लिट्टी-चोखा और मुर्गा-दारू का दौर शुरू

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अक्सर ज़िले में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ती जा रही है. विभिन्न पदों के दावेदार अपनी रणनीति को अंजाम देने के लिए कई तरह के हथकंडे भी आज़मा रहे हैं. बेशक़ इस बार चुनाव में प्रत्याशियों की भारी भीड़ होगी, क्योकि पंचायत में होने वाली अकूत कमाई ने दर्जनों लोगों को चुनाव लड़ने की भूख जगाई है. बक्सर ज़िले में ज़िला परिषद और ग्राम पंचायतों की 142 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर अभी से ही तैयारी शुरू कर दी गई है. कई लोगों को विधानसभा का टिकट नहीं मिला और निर्दलीय लड़कर चुनाव हार गए. अब ये लोग ज़िला परिषद की राजनीति में अपना भविष्य टटोल रहे हैं. इन्होंने जनसंपर्क के अभियान भी शुरू कर दिए हैं. पंचायतों में मुखियों का रुतबा तथा कमाई देख अनेक लोग इस बार ताल ठोक रहे हैं. लेकिन  किसी में भी सरपंच पद के लिए खास दिलचस्पी नहीं दिख रही है.

शहर से लेकर गांव तक चुनावी सरगर्मी जोड़-तोड़ में कोई कम नहीं है. अभिनंदन के सहारे अरक पंचायत से मुखिया पद के दावेदार भरत भूषण सिंह फरमाते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन उन्हें ज़रूर मिलेगा. चक्की से ज़िला परिषद के दावेदार संतोष सिंह कहना है कि प्रतिनिधि को विकास की चिंता नहीं है.

चुनाव की तैयारी में लगे लोग सुबह से शाम तक एक दूसरे की खामियां बता कर अपनी उम्मीदवारी पर हामी भरवा रहे हैं. कुछ धन कुबेर अभी से ही धन बल के सहारे भोज संस्कृति में ज़्यादा विश्वास रखते हैं. मसलन लिट्टी-चोखा से लेकर खीर-पूड़ी तथा मुर्गा-दारू का दौर शुरू हो गया है. भोज के साथ नृत्य संगीत का आयोजन कर वाहवाही लूटी जा रही है. जब दारू-मुर्गा के भोज के बाद नशा चढ़ता है, तो ज़िंदाबाद का नारा भी गुंजायमान हो जाता है. कुछ लोग युवाओं को बुलाने के लिए क्रिकेट मैच का आयोजन कराकर बाक़ायदा मुख्य अतिथि बन जाते हैं. नवनिर्वाचित विधायकों के अभिनंदन समारोह के बहाने भी मधुर रिश्तों की आड़ में सहानुभूति पाने की कवायद कर रहे हैं. शहर से लेकर गांव तक चुनावी सरगर्मी जोड़-तोड़ में कोई कम नहीं है. अभिनंदन के सहारे अरक पंचायत से मुखिया पद के दावेदार भरत भूषण सिंह फरमाते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन ज़रूर मिलेगा. चक्की से ज़िला परिषद के दावेदार संतोष सिंह कहना है कि प्रतिनिधि को विकास की चिंता नहीं है. मैं जनता के साथ हूं. वहीं ज़िला परिषद सदस्य पन्ना देवी कम फंड मिलने की शिकायत करते हुए कहती हैं कि जनता के सुख-दुख में शामिल होने का लाभ मिलेगा. मसर्हियां पंचायत में विनोद ओझा तथा हरनपुर पंचायत के मुखिया पद के दावेदार बच्चा लाल पासवान कहते हैं कि मुखिया ने अपना विकास किया. गायघाट पंचायत में मुखिया के चनाव की तैयारी में लगे. ब्रह्मपुर के प्रमुख रामबाबू चौधरी नौकरशाही का रोना रोते हैं. चुनाव से पूर्व सरकार द्वारा दिया गया डीजल अनुदान तथा सूखा राहत समर्थन तथा विरोध का मोहरा बन गया है. सूखा राहत अधिकारियों की मनमानी से चुनावी रंग में गणित को भी ग़डबड़ा दिया है. वैसे डीजल अनुदान के बहाने मुखिया वोट बैंक को भी पुख्ता कर रहे हैं. राहत से परेशान बगेन पंचायत के मुखिया चंद्रशेखर सिंह कहते हैं कि सीओ की मनमानी से जनता में आक्रोश है. इसी मुद्दे पर मिलने गए दलित मुखिया राजाधारी राम से सीओ ने दुर्व्यवहार किया. चुनावी वर्ष में सरकार का राहत का फंडा राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर रहा है. किसी के लिए वरदान तो किसी के लिए अभिशाप साबित हो रहा है. खास बात यह है कि चुनावी अभियान में भावी प्रत्याषी मुखिया द्वारा की गयी लूट-खसोट, एपीएल तथा बीपीएल में धांधली, वृद्धावस्था पेंशन तथा विकास योजनाओं में हेराफेरी का आरोप लगाकर उनकी कलई खोलने में व्यस्त हैं.

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