डेविड हेडली : भारत बनाम अमेरिका-पाकिस्तान

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली के बारे में परत दर परत जो खुलासे हो रहे हैं, वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं. उक्त खुलासे खासकर भारत को सचेत करते हैं कि जिस तरह वह पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकता, उसी तरह उसे अमेरिका को भी संदिग्ध निगाहों से देखना चाहिए. ब्रिटेन के एक अख़बार में छपी रिपोर्ट को यदि सही मानें तो पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली के बारे में अमेरिकी अधिकारियों को पता था कि उसके संबंध लश्कर-ए-तैयबा के साथ हैं. वह भारत में किसी आतंकवादी कार्रवाई का षड्‌यंत्र रच रहा है. यद्यपि अमेरिका ने भारत को यह जानकारी तो दी कि लश्कर-ए-तैयबा भारत के किसी बड़े शहर पर हमला कर सकता है, किंतु उसने यह नहीं बताया कि वह कौन आदमी है, जो इस आतंकी संगठन की मदद कर रहा है. यदि अमेरिका हेडली के बारे में बता देता तो शायद भारत उसे पहले ही दबोच लेता और मुंबई की भयावह आतंकी त्रासदी होने से बच जाती, क्योंकि हेडली उस व़क्त भारत में ही था और अपना जाल बिछाने में लगा था. अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संदर्भ में यह बात और भी अहम हो जाती है.

समझा जा रहा है कि भारत सरकार अमेरिका के ऐसे व्यवहार से चकित है, किंतु अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा को ध्यान में रखते हुए उसने चुप्पी साध ली. हो सकता है कि भविष्य में भारत यह सवाल अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष जरूर उठाए और उठाना भी चाहिए. हेडली ने अमेरिका में उसके साथ पूछताछ करने के लिए गए भारतीय अधिकारियों को बताया था कि वह हमले की तैयारियों के बारे में आईएसआई के अधिकारियों को लगातार सूचनाएं देता रहा.

हेडली के बारे में यह जानकारी उसकी दो पत्नियों ने ही अमेरिका को दी थी. हेडली की शायद तीन पत्नियां हैं, जिनमें एक अमेरिका एवं एक मोरक्को की रहने वाली है. मोरक्को वासी पत्नी ने पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को बताया था कि उसके पति के उन पाकिस्तानी आतंकियों से संबंध हैं, जो भारत में कोई बड़ा हमला करने की साजिश रच रहे हैं. इसी तरह हेडली की अमेरिकी पत्नी ने अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई के अधिकारियों से संपर्क करके उसके बारे में यह सूचना दी. इन महिलाओं के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी सूचनाओं को कोई महत्व नहीं दिया और उल्टे उन्हें वहां से भगा दिया. अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसी महत्वपूर्ण सूचना को भी गंभीरता से नहीं लिया, यह आश्चर्यजनक है. इससे तो उन्हीं ख़बरों की पुष्टि होती है कि हेडली एक तरह से डबल एजेंट था. वह पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के साथ अमेरिका के लिए भी काम कर रहा था और शायद अमेरिकी अधिकारियों को यह बात पहले से ही मालूम थी कि हेडली के पाकिस्तानी गुप्तचर संगठन आईएसआई से भी संबंध हैं. यदि ऐसा न होता तो वे ऐसी गंभीर सूचना देने वाली उसकी पत्नियों को भागने के लिए न कहते.

समझा जा रहा है कि भारत सरकार अमेरिका के ऐसे व्यवहार से चकित है, किंतु अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा को ध्यान में रखते हुए उसने चुप्पी साध ली. हो सकता है कि भविष्य में भारत यह सवाल अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष जरूर उठाए और उठाना भी चाहिए. हेडली ने अमेरिका में उसके साथ पूछताछ करने के लिए गए भारतीय अधिकारियों को बताया था कि वह हमले की तैयारियों के बारे में आईएसआई के अधिकारियों को लगातार सूचनाएं देता रहा. उसे इस तरह के दो अभियानों के लिए आईएसआई की तऱफ से भुगतान भी हुआ था, इसलिए लगातार रिपोर्ट देना ज़रूरी था. ब्रितानी अख़बार की रिपोर्ट के बाद अब इसमें संदेह नहीं रह गया है कि मुंबई हमला आईएसआई की अपनी योजना का परिणाम था, जिसमें हेडली उसका मुख्य सहयोगी था. यद्यपि पाकिस्तान लगातार इस बात से इंकार करता आ रहा है, लेकिन अब उसकी सारी चालबाज़ी उजागर हो चुकी है. अमेरिका भी हेडली को लेकर जैसे दोहरे खेल खेल रहा है, उसमें भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है. अब भारत को हेडली के संदर्भ में अमेरिका से साफ कह देना चाहिए कि आतंकवाद के ख़िला़फ यदि वह उसके साथ सहयोग करना चाहता है तो उसे इस तरह तथ्यों को छिपाने से बाज आना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका भारत को अपना सबसे बड़ा और सबसे नज़दीकी रणनीतिक साझीदार बताता है. अमेरिकी अधिकारी यह कहते कभी नहीं थकते कि भारत का अमेरिका के लिए विशेष महत्व है. यहां तक कि ओबामा की भारत यात्रा का कार्यक्रम भी पूरे तीन दिनों का रखा गया. राष्ट्रपति बनने के बाद अब तक उन्होंने किसी देश की यात्रा में वहां इतना समय नहीं बिताया. कहा तो यह भी जा रहा है कि ओबामा ने व्हाइट हाउस पहुंचने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का प्रथम राजकीय अतिथि के रूप में स्वागत किया और उनके सम्मान में विशिष्ट भोज का आयोजन किया. एक तऱफ भारत को इतना सम्मान और दूसरी तऱफ भारत के सबसे बड़े शत्रु पाकिस्तान के प्रति अति उदारतापूर्ण सैनिक सहायता! इन दोनों बातों के बीच तालमेल ढूंढना असंभव सा है. ओबामा की भारत यात्रा दोनों देशों के लिए कई लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होगी. बावजूद इसके तमाम भारतीयों को लगता है कि अमेरिका एक शातिर व्यापारी है, जो एक तरफ भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचता है और दूसरी तरफ पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सैनिक सहायता मुफ्त देता है. वह जानता है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता सीधे ज़िहादी संगठनों के पास पहुंचती है और उसे जो नए हथियार मिलते हैं, वे भारत के विरुद्ध इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं. फिर भी अमेरिका का पाक के प्रति नरम रुख़ समझ से परे है. कहना गलत न होगा कि पाकिस्तान को अमेरिका से अधिक दूसरा और कौन जान सकता है. मुंबई हमले में आईएसआई की भूमिका एवं तालिबान को पाकिस्तानी सेना की मदद के बारे में दुनिया को भले देर से जानकारी मिली हो, लेकिन अमेरिका को यह सब पहले से पता है, फिर भी वह पाकिस्तान की सहायता बढ़ाता जा रहा है और उसे मोर्चे पर लगाए हुए है. कोई संदेह नहीं कि इसके पीछे उसकी कोई न कोई योजना जरूर होगी. ऐसी स्थिति में भारत को सचेत रहने की ज़रूरत है.

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