सरकार ने देश को बेच डालाः 26 लाख करोड़ का महा घोटाला

क्या सर्वोच्च न्यायालय इस महाघोटाले को अनदेखा कर देगा? संसद से हमें बहुत ज़्यादा आशा नहीं है, क्योंकि उसकी समझ में जब तक आएगा, तब तक उसके 5 साल पूरे हो जाएंगे. जनता बेबस है, उसे हमेशा एक महानायक की तलाश रहती है और अब महानायक पैदा होने बंद हो चुके हैं. अब एक ही महानायक है और वह है देश का सुप्रीम कोर्ट, उसी के चेतने का इंतज़ार है.

अगर 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला देश के सभी घोटालों की जननी है तो आज जिस घोटाले का चौथी दुनिया पर्दाफाश कर रहा है, वह देश में हुए अब तक के सभी घोटालों का पितामह है. चौथी दुनिया आपको अब तक के सबसे बड़े घोटाले से रूबरू करा रहा है. देश में कोयला आवंटन के नाम पर करीब 26 लाख करोड़ रुपये की लूट हुई है. सबसे बड़ी बात है कि यह घोटाला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के  कार्यकाल में ही नहीं, उन्हीं के मंत्रालय में हुआ. यह है कोयला घोटाला. कोयले को काला सोना कहा जाता है, काला हीरा कहा जाता है, लेकिन सरकार ने इस हीरे का बंदरबांट कर डाला और अपने प्रिय-चहेते पूंजीपतियों एवं दलालों को मुफ्त ही दे दिया. आइए देखें, इतिहास की सबसे बड़ी लूट की पूरी कहानी क्या है.

सबसे पहले समझने की बात यह है कि देश में कोयला उत्खनन के संबंध में सरकारी रवैया क्या रहा है. 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए देश में कोयले का उत्खनन निजी क्षेत्र से निकाल लिया और इस एकाधिकार को सरकार के अधीन कर दिया.

प्रधानमंत्री ने टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की ज़िम्मेदारी मंत्री पर डाल दी. उन्हें कुछ मालूम ही नहीं था. आदर्श घोटाला और कॉमनवेल्थ घोटाला भी दूसरों ने किया, लेकिन अब उनके ही कोयला मंत्री रहते हुए जो महा घोटाला हुआ, उसकी ज़िम्मेदारी किस पर डाली जाएगी?  इस सवाल का जवाब जनता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से ज़रूर जानना चाहेगी.

मतलब इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. शायद इसी कारण देश में कोयले का उत्पादन दिनोंदिन बढ़ता गया. आज यह 70 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 493 (2009) मिलियन मीट्रिक टन हो गया है. सरकार द्वारा कोयले के उत्खनन और विपणन का एकाधिकार कोल इंडिया लिमिटेड को दे दिया गया है. इस कारण अब कोयला नोटिफाइड रेट पर उपलब्ध है, जिससे कोयले की कालाबाज़ारी पर बहुत हद तक नियंत्रण पा लिया गया. लेकिन कैप्टिव ब्लॉक (कोयले का संशोधित क्षेत्र) के नाम पर कोयले को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की सरकारी नीति से इसे बहुत बड़ा धक्का पहुंचा और यह काम यूपीए सरकार की अगुवाई में हुआ है.

सबसे बड़ी बात है कि यह घोटाला सरकारी फाइलों में दर्ज है और सरकार के ही आंकड़े चीख-चीखकर कह रहे हैं कि देश के साथ एक बार फिर बहुत बड़ा धोखा हुआ है. यह बात है 2006-2007 की, जब शिबू सोरेन जेल में थे और प्रधानमंत्री ख़ुद ही कोयला मंत्री थे. इस काल में दासी नारायण और संतोष बागडोदिया राज्यमंत्री थे. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कोयले के संशोधित क्षेत्रों को निजी क्षेत्र में सबसे अधिक तेजी से बांटा गया. सबसे बड़ी बात यह है कि ये कोयले की खानें सिर्फ 100 रुपये प्रति टन की खनिज रॉयल्टी के एवज़ में बांट दी गईं. ऐसा तब किया गया, जब कोयले का बाज़ार मूल्य 1800 से 2000 रुपये प्रति टन के ऊपर था. जब संसद में इस बात को लेकर कुछ सांसदों ने हंगामा किया,

स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए देश में कोयले का उत्खनन निजी क्षेत्र से निकाल लिया और इस एकाधिकार को सरकार के अधीन कर दिया. मतलब इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया. शायद इसी कारण देश में कोयले का उत्पादन दिनोंदिन बढ़ता गया. आज यह 70 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 493 (2009) मिलियन मीट्रिक टन हो गया है. सरकार द्वारा कोयले के उत्खनन और विपणन का एकाधिकार कोल इंडिया लिमिटेड को दे दिया गया है. इस कारण अब कोयला नोटिफाइड रेट पर उपलब्ध है, जिससे कोयले की कालाबाज़ारी पर बहुत हद तक नियंत्रण पा लिया गया. लेकिन कैप्टिव ब्लॉक (कोयले का संशोधित क्षेत्र) के नाम पर कोयले को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की सरकारी नीति से इसे बहुत बड़ा धक्का पहुंचा और यह काम यूपीए सरकार की अगुवाई में हुआ है.

तब शर्मसार होकर सरकार ने कहा कि माइंस और मिनरल (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1957 में संशोधन किया जाएगा और तब तक कोई भी कोयला खदान आवंटित नहीं की जाएगी. 2006 में यह बिल राज्यसभा में पेश किया गया और यह माना गया कि जब तक दोनों सदन इसे मंजूरी नहीं दे देते और यह बिल पास नहीं हो जाता, तब तक कोई भी कोयला खदान आवंटित नहीं की जाएगी. लेकिन यह विधेयक चार साल तक लोकसभा में जानबूझ कर लंबित रखा गया और 2010 में ही यह क़ानून में तब्दील हो पाया. इस दरम्यान संसद में किए गए वादे से सरकार मुकर गई और कोयले के ब्लॉक बांटने का गोरखधंधा चलता रहा. असल में इस विधेयक को लंबित रखने की राजनीति बहुत गहरी थी. इस विधेयक में साफ़-साफ़ लिखा था कि कोयले या किसी भी खनिज की खदानों के लिए सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. अगर यह विधेयक लंबित न रहता तो सरकार अपने चहेतों को मुफ्त कोयला कैसे बांट पाती. इस समयावधि में लगभग 21.69 बिलियन टन कोयले के उत्पादन क्षमता वाली खदानें निजी क्षेत्र के दलालों और पूंजीपतियों को मुफ्त दे दी गईं. इस दरम्यान प्रधानमंत्री भी कोयला मंत्री रहे और सबसे आश्चर्य की बात यह है कि उन्हीं के नीचे सबसे अधिक कोयले के ब्लॉक बांटे गए. ऐसा क्यों हुआ? प्रधानमंत्री ने हद कर दी, जब उन्होंने कुल 63 ब्लॉक बांट दिए. इन चार सालों में लगभग 175 ब्लॉक आनन-फानन में पूंजीपतियों और दलालों को मुफ्त में दे दिए गए.

वैसे बाहर से देखने में इस घोटाले की असलियत सामने नहीं आती, इसलिए चौथी दुनिया ने पता लगाने की कोशिश की कि इस घोटाले से देश को कितना घाटा हुआ है. जो परिणाम सामने आया, वह स्तब्ध कर देने वाला है. दरअसल निजी क्षेत्र में कैप्टिव (संशोधित) ब्लॉक देने का काम 1993 से शुरू किया गया. कहने को ऐसा इसलिए किया गया कि कुछ कोयला खदानें खनन की दृष्टि से सरकार के लिए आर्थिक रूप से कठिन कार्य सिद्ध होंगी. इसलिए उन्हें निजी क्षेत्र में देने की ठान ली गई. ऐसा कहा गया कि मुना़फे की लालसा में निजी उपक्रम इन दूरदराज़ की और कठिन खदानों को विकसित कर लेंगे तथा देश के कोयला उत्पादन में वृद्धि हो जाएगी. 1993 से लेकर 2010 तक 208 कोयले के ब्लॉक बांटे गए, जो कि 49.07 बिलियन टन कोयला था. इनमें से 113 ब्लॉक निजी क्षेत्र में 184 निजी कंपनियों को दिए गए, जो कि 21.69 बिलियन टन कोयला था. अगर बाज़ार मूल्य पर इसका आकलन किया जाए तो 2500 रुपये प्रति टन के हिसाब से इस कोयले का मूल्य 5,382,830.50 करोड़ रुपये निकलता है. अगर इसमें से 1250 रुपये प्रति टन काट दिया जाए, यह मानकर कि 850 रुपये उत्पादन की क़ीमत है और 400 रुपये मुनाफ़ा, तो भी देश को लगभग 26 लाख करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ. तो यह हुआ घोटालों का बाप. आज तक के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला और शायद दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला होने का गौरव भी इसे ही मिलेगा. तहक़ीक़ात के दौरान चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज हाथ लगे, जो चौंकाने वाले खुलासे कर रहे थे. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि इस घोटाले की जानकारी सीएजी (कैग) को भी है. तो सवाल यह उठता है कि अब तक इस घोटाले पर सीएजी चुप क्यों है?

देश की खनिज संपदा, जिस पर 120 करोड़ भारतीयों का समान  अधिकार है, को इस सरकार ने मुफ्त में अनैतिक कारणों से प्रेरित होकर बांट दिया. अगर इसे सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया अपना कर बांटा जाता तो भारत को इस घोटाले से हुए 26 लाख करोड़ रुपये के राजस्व घाटे से बचाया जा सकता था और यह पैसा देशवासियों के हितों में ख़र्च किया जा सकता था.

यह सरकार जबसे सत्ता में आई है, इस बात पर ज़ोर दे रही है कि विकास के लिए देश को ऊर्जा माध्यमों के दृष्टिकोण से स्वावलंबी बनाना ज़रूरी है. लेकिन अभी तक जो बात सामने आई है, वह यह है कि प्रधानमंत्री और बाक़ी कोयला मंत्रियों ने कोयले के ब्लॉक निजी खिलाड़ियों को मुफ्त में बांट दिए. जबकि इस सार्वजनिक संपदा की सार्वजनिक और पारदर्शी नीलामी होनी चाहिए थी. नीलामी से अधिकाधिक राजस्व मिलता, जिसे देश में अन्य हितकारी कार्यों में लगाया जा सकता था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. जब इस मामले को संसद में उठाया गया तो सरकार ने संसद और लोगों को गुमराह करने का काम किया. सरकारी विधेयक लाने की बात कही गई, जिसके  तहत यह नीलामी की जा सकेगी, लेकिन यह विधेयक चार साल तक लोकसभा में लंबित रखा गया, ताकि सरकार के जिन निजी खिलाड़ियों के साथ काले संबंध हैं, उन्हें इस दरम्यान कोयले के ब्लॉक जल्दी-जल्दी बांटकर ख़त्म कर दिए जाएं. इसमें कितनी रकम का लेन-देन हुआ होगा, यह ज़ाहिर सी बात है.

लेकिन अनियमितताएं यहीं ख़त्म नहीं हो जातीं. एक ऐसी बात सामने आई है, जो चौंका देने वाली है. सरकारी नियमों के अनुसार, कोयले के  ब्लॉक आवंटित करने के लिए भी कुछ नियम हैं, जिनकी साफ़ अनदेखी कर दी गई. ब्लॉक आवंटन के लिए कुछ सरकारी शर्तें होती हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में अनदेखा नहीं किया जा सकता. ऐसी एक शर्त यह है कि जिन खदानों में कोयले का खनन सतह के नीचे होना है, उनमें आवंटन के 36 माह बाद (और यदि वन क्षेत्र में ऐसी खदान है तो यह अवधि छह महीने बढ़ा दी जाती है) खनन प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए. यदि खदान ओपन कास्ट किस्म की है तो यह अवधि 48 माह की होती है. (जिसमें वन क्षेत्र हो तो पहले की तरह ही छह महीने की छूट मिलती है.) अगर इस अवधि में काम शुरू नहीं होता है तो खदान मालिक का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है. समझने वाली बात यह है कि इस प्रावधान को इसलिए रखा गया है, ताकि खदान और कोयले का उत्खनन बिचौलियों के हाथ न लगे, जो सीधे-सीधे तो कोयले का काम नहीं करते, बल्कि खदान ख़रीद कर ऐसे व्यापारियों या

उद्योगपतियों को बेच देते हैं, जिन्हें कोयले की ज़रूरत है. इस गोरखधंधे में बिचौलिए मुंहमांगे और अनाप-शनाप दामों पर खदानें बेच सकते हैं. लेकिन सरकार ने ऐसी कई खदानों का लाइसेंस रद्द नहीं किया, जो इस अवधि के भीतर उत्पादन शुरू नहीं कर पाईं. ऐसा इसलिए, क्योंकि आवंटन के समय बहुत बड़ी मात्रा में ऐसे ही बिचौलियों को खदानें आवंटित की गई थीं, ताकि वे उन्हें आगे चलकर उद्योगपतियों को आसमान छूती क़ीमतों पर बेच सकें. अब यदि सरकार और बिचौलियों के बीच साठगांठ नहीं थी तो ऐसा क्यों किया गया? यह काम श्रीप्रकाश जायसवाल का है, लेकिन आज तक उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है. 2003 तक 40 ब्लॉक बांटे गए थे, जिनमें अब तक सिर्फ 24 ने उत्पादन शुरू किया है. तो बाक़ी 16 कंपनियों के लाइसेंस ख़ारिज क्यों नहीं किए गए? 2004 में 4 ब्लॉक बांटे गए थे, जिनमें आज तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया. 2005 में 22 ब्लॉक आवंटित किए गए, जिनमें आज तक केवल 2 ब्लॉकों में ही उत्पादन शुरू हो पाया है. इसी तरह 2006 में 52, 2007 में 51, 2008 में 22, 2009 में 16 और 2010 में एक ब्लॉक का आवंटन हुआ, लेकिन 18 जनवरी 2011 तक की रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी ब्लॉक उत्पादन शुरू होने की अवस्था में नहीं है. पहले तो बिचौलियों को ब्लॉक मुफ्त दिए गए, जिसके लिए माइंस और मिनरल एक्ट में संशोधन को लोकसभा में चार साल तक रोके रखा गया. फिर जब इन बिचौलियों की खदानों में उत्पादन शुरू नहीं हुआ (क्योंकि ये उत्पादन के लिए आवंटित ही नहीं हुई थीं), तो भी इनके लाइसेंस रद्द नहीं किए गए. सरकार और बिचौलियों एवं फर्ज़ी कंपनियों के बीच क्या साठगांठ है, यह समझने के लिए रॉकेट साइंस पढ़ना ज़रूरी नहीं है. अगर ऐसा न होता तो आज 208 ब्लॉकों में से स़िर्फ 26 में उत्पादन हो रहा हो, ऐसा न होता.

