हम बनाएंगे विश्‍वास का भवन: दामोदर

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दामोदर रावत यानी नीतीश मंत्रिमंडल का ऐसा चेहरा, जिसने अपने काम से नीतीश कुमार और सूबे की जनता का भरोसा जीता. हर किसी से दिल खोलकर मिलने वाले दामोदर रावत पिछड़े ज़मुई ज़िले के झाझा विधानसभा का प्रतिनिधत्व करते हैं. सादगी ऐसी कि भवन निर्माण मंत्री बनने के बावजूद किसी बड़े बंगले में जाने के बजाए अपने पुराने आवास में ही रहने का फैसला किया. जनादेश के संदेश से चार्ज दामोदर रावत पूरे सूबे में खूबसूरत भवनों का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि लोगों को न स़िर्फ आशियाना मिले बल्कि उनके दिल को सुकून भी मिले. तय समय पर काम व गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं. इन दो सूत्रों पर मंत्री जी अपने टास्क को अंजाम देने में जुट गए हैं. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के खास अंश-

Ø  जनादेश से लगता है कि सूबे में एक खामोश सामाजिक क्रांति हुई है. विपक्ष इसे क्यों महसूस नहीं कर पाया?

देखिए, नीतीश कुमार ने अपने कामों से ऐसे लोगों का भरोसा जीता जिन्हें आज तक दूसरे दलों ने ठगने का काम किया था. महादलितों के लिए जो कल्याणकारी काम किए गए, उससे उन लोगों को लगा कि नीतीश कुमार ही उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ सकते हैं. महिलाओं को आरक्षण व लड़कियों को साइकिल आदि ऐसी अनेक योजनाएं ज़मीन पर उतरीं, जो आज़ादी के बाद सेकेवल भाषणों में ही झलकती थीं. सूबे की जनता को लगा कि नीतीश कुमार स़िर्फ कहते नहीं बल्कि करके भी दिखाते हैं. इसका पूरा मेहनताना लोगों ने दिया और विपक्ष देखता रह गया. कांग्रेस, राजद व लोजपा के नेताओं ने लोगों को स़िर्फ सपने दिखाए, पर नीतीश सरकार ने लोगों के सपनों को साकार किया.

Ø  पिछली सरकार में भी आप मंत्री थे और इस बार फिर आपको भवन निर्माण विभाग की बड़ी ज़िम्मेदारी दी गई है.  इसे कितना बड़ा काम मानते हैं.

यह जनता का काम है. कोई छोटा या बड़ा नहीं होता. पिछले कार्यकाल में भी मैंने ऐसी बहुत सारी योजनाओं को ज़मीन पर उतारा था. बाद में केंद्र सरकार ने भी उनका अनुसरण किया. उदाहरण के तौर पर निशक्ता पेंशन योजना व लक्ष्मीबाई योजना का नाम लिया जा सकता है. समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों का कल्याण हो, बस इसी मक़सद से पिछले कार्यकाल में लगा रहा और मुझे खुशी है कि जनता ने मेरे काम को पसंद किया. जहां तक नई ज़िम्मेदारी का सवाल है तो मैं काम को बोझ की तरह नहीं लेता, बल्कि इसे नेता का आदेश और जनता का क़र्ज़ समझ कर हर चुनौती को यथाशक्ति पूरा करने का प्रयास करता हूं. नए विभाग में भी पूरी कोशिश करूंगा कि अपने नेता नीतीश कुमार व जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरूं.

Ø  पदभार ग्रहण करने के बाद से ही आप लगातार विभाग की समीक्षा कर रहे हैं. प्राथमिकताएं  क्या हैं?

समय पर काम और गुणवत्ता का पूरा ख्याल, यही मेरा और मेरे विभाग का मूलमंत्र है. काम को लटकाने वाली संस्कृति नहीं चलेगी. समय पर काम पूरा होगा तो लागत में इज़ा़फा नहीं होगा. इसके साथ ही साथ विभाग के सारे लोगों को कह दिया गया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा. मैं खुद ज़िलों में जाकर कामों की समीक्षा करूंगा, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके. काम न करने वाले और ग़लत काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारी दंडित होंगे. समय पर अच्छा काम करने वाले अधिकारी व कर्मचारी पुरस्कार पाएंगे. मक़सद केवल इतना है कि जनता ने जो काम सौंपा है वह हर हाल में पूरा हो और अच्छी तरीक़े से पूरा हो.

Ø  पिछले दिनों नक्सलियों ने आपको मारने की साज़िश रची थी. इससे कहीं आप का काम तो प्रभावित  नहीं होगा?

Øआप जानते ही हैं कि मैंने शुरू से ही समाज के सबसे निचले तबके के लिए काम किया है. दबे कुचलों की सेवा तथा उनके जीवन स्तर में सुधार हमारा संकल्प रहा है. इसलिए नक्सलियों से डरने की कोई बात नहीं है. सूबे में विकास का महापर्व शुरू हो चुका है. हर किसी की ज़िम्मेदारी है कि वह एक विकसित बिहार के लिए इस महापर्व में शामिल हो.

Ø  आप विपक्ष की राजनीति भी कर चुके हैं और अब सरकार में शामिल हैं, अब तक के राजनीतिक स़फर से आप कितना संतुष्ट हैं.

जनता की सेवा के लिए राजनीति में आए हैं तो संतुष्ट होने का सवाल कहां पैदा होता है. जब तक समाज के सबसे निचले तबके के आदमी के घरों में विकास का दीपक नहीं जल जाता तब तक संतुष्टि नहीं मिलेगी. अभी तो दिन रात काम करके जनता की कसौटी पर खरा उतरने का समय है. ग़रीबों के लिए लगातार काम करते रहना है. जनता का आशीर्वाद मिलता है तो लगता है दिन सफल हो गया.

अपने ज़िले के लिए आपने क्या सोचा है, किसी खास रोडमैप पर काम कर रहे हैं?

ज़िले की बात नहीं है, हम तो पूरे बिहार के बारे में सोच रहे हैं. हां इतना ज़रूर है कि जिस जमुई ज़िले से मैं चुनकर आता हूं, वह का़फी पिछड़ा है और वहां का जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरा खास दायित्व बनता है कि वहां के लिए कुछ खास हो. ज़िले में सिंचाई व्यवस्था को सुधारने करने की ज़रूरत है. रोज़गार के अवसर बढ़ाने पर विचार होगा. इसके अलावा बीड़ी मज़दूरों का जीवन स्तर बेहतर हो सके, इस दिशा में भी ठोस क़दम उठाए जाएंगे. सिमुलतला में बेहतरीन स्कूल भवन के निर्माण को मैंने अपने सपनों के प्रोजक्ट के रूप में लिया है. मुझे पूरा यक़ीन है कि यह स्कूल बिहार की एक खास पहचान बनेगा.

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