दिल्‍ली का बाबूः ऐसे कैसे होगी जांच

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कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर भले आश्वस्त हों कि राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार की एक साथ कई एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच से मामला और उलझ कर नहीं रह जाएगा, लेकिन इसके संकेत अभी से देखने को मिल रहे हैं. ख़बरों के मुताबिक़, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई आयकर अधिकारियों से इसलिए ख़फा हैं कि उन्होंने अन्य जांच एजेंसियों को विश्वास में लिए बगैर आरोपी अधिकारियों के घरों और कार्यालयों में देश भर में छापे मारे. इन दोनों एजेंसियों ने अपनी नाख़ुशी प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी है. फिलहाल यही लग रहा है कि सभी एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपने-अपने जांच कार्यों का संचालन कर रही हैं. हालांकि चंद्रशेखर संतुष्ट हैं और उनका यही मानना है कि सीबीआई और प्रवर्तननिदेशालय जैसी एजेंसियां एक-दूसरे के कार्यक्षेत्रों का अतिक्रमण नहीं करेंगी, लेकिन ताजा संकेतों को देखकर यही लगता है कि मामला इतना सीधा नहीं है, जितना बताया जा रहा है.

कभी नहीं से देर भली

मई महीने में मंगलोर में हुए विमान हादसे और विमान यात्रियों की तेजी से बढ़ती संख्या के मद्देनजर सरकार की देर से ही सही, लेकिन आंखें खुलती नज़र आ रही हैं. उसने एक स्वायत्त नागरिक विमानन प्राधिकरण (सीएए) के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाने का फैसला किया है. सीएए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की जगह लेगा, जो बढ़े कार्यभार को वहन करने में बार-बार अक्षम साबित होता रहा है. डीजीसीए नागरिक विमानन मंत्रालय के अधीन काम करता है और सीमित स्वायत्तता के चलते इसकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, लेकिन इसके मौजूदा अध्यक्ष नसीम जैदी का मानना है कि नए प्राधिकरण के गठन से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी. उधर अंदर की जानकारी यह है कि नए संस्थान के गठन के लिए अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन का दबाव है, जिसने इंग्लैंड और अमेरिका की तर्ज पर एक प्राधिकरण के गठन की अनुशंसा की है. रोचक तथ्य यह है कि सीएए की बागडोर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के बजाय किसी ऐसे शख्स के हाथों में हो सकती है, जो नागरिक विमानन मामलों का विशेषज्ञ हो. अब यदि प्रशासनिक सेवा के अधिकारी दबी ज़ुबान से इसका विरोध कर रहे हों तो हमें आश्चर्य नहीं करना चाहिए.

नौकरशाहों के लिए रिटायरमेंट स्कीम

यूपीए सरकार सेवानिवृत्त होने वाले नौकरशाहों को खाली नहीं बैठने देना चाहती, खासकर उन अधिकारियों को, जिनकी सियासी गलियारों में अच्छी पहुंच है. हाल के दिनों में कई ऐसे अधिकारियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है. ऐसे नौकरशाहों में शीला भिड़े और ए के रथ शामिल हैं, जिन्हें कोल इंडिया लिमिटेड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है. इसी तरह वित्तीय सेवाओं के पूर्व सचिव अरुण रामनाथन को शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया में भेजे जाने का फैसला लेने की सूचना है. हालांकि सेवानिवृत्त अधिकारियों को इस तरह नियुक्त करने की यह परंपरा नई नहीं है, लेकिन हर कोई इससे ख़ुश नहीं है. योजना आयोग भी कई बार इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है. आयोग का मानना है कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार किसी स्वायत्तशासी संस्था के हाथों में होना चाहिए, लेकिन उसकी इस सलाह पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.

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