मणिपुरः इंडिया का स्‍पोर्ट्सवेल्‍थ

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राष्ट्रमंडल खेलों में मणिपुर का जलवा सबने देखा. जिस अंदाज़ में इस राज्य के खिलाड़ियों ने पदक पर पदक जीते, उसे देखते हुए इस राज्य को स्पोर्ट्‌स का पावर हाउस कहना ग़लत नहीं होगा. भले ही मणिपुर आतंकवाद और अभावों से ग्रस्त हो, फिर भी देश की शान बढ़ाने में यहां के खिलाड़ियों ने कोई कोर-कसर बाक़ी नहीं रखी. 19वें राष्ट्रमंडल खेल के पहले दिन ही पदकों का खाता भारोत्तोलन के नाम खुला. मणिपुरी बाला सोनिया चनु ने भारोत्तोलन में रजत पदक जीता. यह देश के लिए गर्व का मौक़ा था. राष्ट्रमंडल खेल में रेणुबला चनु, सोनिया चनु, संध्या रानी चनु, मोनिका देवी, बोम्बेला चनु, भाग्यवती और सुरंजय आदि ने पदक जीतकर पदक तालिका में भारत को दूसरा स्थान दिला दिया.

मणिपुर में खेलों के नाम पर सुविधाएं न के बराबर हैं. राज्य में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अगर कुछ हद तक सुधर जाए तो देश की शान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों की संख्या और बढ़ सकती है. अगले ओलंपिक तक और भी अच्छे खिलाड़ी आ सकते हैं. ऐसे में खिलाड़ियों को समुचित सुविधा देने के लिए बेहतर सरकारी नीति की ज़रूरत है. ग़रीबी और राजनीतिक उठापठक की वजह से मणिपुर की क्या हालत है, यह किसी से छुपा नहीं है.

मणिपुर के अधिकतर खिलाड़ी निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं. भारोत्तोलक रेणुबला चनु की पारिवारिक स्थिति बहुत कमज़ोर थी. अपना परिवार चलाने के लिए उसे बस में कंडक्टरी तक करनी पड़ी थी. 58 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारोत्तोलक रेणु कहती हैं कि मैं दिन में तीन बार अभ्यास करती हूं. यही नहीं, वो रात में भी अभ्यास करती हैं. 52 किलो वर्ग के मुक्केबाज़ सुरंजय एशिएन चैंपियन भी हैं. बॉक्सिंग की दुनिया में छोटा टायसन के नाम से प्रसिद्ध सुरंजय मार्च 2009 से आज तक यानी एक साल के सफर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार छह स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. राष्ट्रमंडल खेलों में भी सुरंजय ने भारत के लिए एक स्वर्ण पदक जीता यानी एक साल में सात स्वर्ण पदक.

डोपिंग मामले में फंस चुकी भारोत्तोलक मोनिका को 75 किलो वर्ग में कांस्य से ही संतुष्ट होना पड़ा. मोनिका 2008 के ओलंपिक में डोपिंग के चलते खेल नहीं पाई थी. उसकी जगह शैलजा पुजारी को चुना गया था. कुल मिलाकर मणिपुर के 16 खिलाड़ियों ने 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया था. उनमें से सात खिलाड़ियों ने सफलता हासिल की. भारत सरकार ने राज्य के खिलाड़ियों का स्वागत किया. इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने भी मणिपुर के खिलाड़ियों का सम्मान किया. रेणुबला की पहली कोच एल अनीता चनु कहती हैं कि अगर हमारे राज्य में शांति आ जाए तो हर जगह हमारे ही खिलाड़ी दिखेंगे. हमारे खिलाड़ियों को जो सफलता मिल रही है, उससे हमारे राज्य में लड़कियां ज़्यादा से ज़्यादा खेलों की दुनिया में आना चाह रही हैं, लेकिन बात वहीं राज्य के अशांतिपूर्ण माहौल पर आकर टिक जाती है. अनीता अब तक सोनिया चनु, संध्या रानी चनु और रेणुबला आदि कई खिलाड़ियों को वेट लिफ्टिंग का शुरुआती प्रशिक्षण दे चुकी हैं.

मणिपुर में खेलों के नाम पर सुविधाएं न के बराबर हैं. राज्य में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अगर कुछ हद तक सुधर जाए तो देश की शान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों की संख्या और बढ़ सकती है. अगले ओलंपिक तक और भी अच्छे खिलाड़ी आ सकते हैं. ऐसे में खिलाड़ियों को समुचित सुविधा देने के लिए बेहतर सरकारी नीति की ज़रूरत है. ग़रीबी और राजनीतिक उठापठक की वजह से मणिपुर की क्या हालत है, यह किसी से छुपा नहीं है. बावजूद इसके यहां के लोगों और खिलाड़ियों के मन में देश का नाम रोशन करने का जज़्बा कम नहीं हुआ है.

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