असमः मंत्रियों की संप‍त्ति की घोषणा पर सवाल

बीती 14 जनवरी को असम सरकार ने अपनी वेबसाइट पर राज्य के सभी मंत्रियों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक कर दिया. काफी समय पहले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने वादा किया था कि वह और उनके मंत्रिमंडल के सभी सहयोगी अपनी-अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे, लेकिन कई बार समय सीमा तय करने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका. ऐसा लग रहा था, मानो गोगोई सरकार को संपत्ति की घोषणा करते हुए परेशानी महसूस हो रही है. बीच में एक बार मुख्यमंत्री गोगोई ने मीडिया से यह भी कहा कि राज्य के मंत्रियों को संपत्ति की घोषणा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और जो लोग उनकी संपत्ति का ब्योरा चाहते हैं, उन्हें आयकर विभाग में जाकर पता लगाना चाहिए.

गोगोई के इस कथन का भ्रामक अर्थ निकल रहा था, क्योंकि किसी भी आम नागरिक को आयकर विभाग मंत्रियों की संपत्ति की जानकारी देने वाला नहीं था. इसका साफ मतलब था कि मुख्यमंत्री इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का मन बना चुके थे और भ्रामक बहानों का सहारा लेकर मीडिया को चुप करा देना चाहते थे. एक वकील होने के नाते ऐसी बयानबाज़ी करते समय गोगोई को भी अंदाज़ा रहा होगा कि वह ग़लत दलील पेश कर रहे हैं.

गोगोई के इस कथन का भ्रामक अर्थ निकल रहा था, क्योंकि किसी भी आम नागरिक को आयकर विभाग मंत्रियों की संपत्ति की जानकारी देने वाला नहीं था. इसका साफ मतलब था कि मुख्यमंत्री इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का मन बना चुके थे और भ्रामक बहानों का सहारा लेकर मीडिया को चुप करा देना चाहते थे. एक वकील होने के नाते ऐसी बयानबाज़ी करते समय गोगोई को भी अंदाज़ा रहा होगा कि वह ग़लत दलील पेश कर रहे हैं. लेकिन जब कांग्रेस हाईकमान ने देर से ही सही, भ्रष्टाचार के ख़िला़फ सख्त रवैया अपनाने की घोषणा की और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने असम का दौरा करके गोगोई सरकार पर संपत्ति की घोषणा करने का दबाव बनाया तो बेमन से ही सही, गोगोई को संपत्ति की घोषणा करने के लिए सहमत होना पड़ा. आनन-फानन में उन्होंने ऐलान कर दिया कि 15 जनवरी 2011 से पहले मंत्रीगण अपनी संपत्ति की घोषणा कर देंगे. उन्होंने सभी मंत्रियों से संपत्ति का ब्योरा देने के लिए कहा, लेकिन यह सारी प्रक्रिया एक मज़ाक बनकर रह गई. कई तरह के घपलों-घोटालों के आरोपों से घिरे गोगोई मंत्रिमंडल के सदस्यों ने संपत्ति की घोषणा करते समय जानबूझ कर खुद को ग़रीब दिखाने का हास्यास्पद प्रयास किया है.

वेबसाइट पर मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा देते समय जो चालाकी बरती गई है, उसकी वजह से गोगोई सरकार के इरादे और नीयत पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं. मंत्रियों की संपत्ति के ब्योरे ठीक से खुलते नहीं हैं. किसी मंत्री का ब्योरा वेबसाइट पर खुल जाता है तो किसी का बिल्कुल नहीं खुलता. इसके अलावा मंत्रियों ने अपनी पत्नी और बच्चों के नाम की संपत्ति का कोई ब्योरा नहीं दिया है. यह बात सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि ज़्यादातर मंत्री, विधायक और नौकरशाह अपनी पत्नी और बच्चों के नाम से संपत्तियां बनाते हैं. असम के मंत्रियों ने इस तरह की किसी भी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है. यही वजह है कि विपक्ष संपत्ति की घोषणा को जनता के साथ छल और गोगोई को झूठा बता रहा है. इतना ही नहीं, संपत्तियों के विवरण में भी कई तरह की विसंगतियां हैं. कहीं भूमि का आकार बताए बग़ैर उसके मूल्य का उल्लेख किया गया है तो कहीं मूल्य का उल्लेख किए बग़ैर भूमि के आकार का उल्लेख है. स्वयं मुख्यमंत्री ने अपने एक आवास का उल्लेख करते हुए उसकी क़ीमत महज़ 1.05 लाख रुपये घोषित की है, जबकि इस समय गुवाहाटी में ज़मीन की क़ीमत आसमान छू रही है, ऐसे में गोगोई के घर की क़ीमत अविश्वसनीय लग रही है. ब्योरे के झूठ को आसानी से समझा जा सकता है. वर्ष 2006 में चुनाव आयोग को दिए गए संपत्ति के विवरण में मुख्यमंत्री ने अपने उसी घर की क़ीमत 7.5 लाख रुपये बताई थी. एक दूसरे घर की क़ीमत उन्होंने 2006 में चुनाव आयोग को 20.37 लाख रुपये बताई थी, उसी घर की क़ीमत सरकारी वेबसाइट में गोगोई ने 15.98 लाख रुपये बताई है. एक तऱफ गुवाहाटी में ज़मीन की क़ीमत में कई गुना इज़ा़फा देखा जा रहा है, दूसरी तऱफ गोगोई के घरों की क़ीमत लगातार घटती ही गई.

नई दिल्ली स्थित अपने फ्लैट की कीमत गोगोई ने चुनाव आयोग को 18 लाख रुपये बताई थी. वेबसाइट में उसी फ्लैट की क़ीमत महज 5.89 लाख रुपये बताई गई है. ब्योरे के ज़रिए जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है, इस बात में कोई संदेह नहीं है. गोगोई मंत्रिमंडल के कई सदस्य टीवी चैनलों, होटलों और अन्य उद्योगों का संचालन कर रहे हैं, लेकिन संपत्ति की घोषणा करते समय किसी ने भी इस तरह का कोई उल्लेख नहीं किया है. एक भी मंत्री को करोड़पति की श्रेणी में नहीं दर्शाया गया है. आम जनता जिन मंत्रियों की अकूत दौलत, महंगे आवासों और व्यापार के बारे में अच्छी तरह जानती है, उन्हें भी वेबसाइट में दर्शाया नहीं गया. यही वजह है कि राज्य के विपक्षी दल और जन संगठन संपत्ति की घोषणा को तरुण गोगोई सरकार का प्रहसन बता रहे हैं.

You May also Like

Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *