झारखंड में पंचायत चुनावों के बाद राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन मुंडा सरकार की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ गया. कई बार आयोजन की तिथि टलने के बाद राज्य के हाथों से इसकी मेजबानी छिन जाने का खतरा भी उत्पन्न हो गया था. अभी भी आयोजन समिति की तैयारियां आधी-अधूरी ही थीं, लेकिन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और खेल मंत्री सुदेश महतो की दृढ़ता के कारण भारतीय ओलंपिक संघ, झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन और राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति को सक्रिय होकर शेष तैयारियां निर्धारित समय सीमा के अंदर करनी पड़ीं. इन राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन का़फी भव्य तरीक़े से किया गया, लेकिन व्यवस्था संबंधी गड़बड़ियां भी अपने चरम पर रहीं. उद्घाटन के दिन बालीवुड के कई सितारे बुलाए गए. प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने कार्यक्रम का रोचक ढंग से संचालन कर लोगों को आकर्षित किया. कलाकारों ने राज्य की संस्कृति पर आधारित कई कार्यक्रम पेश किए. मुख्य स्टेडियम में लघु भारत का नज़ारा दिखा.
झारखंड कुश्ती संघ के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने तत्कालीन खेल सचिव रविशंकर वर्मा, खेल निदेशक पी सी मिश्रा, आयोजन समिति के महासचिव एस एम हाशमी और कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक के विरुद्ध खेल सामग्रियों की खरीद सहित अन्य मदों में 51 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया. निगरानी में इनके विरुद्ध मामला लंबित है.
राष्ट्रीय खेलों का आयोजन सूबे के लिए गौरव का विषय रहा, लेकिन समाज के गरीब तबकों के लिए यह अभिशाप बनकर सामने आया. आयोजन के एक पखवारे पूर्व से ही पूरे शहर में फुटपाथ के दुकानदारों और ठेला-खोमचा वालों पर पुलिस का कहर टूट पड़ा. उनकी रोज़ी-रोटी का आधार छीन लिया गया. ऑटो चालकों पर भी प्रशासन की गाज गिरी. क़रीब पांच हज़ार लोगों के 50 हज़ार आश्रितों के सामने दो जून रोटी की व्यवस्था करना कठिन हो गया. प्रशासन ने उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की ज़रूरत नहीं समझी. रोज़ कमाने-खाने वालों पर राष्ट्रीय खेल बहुत भारी गुज़रे. शहर की यातायात व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा. सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक नो एंट्री के कारण आवागमन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा पड़ी. शहर में जहां-तहां लोगों को वाहन चेकिंग के नाम पर परेशान किए जाने और अवैध वसूली का सिलसिला जारी रहा. इस तरह आम लोग इस आयोजन से खुश कम, पीड़ित ज्यादा ऩजर आए.
बाहर से आए खिलाड़ियों के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें भी मिलती रहीं. हालांकि इस आयोजन में आवागमन की सुविधा के लिए क़रीब 10 हज़ार लग्ज़री वाहन किराए पर लिए गए, जिन पर प्रतिदिन क़रीब एक करोड़ रुपये का खर्च आया. भोजन पर भी प्रतिदिन 50 लाख रुपये खर्च किए गए. उद्घाटन और समापन समारोह पर भी करोड़ों रुपये फूंके गए. जब राष्ट्रीय खेलों की म़ेजबानी मिली थी तो अनुमानित खर्च 500 करोड़ रुपये था, लेकिन तिथि टलने के साथ-साथ बजट भी बढ़ता गया. स़िर्फ रांची में स्टेडियम और भवन निर्माण (खेलगांव) पर ही क़रीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आया. जमशेदपुर और धनबाद में आयोजित होने वाली खेल प्रतिस्पर्धाओं की तैयारियों का खर्च भी कई गुना बढ़ गया.
यह आयोजन प्रारंभ से ही वित्तीय अनियमितताओं के कारण चर्चा में रहा. खेल सामग्रियों की खरीददारी से लेकर अन्य तमाम मदों में का़फी गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रहीं. निगरानी विभाग और उच्च न्यायालय में मामले भी दर्ज किए गए. झारखंड कुश्ती संघ के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने तत्कालीन खेल सचिव रविशंकर वर्मा, खेल निदेशक पी सी मिश्रा, आयोजन समिति के महासचिव एस एम हाशमी और कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक के विरुद्ध खेल सामग्रियों की खरीद सहित अन्य मदों में 51 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया. निगरानी में इनके विरुद्ध मामला लंबित है. दूसरी तऱफ महालेखाकार ने भी वित्तीय अनियमितताओं के मद्देऩजर आयोजन के बाद सभी कमेटियों को बरक़रार रखने का निर्देश दिया है. सभी खर्चों की विस्तृत जांच-पड़ताल की जाएगी. बहरहाल, अगर कॉमनवेल्थ खेलों की तरह यह आयोजन भी अपनी गड़बड़ियों के लिए लंबे समय तक चर्चा में रहे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी.
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