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नवादाः महिला उम्‍मीदवारों की ललकार

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नवादा ज़िले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न दलों से आईं आधा दर्जन से अधिक महिला प्रत्याशियों ने चुनावी जंग को रोचक बना दिया है. ज़िले के नवादा, रजौली, हिसुआ, वारिसअलीगंज और गोविंदपुर आदि क्षेत्र कभी कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाने जाते थे, लेकिन पिछले दो दशकों से बिहार में उसकी स्थिति खराब हो गई. इस बार कांग्रेस ने पुन: अपने बलबूते ज़िले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारे हैं. इससे अन्य दलों की परेशानी बढ़ गई है. महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस ने तीन विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया है. नवादा विधानसभा क्षेत्र से जदयू ने पिछले चुनाव में निर्दलीय रूप से लड़कर विधायक बनी पूर्णिमा यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है. राजद-लोजपा गठबंधन की ओर से पूर्व मंत्री राजवल्लभ प्रसाद प्रत्याशी हैं, जबकि कांग्रेस ने निवेदिता सिंह को मैदान में उतारा है. विगत दो दशकों के दौरान कई उतार-चढ़ाव देख चुके नवादा विधानसभा क्षेत्र में विकास नहीं, बल्कि व्यक्ति ही चुनाव में महत्वपूर्ण रहा है. इस बार भी सुशासन के पांच वर्षों में समुचित विकास से वंचित रहे नवादा के मतदाता चुप्पी साधे हैं. हालांकि इन तीनों दलों की हार-जीत में माले और बसपा प्रत्याशियों द्वारा काटे गए वोटों की अहम भूमिका रहेगी.

भाजपा-जदयू के जातीय समीकरण में लोजपा प्रत्याशी की सेंधमारी की आशंका ने भाजपा प्रत्याशी को संकट में डाल दिया है.

सबसे मज़ेदार चुनाव हिसुआ विधानसभा क्षेत्र में है. यहां पूर्व मंत्री आदित्य सिंह की दो बहुएं आमने-सामने हैं. छोटी बहू नीतू सिंह कांग्रेस की ओर से मैदान में हैं तो दूसरी ओर बड़ी बहू आभा सिंह बाग़ी होकर विरोध में खड़ी हैं. भाजपा ने यहां से अपने विधायक अनिल सिंह को दोबारा टिकट दिया है, लेकिन उनकी परेशानी लोजपा से आए अनिल मेहता ने बढ़ा दी है. भाजपा-जदयू के जातीय समीकरण में लोजपा प्रत्याशी की सेंधमारी की आशंका ने भाजपा प्रत्याशी को संकट में डाल दिया है. रजौली सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक बनवारी राम को पार्टी ने इस बार बेटिकट कर कन्हैया रजवार को प्रत्याशी बनाया है. बनवारी राम ने राज्यसभा के चुनाव में पार्टी के खिला़फ क्रास वोटिंग की थी. कांग्रेस ने यहां से ज़िला पार्षद बसंती देवी को अपना उम्मीदवार बनाया है. बसंती देवी नवादा के एक पूर्व ज़िलाधिकारी पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाकर चर्चित रह चुकी हैं. उधर राजद-लोजपा गठबंधन ने प्रकाशवीर को अपना प्रत्याशी बनाकर लालटेन की रोशनी बढ़ाने की कोशिश की है. सबकी उम्मीदों पर पानी फेरने के लिए माले की सुदामा देवी ने कमर कस ली है. गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक कौशल यादव इस बार जदयू के प्रत्याशी हैं. जदयू ने नवादा और गोविंदपुर से कभी राजद का टिकट न मिलने पर निर्दलीय रूप से लड़े पति-पत्नी कौशल यादव और पूर्णिमा यादव को टिकट तो दे दिया है, लेकिन इनके कारनामे इनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. गोविंदपुर के पूर्व विधायक एवं मंत्री प्रो. के बी प्रसाद के राजद-लोजपा गठबंधन से उम्मीदवार बन जाने से कौशल की परेशानी बढ़ गई है.

कांग्रेस ने यहां से असद उल्ला को अपना प्रत्याशी बनाया है. हालांकि नया चेहरा होने के कारण उन्हें थोड़ी दिक्कत हो रही है. वारिसअलीगंज विधानसभा क्षेत्र से भी कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक अरुणा देवी को उतारा है. अपने बाहुबली पति अखिलेश सिंह की बदौलत निर्दलीय विधायक रह चुकी अरुणा देवी को इस बार लाभ मिलने की संभावना है. जदयू ने भी यहां से निर्दलीय विधायक प्रदीप कुमार को प्रत्याशी बनाया है. इन दोनों के बीच लोजपा प्रत्याशी अंजनी कुमार सिंह राजद-लोजपा गठबंधन के जातीय समीकरण के मतों को अपने पक्ष में मज़बूती के साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं. विकास के इस दौर में भी पिछड़ेपन का पर्याय बने नवादा जिले का यह दुर्भाग्य रहा है कि अब तक के जनप्रतिनिधि स़िर्फ उसके पिछड़ेपन और जातीय भावनाओं को भुनाकर वोट हासिल करते रहे, लेकिन इस बार मतदाताओं का मिजाज़ कुछ अलग तरह के संकेत दे रहा है.

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