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विधायकों की बल्‍ले-बल्‍ले

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फंड खत्म करने को लेकर विधायकों के दिलों में जो मलाल था, वह अब बहुत जल्द दूर होने वाला है. नए साल के तोह़फे के तौर पर सरकार विधायकों के वेतन को लगभग दोगुना करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही विधायकों को मिलने वाले रेल कूपन एवं हवाई यात्रा के लिए मिलने वाली राशि में भी इज़ा़फा किया जा रहा है. मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के वेतन में भी ठीकठाक बढ़ोत्तरी होगी. संसदीय कार्यमंत्री विजेंद्र यादव का कहना है कि इसी वित्तीय वर्ष में विधायकों का वेतन बढ़ाने पर विचार हो सकता है. सरकार की इस कवायद से विधायकों के चेहरे खिल गए हैं. उन्हें लग रहा है कि सरकार बेहद संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विधायकों के ज़ख्मों पर मरहम लगा रही है.

सरकार को शायद विधायकों के दर्द का एहसास हो गया, इसलिए उनके वेतन-भत्ते बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है. सवाल है कि यह बढ़ोत्तरी कितनी की जाए, वैसे एक सच्चाई यह भी है कि अगर भत्तों एवं सुविधाओं को छोड़ दिया जाए तो उन्हें मिलने वाला वेतन छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के वेतन से भी कम है.

दरअसल का़फी मशक्कत के बाद अक्टूबर 2006 में बिहार विधानमंडल के सदस्यों के वेतन एवं भत्ता बढ़ाया गया था, लेकिन सरकार का यह कदम उस समय भी कई विधायकों को खुश नहीं कर पाया था. उस दौरान बढ़ती हुई महंगाई एवं राजनीति के बदलते स्टाइल ने विधायकों के खर्चों को काफी बढ़ा दिया. करीब-करीब सभी विधायकों के मिलने-जुलने का दायरा बढ़ा और उनके सामाजिक सरोकारों ने उनकी जेबों को खाली कर दिया. नीतीश कुमार की जनता दरबार की परंपरा का अनुसरण विधायकों ने भी किया. क्षेत्र में लगाए जाने वाले जनता दरबार ने भले ही उन्हें राजनीतिक लाभ दिया, पर उनके मासिक बजट को बिगाड़ दिया. सा़फ शब्दों में कहा जाए तो नीतीश के कार्यकाल में लोगों की जनप्रतिनिधियों से अपेक्षाएं काफी बढ़ीं और उन्हें पूरा करते-करते विधायक जी की जेब खाली होती गई. इसके बाद जब नीतीश कुमार ने विधायक फंड खत्म करने का फैसला किया तो लगा कि विधायकों पर दोहरी मार पड़ गई. इतने बड़े जनादेश के बाद कोई विधायक अपनी जनता से दूर कैसे रह सकता है. यही वजह थी कि कुछ विधायकों ने खुलकर तो कुछ ने पर्दे के पीछे से अपनी नाराज़गी जताई. देखा जाए तो एक सच्चाई यह भी है कि अगर भत्तों एवं सुविधाओं को छोड़ दिया जाए तो उन्हें मिलने वाला वेतन छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के बाद चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के वेतन से भी कम है.

सरकार को भी विधायकों के दर्द का एहसास हुआ, इसलिए उनके वेतन-भत्ते बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है. अब यह विचार हो रहा है कि यह बढ़ोत्तरी कितनी की जाए, ताकि किसी को कोई गिला शिकवा न रहे. एक सोच यह बन रही है कि वेतन इतना न बढ़ा दिया जाए कि वह आयकर के दायरे में आ जाए. जबकि नीति निर्धारकों का एक तबका मानता है कि बगल के राज्य झारखंड के विधायकों या फिर सांसदों को मिलने वाले वेतन-भत्तों को देखा जाए तो फिलहाल बिहार के विधायकों का वेतन-भत्ता कहीं नहीं ठहरता. इसलिए इस बार बढ़ोत्तरी ऐसी हो, जो सम्मानजनक लगे. पूर्व विधान पार्षद पी के सिन्हा की राय है कि इस मामले में केंद्रीय फॉर्मूले का अनुसरण किया जाए. वैसे मोटे तौर पर जो सहमति बन रही है, वह यह है कि विधायकों का वर्तमान वेतन आठ हज़ार से बढ़ाकर दोगुना यानी 16 हज़ार कर दिया जाए. विधायकों को मिलने वाले क्षेत्रीय भत्ते को दस हज़ार से बढ़ाकर 24 हज़ार करने का विचार है. इसी तरह अभी स्टाफ के लिए दस हज़ार मिल रहे हैं, जिसे अब 15 हज़ार करने का विचार है, जिसमें ड्राइवर, सेवक और पीए शामिल होगा. रेल कूपन के लिए 75 हज़ार की जगह एक लाख, हवाई स़फर के लिए भी 75 हज़ार की जगह एक लाख मिलेंगे. फोन के लिए एक की जगह डेढ़ लाख मिल सकते हैं.

उपस्कर में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी की जा रही है. 25 हज़ार की जगह इसे एक लाख करने का विचार है. यह किसी माननीय सदस्य को एक टर्म में एक बार ही दिया जाता है. विधायकों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं में भी का़फी इज़ा़फा किया जा रहा है. राज्य से बाहर अगर इलाज की ज़रूरत पड़ी तो अब विधायकों की जेब पर ज़्यादा बोझ नहीं पड़ेगा. इसी अनुपात में मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के वेतन, भत्तों एवं अन्य सुविधाओं को बढ़ाने की कवायद की जा रही है. पेंशन के मामले में भी लाभ मिलने की संभावना है. मुख्यमंत्री का वेतन फिलहाल 15 हज़ार और मंत्रियों का 14,500 है. राज्यमंत्री को 14 हज़ार एवं उपमंत्री को प्रतिमाह 13,500 रुपये मिलते हैं.

मंत्रियों को महिला अंगरक्षक!

भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या के बाद मंत्रियों के घरों पर महिला अंगरक्षक तैनात करने की चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी है. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि मंत्रियों के घरों पर का़फी संख्या में महिलाएं भी उनसे अपने काम के संबंध में मिलने आती हैं. देखने में यह आता है कि महिलाओं को बिना किसी जांच के ही अंदर प्रवेश दे दिया जाता है, लेकिन रूपम पाठक प्रकरण के बाद एहतियात के तौर पर मंत्रियों के निवास पर महिला अंगरक्षक की तैनाती की जरूरत महसूस की जा रही है. कला संस्कृति एवं युवा मामले की मंत्री सुखदा पांडेय मानती हैं कि कम से कम महिला मंत्रियों को तो ज़रूर महिला अंगरक्षक मिलनी चाहिए, क्योंकि उनके यहां महिला फरियादियों की संख्या का़फी होती है. जबकि पर्यटन मंत्री सुनील कुमार उ़र्फ पिंटू मानते हैं कि महिला अंगरक्षक की तैनाती में बहुत सारी व्यवहारिक दिक्कतें हैं. खासकर समय और पटना से बाहर दौरे के वक़्त. हालांकि वह मानते हैं कि पटना आवास पर मिलने वाले समय पर गेट पर महिला गार्डों की तैनाती होने से सुरक्षा का पहलू ज़रूर मज़बूत होगा. कुछ मंत्रियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इससे बिना वजह का झमेला खड़ा हो जाएगा. एक मंत्री ने तो दार्शनिक अंदाज़ में कहा कि जीना और मरना तो भगवान के हाथ में है, इसमें इंसान चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता. इंदिरा जी तो इतनी ज़बरदस्त सुरक्षा में रहती थीं, पर उन्हें उनके अंगरक्षकों ने ही मार डाला. मगर सवाल यह भी है कि बिना सुरक्षा जांच के अगर मंत्री फरियादियों से मिलते रहे और कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा.

क्या मिलेगा विधायकों को

मद                                          वर्तमान                                           ब़ढने के बाद (अनुमानित)

वेतन                                       8 हज़ार                                           16 हजार

क्षेत्रीय भत्ता                              10 हज़ार                                         24 हजार

स्टेशनरी                                 4 हज़ार                                            8 हजार

बैठक में आने-जाने के लिए       500                                                एक हजार

बिजली                                    2000 यूनिट                                   2500 यूनिट

फोन                                        एक लाख                                          एक लाख 50 हजार

यात्रा रेल कूपन                         75 हज़ार (एक के साथ)                    एक लाख (दो के साथ)

यात्रा हवाई जहाज                    75 हज़ार (पति,पत्नी और बच्चा)       एक लाख (पति, पत्नी और बच्चा)

राज्य से बाहर जाने पर             एक हज़ार                                         दो हजार

स्टाफ के लिए                          10 हज़ार                                         15 हजार (ड्राईवर, रोवक एवं पीए)

उपस्कर                                  25000                                           100000

माह में दो बार क्षेत्र आने जाने का खर्च 10 रुपये किलोमीटर की दर से

माह में तीन बार क्षेत्र आने जाने का खर्च 10 रुपये किलोमीटर की दर से

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