भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान उसके खिला़फ जंग के लिए किसी भी व़क्त तैयार है. वह भारत विरोधी आतंकी संगठनों को बढ़ावा देता है, देश में अशांति फैलाने के लिए हर तरह की मदद उपलब्ध कराता है. यह बात तो हर भारतीय जानता है तो फिर इसमें नया क्या है. संवेदनशील दस्तावेजों को प्रकाशित करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स द्वारा लीक किए गए दस्तावेजों में यदि कुछ नया है तो वह यह कि यह बात अमेरिका भी अच्छी तरह जानता है. हालांकि अमेरिका अब तक इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने से बचता रहा है, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के जो दस्तावेज विकीलीक्स ने लीक किए हैं, उससे यह बात स्पष्ट हो जाती है. साथ ही यह बात भी खुलकर सामने आती है कि आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का एक अहम अंग है, जिसके ज़रिये वह अमेरिका और भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है. वह वॉर अगेंस्ट टेरर के नाम पर अमेरिका से आर्थिक सहायता के रूप में बड़ी रकम तो लेता है, लेकिन अ़फग़ानिस्तान में अपने सैनिकों को तैनात नहीं करता, क्योंकि वह भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से अपने सैनिकों को हटा नहीं सकता. सबसे चिंताजनक बात तो यह है कि भारत विरोधी आतंकी संगठनों को मदद देने के काम में पाक सेना और आईएसआई के अधिकारी खुले तौर पर शामिल हैं. सेना पर किसी का नियंत्रण नहीं है. देश में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार मौजूद है, लेकिन सारे फैसले सेना ही लेती है. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी कितने शक्तिहीन हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह हर पल सेना द्वारा अपनी हत्या कर दिए जाने के खौ़फ में जी रहे हैं. हत्या की हालत में वह अपनी बहन को उत्तराधिकारी घोषित करने की तैयारी भी कर चुके हैं. प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए सैन्य तंत्र के पिछलग्गू बनकर रह गए हैं. पाकिस्तान में कमज़ोर पड़ चुकी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ में देश के राजनीतिक नेतृत्व का भ्रष्टाचार और सत्तालोलुपता है, लेकिन सबसे ज़्यादा चिंता की बात पाकिस्तान के पास परमाणु बमों का होना है. विकीलीक्स के खुलासों के मुताबिक़, एटमी हथियार जमा करने के मामले में पाकिस्तान सबसे तेज़ है, लेकिन सेना और आतंकी संगठनों के बीच घालमेल के चलते इन हथियारों का बेजा इस्तेमाल होने का खतरा भी हर समय मंडरा रहा है. भारत के लिए चिंता की बात इसलिए ज्यादा है, क्योंकि पाकिस्तान की सारी तैयारी भारत को ही केंद्र में रखकर होती है. उसकी कूटनीति, विदेश नीति एवं सैन्य नीति, सबके केंद्र में भारत ही है. भारत से डर का हौव्वा खड़ाकर वह दूसरे देशों से मदद हासिल करता है और फिर उसका इस्तेमाल आतंकी संगठनों को प्रोत्साहित करने के लिए करता है. पाकिस्तान जानता है कि भारत उसके खिला़फ युद्ध से बचता है, इसलिए नहीं कि वह कमज़ोर है, बल्कि इसलिए कि एक ज़िम्मेदार लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के नाते भारत वैश्विक परिदृश्य पर पड़ने वाले असर को लेकर फिक्रमंद है. पाकिस्तान ऐसी चिंताओं से मुक्त है, क्योंकि पाक नेतृत्व भारत के नाम का सहारा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर समर्थन जुटाने में कामयाब होता है. ये तमाम बातें भारत जानता है और समय-समय पर पूरी दुनिया को इस बारे में बताता भी रहा है. विकीलीक्स के खुलासों ने भारत के दावों की पुष्टि कर दी है. सच्चाई यह है कि विकीलीक्स द्वारा लीक किए दस्तावेजों से पाकिस्तान की जो सच्चाई सामने आई है, वह भारत के लिए तो चिंता का विषय है ही, पूरी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है.
पाकिस्तान की खराब आंतरिक हालत पूरी दुनिया के लिए खतरे का संकेत है. विकीलिक्स के खुलासों से यह बात और भी ज्यादा स्पष्ट हो चुकी है कि पाकिस्तान में कानून का शासन नहीं है. कार्यपालिका और व्यवस्थापिका से लेकर देश की सेना में भी धार्मिक कटटरवादी ताकतों का वर्चस्व है और वे आतंकी संगठनों के साथ मिली हुई है. ये ताकतें भारत के खिलाफ हर समय मोर्चा खोलने को तैयार बैठी हैं. भारत के लिए तो यह चिंता की बात है ही, पूरी दुनिया को इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है, वरना विश्व शांति पर बुरा असर पड़ सकता है.
विकीलीक्स के दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान अमेरिका की बात भी नहीं मानता. वह आर्थिक मदद के लिए उसके आगे हाथ फैलाने में शर्म महसूस नहीं करता, लेकिन आतंकी संगठनों को मदद न पहुंचाने की बात पर नाक-भौं सिकोड़ने लगता है. खुद अमेरिकी अधिकारी भी इस बात को जानते हैं कि पाकिस्तान चार बड़े आतंकी संगठनों को मदद उपलब्ध कराता है. इनमें अ़फग़ानिस्तान में तालिबान, पश्चिमी अ़फग़ानिस्तान में तालिबान के सहयोगी हक्कानी और हिकमतयार का नेटवर्क तथा मुंबई हमलों में शामिल रही लश्करे तैयबा आदि हैं. अमेरिकी अधिकारी इस बात से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के कई शीर्ष अधिकारी इन संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं, लेकिन वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते. विकीलीक्स के दस्तावेजों के मुताबिक़, सितंबर 2009 में पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत एन पीटरसन ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान के लिए अमेरिकी रणनीति पर विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में बढ़ोत्तरी के बाद भी इस बात की उम्मीद नहीं है कि वह इन आतंकवादी संगठनों के प्रति अपनी नीति में बदलाव करेगा. इन दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि अमेरिका यह जानता है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के प्रति अपनी नीति में कभी बदलाव नहीं करेगा. अमेरिकी अधिकारियों को इस बात की आशंका भी है कि पाकिस्तानी प्रशासनिक तंत्र में ऐसे लोग हैं, जो तस्करी के ज़रिये परमाणु हथियारों की सामग्री जुटा सकते हैं. परमाणु हथियारों की तस्करी और उन तक आतंकी तत्वों की पहुंच ऐसे मुद्दे हैं, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को प्रभावित कर सकते हैं. 26-11 को मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान इस बात से डरा हुआ था कि भारत कहीं जवाबी कार्रवाई न करे. राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि यदि ऐसा हुआ तो पाकिस्तान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा. लेकिन विकीलीक्स के खुलासों के मुताबिक़, पाक सेना ज़रदारी के बयान के प्रति गंभीर नहीं थी और परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार बैठी थी. जब देश की सत्ता पर शासन तंत्र की पकड़ इतनी कमज़ोर हो तो स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है.
लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के नाते भारत वैश्विक परिदृश्य पर पड़ने वाले असर को लेकर फिक्रमंद है. पाकिस्तान ऐसी चिंताओं से मुक्त है, क्योंकि पाक नेतृत्व भारत के नाम का सहारा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर समर्थन जुटाने में कामयाब होता है. ये तमाम बातें भारत जानता है और समय-समय पर पूरी दुनिया को इस बारे में बताता भी रहा है.
भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा भले कहें कि वह इन खुलासों को कोई खास तवज्ज़ो नहीं देते, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत चाहकर भी इस खतरे की अनदेखी नहीं कर सकता. खासकर, भारत से संबंधित अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े जो दस्तावेज हैं, उन पर हमारे कूटनीतिक विशेषज्ञों को गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है. न ही विश्व समुदाय इन खुलासों के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने का ज़ो़ खिम ले सकता है. शायद वह समय आ चुका है, जब पाकिस्तान पर नकेल कसने के लिए वैश्विक समुदाय एकमत होकर आगे आए. अमेरिका को भी यह समझना होगा कि आर्थिक प्रलोभनों के सहारे पाकिस्तान को पुचकारने की उसकी नीति कारगर नहीं हो सकती. विश्व शांति को बनाए रखने के लिए अब कड़े क़दम उठाने ही होंगे.
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विकिलीक्स ने भारत के सत्ताधीशों के विदेशी बैंकों में जमा काले धन के अम्बारों के बारे में जो खुलासे किये हैं , उनके बारे में भी कुछ अपने पाठकों को बताने की कृपा करेंगे क्या ?