पूर्णिया में चापाकल घोटाला

नीतीश सरकार घोटालों और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने के चाहे लाख दावे पेश कर ले, लेकिन घोटालेबाज व भ्रष्टाचारी अपने कारनामों से बाज नहीं आ रहे हैं. हाल ही में पूर्णिया में भी चापाकल नामक एक घोटाला चर्चा का विषय बना हुआ है. मालूम हो कि पूर्णिया ज़िले के पानी में काफी मात्रा में आयरन है, जिससे यहां के निवासी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. सरकार के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पूर्णिया की तरफ से हर पंचायत में आयरन मुक्त शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए कम से कम चार चापाकल लगाने का प्रावधान किया गया था. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने मेसर्स डीएलआर ट्रेडर्स को पूर्णिया सदर अनुमंडल केके नगर, श्री नगर, जलालग़ढ, पूर्णिया पूर्व व कस्बा प्रखंड में, मो. जाबी को बायसी अनुमंडल के डगरूआ, अमौर, बैसा व बायसी प्रखंड में, जबकि मां शीतला को धमदाहा अनुमंडल के रूपौली, भवानीपुर, धमदाहा प्रखंडों व बनमनखी अनुमंडल में आयरन मुक्त चापाकल लगाने का जिम्मा सौंपा था. विभागीय निर्देश के अनुसार चापाकल लगाने वाली ऐजेंसी को चापाकल का चबूतरा युक्त प्लेटफॉर्म, आयरन हटाने वाला उपकरण एवं पाइप लगाना है. एक चापाकल लगाने की राशि 42 हजार रुपए है, लेकिन चापाकल लगाने वाली ऐजेंसियों ने जिले में ब़डे पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए कुछ जगहों पर मापदंडों की अनदेखी कर चापाकल लगाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि मनमाने तरीके से कुछ चापाकलों को पंचायतों में गाड़ा गया. अधिकतर का आयरन संयत्र काम करने के लायक ही नहीं था. चबूतरा निर्माण होते ही टूटने लगा. कई चापाकलों ने लगते ही काम करना बंद कर दिया, जबकि कागजों में आधे से अधिक चापाकलों को लगा दिखलाकर इस मद की राशि में विभागीय सहयोग से व्यापक पैमाने पर लूट-खसोट हुई. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे बदतर स्थिति बायसी अनुमंडल की है, जहां अधिकतर चापाकल कागजों में ही लगे हैं. इस मामले को जिले के एक जनप्रतिनिधि ने जिलापदाधिकारी एन. सरवन कुमार के सामने उठाया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने बायसी अनुमंडल पदाधिकारी मो. मोईनउद्दीन को इस मामले की जांच का ज़िम्मा सौंपा था, लेकिन लगभग छह माह बीतने के बाद भी इस मामले की जांच रिपोर्ट आते न देख जिले के लोगों का कहना है कि अन्य घोटालों की तरह इस घोटाले की भी लीपापोती कर दी जाएगी. किसी को इसकी भनक भी नहीं लगने दी जाएगी.

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