बॉडी स्कैनर या आतंकवादी हमला

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जब आप विमान यात्रा करते हैं तो आप और बाक़ी यात्रियों पर आतंकवादी हमला होने का ख़तरा कितना होता है? एक अनुमान के अनुसार इसकी आशंका 3 करोड़ में 1 होती है, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इतनी ही आशंका बॉडी स्कैनर से निकलने वाले रेडिएशन से भी होती है. इन दोनों में समानता इसलिए बताई जा रही है, क्योंकि विमान यात्रा में आजकल आतंकवाद और स्कैनर दोनों से ही जानलेवा ख़तरा रहता है. पहले तो हम आपको यही बताते हैं कि फुल बॉडी स्कैनर आख़िर होता क्या है? दरअसल पश्चिमी देशों के हवाई अड्डों पर अब इस तरह के बॉडी स्कैनर लगाए गए हैं, जो यात्री के पूरे शरीर की जांच करते हैं. इन स्कैनरों का दो स्तरों पर व्यापक विरोध हो रहा है. कुछ खास तबके, जैसे मुस्लिम इस स्कैनर का इसलिए विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे यात्रियों की नग्न छवियां जांच अधिकारियों को दिखती हैं. दूसरी ओर वैज्ञानिकों का एक वर्ग इस स्कैनर का इसलिए विरोध कर रहा है, क्योंकि इससे निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर होने का ख़तरा है.

एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के पीटर रेज़ के अनुसार, फुल बॉडी स्कैनर को हवाई अड्डों पर इसलिए लगाया गया है, ताकि आतंकवादी हमलों पर काबू पाया जा सके, लेकिन इस तरह के स्कैनर से उत्सर्जित रेडिएशन से भी इंसान को ख़तरा ही होता है. आम तौर पर इस तरह के स्कैनर बनाने वाली कंपनियां दावा करती हैं कि इनसे उत्सर्जित होने वाले रेडिएशन की मात्रा काफी कम होती है और उनसे इंसान के शरीर को अधिक नुक़सान नहीं पहुंचता, परंतु यदि मशीन में जरा सी भी ख़राबी आ जाए तो नतीजे घातक हो सकते हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर से टकरा कर फैल जाने वाले रेडिएशन से चाहे ख़तरा न हो, परंतु चमड़ी पर इसका असर पड़ सकता है. हमारी चमड़ी रेडिएशन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है और इससे चमड़ी के कैंसर की आशंका ब़ढ जाती है. हालांकि इस बारे में अभी और अधिक जांच की आवश्यकता है, लेकिन तब तक आप क्या करेंगे?

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