हराने के लिए हमनाम का सहारा

चुनाव जीतने के लिए नेता हर तरह के हथकंडे आज़मा रहे हैं, लेकिन यह हथकंडा कुछ अलग है. राघोपुर और महनार विधानसभा क्षेत्र में विरोधियों को मात देने के लिए उनके हमनाम उम्मीदवार को चुनावी अखाड़े में उतार दिया गया. राघोपुर में जद-यू प्रत्याशी सतीश यादव से मिलते-जुलते नाम वाले सतीश सिंह को शिवसेना के टिकट पर तो महनार में मुंशी लाल राय के खिला़फ निर्दलीय के तौर पर मुंशी लाल राय को ही खड़ा करा दिया गया. दोनों ही चुनाव क्षेत्रों में लड़ाई आर-पार की है, इसलिए एक-एक वोट पर नेताओं की नज़र लगी हुई थी. राघोपुर से सतीश सिंह को खड़ा कर दोहरा मक़सद पूरा करने की कोशिश की गई. पहले तो सतीश नामक प्रत्याशी को खोजा गया, ताकि ईबीएम में सतीश यादव और सतीश सिंह का नाम आगे-पीछे रहे. इसके अलावा पार्टी के रूप में शिवसेना को चुना गया, ताकि तीर-धनुष चुनाव चिन्ह रहे. ग़ौरतलब है कि जद-यू का चुनाव चिन्ह तीर है. इसी तरह महनार में भी मुंशी लाल राय को चुना गया, ताकि ईबीएम में नाम आगे-पीछे रहे. यह सारा खेल इसलिए खेला गया, ताकि मतदाताओं को भ्रम में डाला जा सके और मज़बूत प्रत्याशी को वोटों का नुक़सान हो. राघोपुर के जद-यू प्रत्याशी सतीश यादव को अंतिम समय में जब इस खेल का पता चला तो उनके होश उड़ गए. आनन-फानन में समर्थकों की बैठक बुलाकर इस खतरे से निपटने की रणनीति तैयार की गई. तय किया गया कि किसी भी तरह सतीश सिंह को बैठाया जाए. कैसे बैठाया जाए, इसके लिए दोहरी रणनीति बनाई गई. पहले तय हुआ कि सारी योजना पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी. विरोधी खेमे को भनक न लगे, इसलिए ऑपरेशन में खास लोगों को रखा गया. दूसरा कदम सतीश सिंह को खोजने और उसे हर हाल में बैठाने के लिए उठाया गया.

बताया जाता है कि सतीश सिंह को खड़ा करने के लिए हवाई जहाज से रांची से उसका टिकट मंगवाया गया, ताकि अंतिम समय में नामांकन कराया जा सके. सूत्रों ने बताया कि सतीश सिंह को कुछ प्रलोभन भी दिया गया. इसी तरह महनार में राजद के बाग़ी एवं पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय के खिला़फ मुंशी लाल राय को उतार कर खेल बिगाड़ने का खेल खेला गया, लेकिन यहां मुंशी लाल को खड़ा करने वाले इतने होशियार थे कि उन्होंने पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय को इसकी भनक भी नहीं लगने दी. इस वजह से पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय निर्दलीय खड़े मुंशी लाल राय को बैठा नहीं पाए.

दस-बारह गांव खंगालने के बाद सतीश सिंह को खोजा गया और उसे मनाने के लिए किसान प्रकोष्ठ के अनिल सिंह को लगाया गया. देर रात तक मनाने का दौर चला और सुबह नामांकन वापस लेने की बात तय हो गई. सतीश सिंह ने वादे के मुताबिक़ सतीश यादव के समर्थन में नाम वापस ले लिया. बताया जाता है कि सतीश सिंह को खड़ा करने के लिए हवाई जहाज से रांची से उसका टिकट मंगवाया गया, ताकि अंतिम समय में नामांकन कराया जा सके. सूत्रों ने बताया कि सतीश सिंह को कुछ प्रलोभन भी दिया गया. इसी तरह महनार में राजद के बाग़ी एवं पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय के खिला़फ मुंशी लाल राय को उतार कर खेल बिगाड़ने का खेल खेला गया, लेकिन यहां मुंशी लाल को खड़ा करने वाले इतने होशियार थे कि उन्होंने पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय को इसकी भनक भी नहीं लगने दी. इस वजह से पूर्व मंत्री मुंशी लाल राय निर्दलीय खड़े मुंशी लाल राय को बैठा नहीं पाए. उधर ठेकेदार मुंशी लाल राय की पत्नी चनरी देवी ने एसपी-वैशाली को पत्र लिखकर लोजपा विधायक एवं स्थानीय उम्मीदवार रामा सिंह और उनके सहयोगियों पर अपने पति का अपहरण करने, धमका कर ज़बरन नामांकन कराने और बंधक बनाकर अज्ञात स्थान पर रखने का आरोप लगाया. कुल मिलाकार जीतने के लिए प्रत्याशी किसी भी हद तक जाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं.

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