खगडि़याः करिश्‍मे की आस में जदयू

इस बार के विधानसभा चुनाव में जदयू खगड़िया ज़िले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से एक बार फिर तीन सीटों पर क़ब्ज़ा बरकरार रख पाएगा, ऐसा लगता नहीं है. मतदाताओं ने नीतीश को पसंद तो किया लेकिन स्थानीय विधायकों की बेरु़खी से नाराज़ मतदाताओं ने निर्वतमान विधायकों को शायद नकार दिया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार 53 प्रतिशत मतदाताओं ने  मतदान तो किया, लेकिन बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के विकास का हवाला देकर जीत की चाहत रखने वाले विधायकों को  जागरूक मतदाताओं ने लगभग सिरे से नकार दिया है. अगर खगड़िया विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो जदयू विधायक पूनम देवी यादव के पति ने माड़र गांव के मुस्लिम मतदाताओं को का़फी नाराज़ किया और लोजपा के बाग़ी उम्मीदवार मो. शहाबुद्दीन और ई. धर्मेंद्र के पक्ष में खुलकर मतदान हुआ. पूर्व विधायक बाहुबली रणवीर यादव ने एक सड़क हादसे के बाद न केवल आपा खोया बल्कि मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति को बंधक बनाकर ज़बरन रुपयों की उगाही भी की. इस तरह के तमाशों से हलकान मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में चुकती घराने को हराने की ठान ली. नतीजतन दिवंगत सांसद रामशरण यादव की पुत्रवधु सुशीला देवी के पक्ष में मतदान नहीं हुआ.

अलौली (सु.) विधानसभा क्षेत्र से रामविलास पासवान के अनुज तथा लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस का जीतना इस बार भी तय है. कारण, मुसहर बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में पारस ने राजेश कुमार सदा का टिकट कटवाकर अपने चहेते रामचंद्र सदा को टिकट दिलाया. अंतिम क्षणों में कांग्रेस ने नहले पर दहला देने की सोची, लेकिन तब तक भाकपा(माले) ने जेल में बंद अमौसी नरसंहार के मुख्य आरोपी बोढ़न सदा को टिकट देकर मुसहर समाज के वोटरों का मत बांटने की ठान ली.

हालांकि इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि पूनम देवी यादव, सुशीला देवी और धर्मेंद्र कुमार के बीच कांटे की टक्कर है.यह कहना शायद न्यायसंगत होगा कि अगर ई. धर्मेंद्र पंद्रह हज़ार से अधिक मत लाते हैं तो पूनम की स्थिति का़फी गंभीर हो जाएगी. वैसे इस बार यादव जाति के मतदाताओं के मत प्रसाद बन गए. निर्दलीय प्रत्याशी संजय यादव, धर्मेंद्र कुमार, पूनम देवी यादव और सुशीला देवी के पक्ष में अलग-अलग गांव-पंचायत के मतदाताओं ने दिलचस्पी दिखाई. नतीजतन यादव जाति के मत खिचड़ी बन गए. बहुजन समाज पार्टी के हारुण रसीद और मो. शहाबुद्दीन ने मुस्लिम मतदाताओं का मत आपस में बांट लिया. ऐसी स्थिति में यह कहना ज़रूरी है कि इस बार खगड़िया विधानसभा क्षेत्र से पूनम देवी के जीतने पर सस्पेंस बरक़रार है. अगर पूनम जीतेंगी भी तो बहुत कम अंतर से. लेकिन अगर हारती हैं तो इसके लिए खगड़िया नगर परिषद के सभी वार्ड पार्षद भी ज़िम्मेदार होंगे. पूनम के द्वारा वार्ड पार्षदों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से नाराज़ वार्ड पार्षदों ने पूनम की राहों में कांटे बिछाए हैं.

अगर रामानंद सिंह की बात की जाए तो इस बार जनता ने शायद उन्हें नकार दिया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद वह घमंड में इतने चूर हो गए कि क्षेत्र आना तो दूर, आम लोगों से मिलना जुलना भी बंद कर दिया. इस विधानसभा क्षेत्र में राजद-लोजपा प्रत्याशी राकेश कुमार उ़र्फ सम्राट चौधरी की स्थिति अच्छी दिख रही है. कांग्रेस के प्रत्याशी चौथम प्रखंड प्रमुख नरेश प्रसाद बादल ने भी सम्राट की राह आसान कर दी है. अन्य उम्मीदवार महज अपनी उपस्थिति ही दर्ज करा सके. अब बात करते हैं बेलदौर विधानसभा क्षेत्र की. यहां भी जदयू प्रत्याशी पन्ना लाल पटेल की स्थिति बेहद खराब दिख रही है. पन्ना के व्यवहार से ना़खुश मतदाताओं ने उनके विपक्ष के पक्ष में खुलकर मतदान किया. कोसी क्षेत्र के दस्यु सरगना सहेंद्र शर्मा की पत्नी और लोजपा-राजद प्रत्याशी सुनीता शर्मा के पक्ष में मतदाता गोलबंद तो दिखे, साथ ही दिवगंत सांसद रामशरण यादव के पुत्र निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार पांडव को नूर-ए-नज़ीर भी समझा. हालांकि यहां भी इन तीनों के बीच कांटे की टक्कर है. जीत चाहे किसी की भी हो लेकिन जीत का अंतर मामूली होना तय है.

अलौली (सु.) विधानसभा क्षेत्र से रामविलास पासवान के अनुज तथा लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस का जीतना इस बार भी तय है. कारण, मुसहर बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में पारस ने राजेश कुमार सदा का टिकट कटवाकर अपने चहेते रामचंद्र सदा को टिकट दिलाया. अंतिम क्षणों में कांग्रेस ने नहले पर दहला देने की सोची, लेकिन तब तक भाकपा(माले) ने जेल में बंद अमौसी नरसंहार के मुख्य आरोपी बोढ़न सदा को टिकट देकर मुसहर समाज के वोटरों का मत बांटने की ठान ली. कुल मिलाकर एक सोची समझी रणनीति के तहत राजनीतिज्ञों ने मुसहर समाज के मतदाताओं को तीन खेमों में बांटकर पारस की राह आसान कर दी. बहरहाल, खगड़िया ज़िले के चार विधानसभा क्षेत्र में से जदयू के क़ब्ज़े वाले तीन विधानसभा क्षेत्र पर जदयू का पताका लहराएगा या राजद-लोजपा का झंडा लहराएगा, यह तो 24 नवम्बर के बाद ही पता चलेगा.

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