एन डी तिवारी का संघ प्रेम

कांग्रेस के दिग्गज नेता एन डी तिवारी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित अटल खाद्यान्न योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में भाग लेकर राजनीतिक गलियारे में भूचाल खड़ा कर दिया है. इसे राहुल गांधी के मिशन-2012 को पलीता लगाने वाला क़दम माना जा रहा है. पिछले आम चुनाव में उत्तराखंड में राहुल गांधी के प्रचार का असर यह रहा कि सूबे की पांचों सीटें कांग्रेस की झोली में गई थीं. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी. तिवारी सरकार पर 56 घोटालों का आरोप लगाकर सत्ता सुख भोगने वाले जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को इस हार के लिए जिम्मेदार मानते हुए भाजपा हाईकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था. जनरल को मुख्यमंत्री की कुर्सी दिलाने और भाजपा को जिताने में तिवारी की प्रमुख भूमिका रही है.

निशंक एवं अन्य भाजपा नेता राज्य में गाहे-बगाहे महंगाई-भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का अभियान चलाकर विपक्ष में बैठी कांग्रेस को जनता की नज़र में नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं. इससे निशंक सरकार सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों भूमिका में नज़र आती है. तिवारी को कौन रोके, कौन मनाए और कौन उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाए, इस बात को लेकर दिल्ली दरबार तक मंथन जारी है.

चुनाव के ठीक पहले तिवारी ने नकारात्मक बयान देकर खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से अलग रखने की घोषणा करके भाजपा को मज़बूत आधार प्रदान कर दिया था. परिणामस्वरूप सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को कुछ विधायकों की कमी पड़ गई और भाजपा को सबसे बड़े दल के रूप में उभरने और सरकार बनाने का मौक़ा मिल गया.

जनरल खंडूरी ने अवसर का लाभ उठाकर क्षेत्रीय दल उक्रांद और निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बना ली. जानकारों का कहना है कि जनरल की इस ताजपोशी के लिए तिवारी का ग़ैर राजनीतिक बयान ज़िम्मेदार था. अपने पांच साल के शासन में तिवारी सूबे के कांग्रेसी नेताओं की आपसी कलह से इतने परेशान हो चुके थे कि उन्होंने खेलब न खेलब, खेल बिगाड़ब वाले सिद्धांत का अनुसरण करके चुनावी बेला में ऐसी ग़लत बयानी की कि कांग्रेस को उससे भारी नुकसान हुआ. कांग्रेस हाईकमान ने बावजूद इसके अपने बुज़ुर्ग नेता का मान रखने के लिए उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बनाकर सम्मानित किया. कर्नाटक में तिवारी अपनी कमियों के चलते कथित राजनीतिक साजिश के शिकार हो गए. वह कर्नाटक से सीधे उत्तराखंड वापस चले आए. दैवीय आपदा के समय जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हवाई सर्वेक्षण के लिए आईं तो तिवारी उनसे मिलने गए, लेकिन वह तिवारी से हालचाल पूछे बग़ैर चली गईं, इससे तिवारी का अहम चोटिल हुआ. उन्होंने अपनी उपेक्षा उस समय तो बर्दाश्त कर ली. उधर कांग्रेस में सब कुछ ठीक न चलने का अंदाजा लगते ही सूबे के मुख्यमंत्री निशंक तिवारी को साधने लगे. इसके बावजूद तिवारी निशंक सरकार को आईना दिखाने से पीछे नहीं रहते थे, जिससे कई बार निशंक सरकार को परेशानी झेलनी पड़ती थी. राजनीति के कुशल खिलाड़ी निशंक ने अपने कौशल से सरकार में सहभागी की भूमिका वाले उक्रांद के दिग्गज नेता दिवाकर भट्ट को तोड़ कर उक्रांद में दो फाड़ कर दिया, वहीं उन्होंने तिवारी की दुखती रग पर हाथ फेरकर उन्हें अपने पक्ष में कर लिया. कांग्रेस हाईकमान द्वारा किए गए उपेक्षापूर्ण व्यवहार ने तिवारी को एक बार फिर घर से बाहर पैर निकालने को मजबूर कर दिया. तिवारी को अपने पाले में बुलाकर निशंक ने कांग्रेसी दिग्गजों की आपसी कलह सतह

पर होने की बात का संदेश बड़ी सहजता से जनता में प्रसारित कर दिया.

तिवारी के इन कदमों से राहुल गांधी के मिशन-2012 को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने उनके ख़िला़फ कार्यवाही की मांग करके यह सिद्ध कर दिया है कि वह अब विश्वास के लायक़ नहीं रहे. तिवारी ने भाजपा के मंच पर जाकर सूबे की निशंक सरकार को जिस तरह क्लीन चिट और उसके जनहितैषी होने का प्रमाण दिया, उसने अब तक निशंक सरकार को घोटालेबाज कहकर सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने वाले नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत के अभियान की हवा निकाल दी है. कांग्रेस हाईकमान ने अभी पिछले दिनों गुटबंदी पर लगाम कसने के साथ मिलजुल कर अभियान चलाने एवं मंत्री-सांसदों को कार्यकर्ताओं के बीच जाने की जो घुट्टी पिलाई थी, उसे तिवारी के नए कदमों से भारी धक्का लगा है. निशंक एवं अन्य भाजपा नेता राज्य में गाहे-बगाहे महंगाई-भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का अभियान चलाकर विपक्ष में बैठी कांग्रेस को जनता की नज़र में नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं. इससे निशंक सरकार सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों भूमिका में नज़र आती है. तिवारी को कौन रोके, कौन मनाए और कौन उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाए, इस बात को लेकर दिल्ली दरबार तक मंथन जारी है. तिवारी का मन अगर इसी तरह डोलता रहा तो मिशन-2012, जिसके तहत कांग्रेस सूबे में सत्तारूढ़ होने का सपना संजो रही है, वह सिर्फ सपना ही सिद्ध होगा.

You May also Like

Share Article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *