भागीरथी में कम होता जल प्रवाह

देवभूमि हरिद्वार में गंगा का अभी से बुरा हाल हो गया है. गंगा की अविछिन्न आपूर्ति धारा में गंगाजल का प्रवाह न होने से धर्म नगरी में श्रद्धालुओं द्वारा बनाए गये दर्जन भर से अधिक घाट अभी से जलविहीन हो गये है. जिससे हरिद्वार के श्मशान घाट पर भी जल का प्रवाह नही हो रहा है, इससे नाराज़ हरिद्वार के संतों ने अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए गंगा के भागीरथ बिंदू पर धरना दिया. धरना देने वाले दर्जन भर से अधिक कद्दावर संतों ने सरकार एवं प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि पंद्रह दिन के भीतर गंगा तट की स़फाई करा कर घाटों पर जल नहीं पहुंचाया गया तो संत समाज गंगा की अविरलता के लिए कार सेवा कर मलबा हटा कर घाटों की रौनक लौटाएंगे.

गंगा की दुर्दशा पर साधु समाज के प्रदेश अध्यक्ष जयराम संस्थाओं के संस्थाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने प्रशासन एवं सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं को अविरल गंगा जल उपलब्ध कराने की मांग की, इस अवसर पर धरना स्थल पर गंगा की दुर्दशा के लिए रामानंदाचार्य स्वामी हंस देवाचार्य जी महाराज ने ज़िला प्रशासन को जम कर कोसा और कहा कि हरिद्वार में प्रतिष्ठीत घाटों पर गंगा जल की उपलब्धता न होने के कारण जन आस्था के चर्चित घाट दुर्दशा पूर्ण स्थिति को प्राप्त कर गए है, जिसके लिए ज़िला प्रशासन की भूमिका निंदनीय है. धरना कार्यक्रम के संयोजक पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने निशंक सरकार के शहरी विकासमंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मंत्री की ग़लत नीतियों के चलते अफसर शाही हरिद्वार में गंगा के स़फाई के नाम पर छल कर रहे है. इस अवसर पर चर्चित संत हठयोगी बाबा ने गंगा की अविरलता एंव पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अपना हर योगदान देने की बात कही. हरिद्वार स्थित समभाव आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी प्रेमानंद महाराज ने गंगा की हरिद्वार में इस कदर हो रही दुर्दशा पर गहरी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि भागीरथ बिंदु से जल का प्रवाह न रहने से हरिद्वार में गंगा का स्वरूप ही नही दिखाई दे रहा है. गंगा की बेकदरी और दुर्दशा पर परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष पूर्व गृहराज्य मंत्री  चिन्मयानंद ने गहरी चिंता व्यक्त कर गंगा की अविरलता के प्रति अपनी प्रतिवद्धता को दुहराया. धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अखाड़ा परिषद, भारत साधु समाज, और संत समिति के लोगों ने धरना दिया.