दिल्ली का बाबू : गृह मंत्रालय सकते में

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कॉरपोरेट घरानों को अवैध रूप से सूचनाएं देने के आरोप में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रवि इंदर की पहले गिरफ्तारी और फिर निलंबन ने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं. आंतरिक सुरक्षा वैसे ही गृह मंत्रालय की नीतियों के केंद्र में होती है. रवि इंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद सेक्स और पैसे के प्रति उनके लालच को सुर्खियां मिलीं, लेकिन मंत्रालय इसलिए ज्यादा चिंतित है, क्योंकि सिंह तीसरे ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें एक साल के अंदर इस तरह की कारगुजारियों के लिए गिरफ्तार किया गया है या छापे मारे गए हैं. साल की शुरुआत में अप्रैल महीने में संयुक्त सचिव-डिजास्टर मैनेजमेंट ओ रवि को रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद आर एस शर्मा भी ऐसे ही आरोपों के चलते जांच एजेंसियों के घेरे में आए थे. लेकिन रवि इंदर सिंह के मामले को जिस तरह सुर्खियां मिलीं, उससे मंत्रालय के अधिकारी सकते में हैं. सूत्रों के मुताबिक, खुद गृह सचिव जी के पिल्लई ने सिंह के फोन टेप किए जाने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी हुई. अपनी साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले पिल्लई और गृहमंत्री पी चिदंबरम भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसने के लिए कृतसंकल्प हैं. आने वाले समय में गृह मंत्रालय शीर्ष पदों पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के पिछले रिकॉर्ड की ज्यादा कड़ाई से जांच-पड़ताल कर सकता है. रवि इंदर सिंह मामले पर मचे शोरगुल का यह एक अच्छा परिणाम हो सकता है.

नौकरशाह भी नपेंगे

जब कभी घोटालों की बात होती है तो अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या इसमें शामिल नौकरशाहों को भी बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाना चाहिए? ऐसे उदाहरण बार-बार देखने को मिले हैं, जब नौकरशाह तो बच निकलते हैं, लेकिन उनके राजनीतिक आकाओं की बलि चढ़ जाती है. मुंबई हमले के बाद भी राजनीतिज्ञों को ही अपना पद छोड़ना पड़ा था, जबकि गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारी अपना काम पहले की तरह ही करते रहे. लेकिन आरोपों और घोटालों के इस मौसम में हालात में कुछ बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. जब सारे देश में स्पेक्ट्रम घोटाला, हाउसिंग लोन घोटाला, राष्ट्रमंडल खेल घोटाला और अन्य बड़े घोटालों को लेकर कोहराम मचा है तो नौकरशाह भी इसकी तपिश महसूस कर रहे हैं. इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने की, जब उन्होंने आदर्श घोटाले में शामिल अधिकारियों को निशाने पर लिया और अब सीबीआई भी राष्ट्रमंडल खेल एवं हाउसिंग लोन घोटाले में शामिल दागी अधिकारियों के पीछे पड़ गई है. हालांकि सत्ता के गलियारों से भ्रष्टाचार खत्म करने की इस मुहिम के पीछे असली वजह जनता का डर है और उसका विश्वास भी दोबारा हासिल करना है, लेकिन सरकार यदि अपने रुख पर कायम रहे तो देश में नौकरशाही के काम करने का तरीका बदल सकता है.

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