980 के दशक के आख़िरी सालों तक शारजाह क्रिकेट मैचों का एक महत्वपूर्ण केंद्र था. भारत और पाकिस्तान के अलावा हर देश की क्रिकेट टीम यहां क्रिकेट खेलने आया करती थी, लेकिन आज शारजाह क्रिकेट के मानचित्र से पूरी तरह ग़ायब हो चुका है. इसकी एकमात्र वजह है मैच फिक्सिंग. शारजाह में होने वाले मुक़ाबलों के दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम यहां अक्सर आया करता था. उसके साथ-साथ फिल्मी सितारों और उद्योगपतियों की एक फौज भी यहां मौजूद होती थी. शारजाह में क्रिकेट मैचों का आयोजन भले बंद हो गया, लेकिन क्रिकेट के खेल पर अंडरवर्ल्ड और सट्टेबाज़ी का साया बदस्तूर जारी है. क्रिकेट की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं, टी-20 क्रिकेट को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेल को दुनिया के ऐसे हिस्सों में पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं, जहां अब तक यह मौजूद नहीं रहा है. इससे क्रिकेट का बाज़ार तो बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ भद्रजनों के इस खेल का स्वरूप भी लगातार काला होता जा रहा है. सट्टेबाज़ी के इस खेल को आईपीएल जैसे क्रिकेट आयोजनों से और बढ़ावा मिल रहा है. चौथी दुनिया ने आईपीएल-3 की शुरुआत से एक महीने पहले ही इस रहस्य से पर्दा उठा दिया था कि आईपीएल के तक़रीबन सभी मुक़ाबले फिक्स हैं. हमने यह भी कहा था कि लीग के तीसरे सीजन के फाइनल मुक़ाबले में मुंबई इंडियंस की टीम खेलेगी और ऐसा ही हुआ. आईपीएल ख़त्म होने के बाद कोच्चि टीम में स्वीट ईक्विटी को लेकर चर्चा में आई सुनंदा पुष्कर ने अपने बयानों से चौथी दुनिया की रिपोर्ट की पुष्टि कर दी. उन्होंने यह कहा था कि लीग की टीमों में दाउद इब्राहिम का पैसा लगा है. अंडरवर्ल्ड के लोग क्रिकेट मुक़ाबलों पर पैसा लगाते हैं और सट्टेबाज़ी की मदद से मुक़ाबलों के नतीजों को प्रभावित कर लागत का कई गुना मुना़फा कमा लेते हैं. उनके इस खेल में खिलाड़ी से लेकर क्रिकेट के अधिकारी, राजनेता और फिल्मी सितारे तक शरीक होते हैं. सट्टेबाज़ी का साया क्रिकेट को किस कदर अपने क़ब्ज़े में ले चुका है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगता है कि आजकल तक़रीबन हर मुक़ाबला फिक्स होता है. मुक़ाबलों के नतीजों को फिक्स करना तो अब पुराना पड़ चुका है, अब तो हर गेंद, हर रन, हर विकेट पर सट्टेबाज़ों का पैसा लगा है. टेलीविज़न पर हमें जो दिखाई देता है, वह तो केवल तमाशा है, असली खेल तो मैदान के बाहर और पर्दे के पीछे से खेला जाता है. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने तो स्पष्ट कह भी दिया है कि क्रिकेट का हर मैच आजकल फिल्म की एक पूर्व निर्धारित स्क्रिप्ट की तरह होता है. सच्चाई यह है कि क्रिकेट का खेल दर्शकों को मूर्ख बनाने और अंडरवर्ल्ड एवं सट्टेबाज़ों की काली कमाई का एक ज़रिया बन चुका है.

ख़बरों पर भरोसा करें तो मोहम्मद आमिर आईसीसी के गवाह बनने की सोच रहे हैं, जबकि मोहम्मद आसिफ पाकिस्तान लौट कर आना ही नहीं चाहते थे. उन्हें डर था कि पाकिस्तान पहुंचते ही उनकी हत्या कर दी जाएगी. हालांकि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन हो भी जाए तो कोई आश्चर्य नहीं, क्योंकि सट्टेबाज़ों के तार हर जगह मौजूद हैं. यदि आईसीसी और स्कॉटलैंड यार्ड की जांच-पड़ताल में उनके ख़िला़फ पुख्ता सबूत मिलने की नौबत आएगी तो वे आसिफ को रास्ते से हटाने से भी नहीं हिचकेंगे. आसिफ पर पहले भी ड्रग्स के सेवन का आरोप लग चुका है और इसके लिए उन्हें प्रतिबंधित भी किया गया था. अपने छोटे से करियर में उन्होंने जितनी संपत्ति अर्जित कर ली है, उससे काली कमाई की बू आती है. अन्य चीजों के अलावा आसिफ के पास चार बंगले हैं, जिसमें अकेले लाहौर स्थित इटालियन स्टाइल के विलानुमा बंगले की क़ीमत ही 6.5 लाख पाउंड है. क्रिकेट के अलावा उनकी कमाई का और कोई ज़रिया नहीं है, फिर इतनी संपत्ति उनके पास कहां से आई, यह रहस्यमय है.

इन सबके बीच सबसे ज़्यादा चिंता पाकिस्तान की हालत को लेकर होती है. भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी, हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता जैसी मुश्किलें झेलने को मजबूर इस मुल्क के लोगों के लिए ख़ुश होने की अकेली वजह क्रिकेट ही है. जब टीम जीतती है तो पूरे पाकिस्तान में ईद सा माहौल बन जाता है. भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी क्रिकेट एक धर्म की तरह है और क्रिकेटर्स लाखों-करोड़ों देशवासियों के आदर्श हैं. सट्टेबाज़ों, अंडरवर्ल्ड, फिल्म स्टारों, खिलाड़ियों और अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा यह है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अछूत बनता जा रहा है. लाहौर में श्रीलंका टीम पर हुए आतंकी हमले के बाद से विदेशी टीमें वहां जाने से पहले ही इंकार कर चुकी हैं. पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों का आयोजन नहीं होता, उसे होम सीरीज़ खेलने के लिए इंग्लैंड की शरण लेनी पड़ती है. लेकिन अब शायद ऐसा नहीं हो. इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड इस पर दोबारा विचार कर रहा है और ज्यादा संभावना इसी बात की है कि वह अब इसकी अनुमति नहीं देगा. दूसरी ओर न्यूजीलैंड और कुछ अन्य विदेशी टीमों ने साफ तौर पर इशारा कर दिया है कि खिलाड़ियों पर लगे मैच फिक्सिंग के आरोपों की जांच से पहले वे पाक टीम के साथ मुक़ाबलों में नहीं उतरेंगी. यदि ऐसा हो गया तो पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएगा. यह न तो पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा, न ही वहां की जनता के लिए और न ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए.


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