इस सरकार की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का फर्क़ है.  सरकार कहती है कि देश को ऊर्जा क्षेत्र में स्वावलंबी बनाना आवश्यक है. देश में ऊर्जा की कमी है, इसलिए अधिक से अधिक कोयले का उत्पादन होना चाहिए. इसी उद्देश्य से कोयले का उत्पादन निजी क्षेत्र के लिए खोलना चाहिए, लेकिन इस सरकार ने विकास का नारा देकर देश की सबसे क़ीमती धरोहर बिचौलियों और अपने प्रिय उद्योगपतियों के नाम कर दी. ऐसा नहीं है कि सरकार के सामने सार्वजनिक नीलामी का मॉडल नहीं था और ऐसा भी नहीं कि सरकार के पास और कोई रास्ता नहीं था. महाराष्ट्र के माइनिंग डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने भी इस प्रक्रिया के चलते कोल इंडिया से कुछ ब्लॉक मुफ्त ले लिए. ये ब्लॉक थे अगरझरी, वरोरा, मार्की, जामनी, अद्कुली और गारे पेलम आदि. बाद में कॉरपोरेशन ने उक्त ब्लॉक निजी खिलाड़ियों को बेच दिए, जिससे उसे 750 करोड़ रुपये का फायदा हुआ. यह भी एक तरीक़ा था, जिससे सरकार इन ब्लॉकों को बेच सकती थी, लेकिन ब्लॉकों को तो मुफ्त ही बांट डाला गया. ऐसा भी नहीं है कि बिचौलियों के होने का सिर्फ कयास लगाया जा रहा है, बल्कि महाराष्ट्र की एक कंपनी जिसका कोयले से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं था, ने कोयले के एक आवंटित ब्लॉक को 500 करोड़ रुपये में बेचकर अंधा मुनाफ़ा कमाया. मतलब यह कि सरकार ने कोयले और खदानों को दलाल पथ बना दिया, जहां पर खदानें शेयर बन गईं, जिनकी ख़रीद-फरोख्त चलती रही और जनता की धरोहर का चीरहरण होता रहा.

प्रणब मुखर्जी ने आम आदमी का बजट पेश करने की बात कही, लेकिन उनका ब्रीफकेस खुला और निकला जनता विरोधी बजट. अगर इस जनता विरोधी बजट को भी देखा जाए तो सामाजिक क्षेत्र को एक लाख साठ हज़ार करोड़ रुपये आवंटित हुए. मूल ढांचे (इन्फ्रास्ट्रकचर) को दो लाख चौदह हज़ार करोड़, रक्षा मंत्रालय को एक लाख चौसठ हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किए गए. भारत का वित्तीय घाटा लगभग चार लाख बारह हज़ार करोड़ रुपये का है. टैक्स से होने वाली आमद नौ लाख बत्तीस हज़ार करोड़ रुपये है. 2011-12 के लिए कुल सरकारी ख़र्च बारह लाख सत्तावन हज़ार सात सौ उनतीस करोड़ रुपये है. अकेले यह कोयला घोटाला 26 लाख करोड़ का है. मतलब यह कि 2011-2012 में सरकार ने जितना ख़र्च देश के सभी क्षेत्रों के लिए नियत किया है, उसका लगभग दो गुना पैसा अकेले मुनाफाखोरों, दलालों और उद्योगपतियों को खैरात में दे दिया इस सरकार ने. मतलब यह कि आम जनता की तीन साल की कमाई पर लगा टैक्स अकेले इस घोटाले ने निगल लिया. मतलब यह कि इतने पैसों में हमारे देश की रक्षा व्यवस्था को आगामी 25 साल तक के लिए सुसज्जित किया जा सकता था. मतलब यह कि देश के मूल ढांचे को एक साल में ही चाक-चौबंद किया जा सकता था. सबसे बड़ी बात यह कि वैश्विक मंदी से उबरते समय हमारे देश का सारा क़र्ज़ (आंतरिक और बाह्य) चुकाया जा सकता था. विदेशी बैंकों में रखा काला धन आजकल देश का सिरदर्द बना हुआ है. बाहर देशों से अपना धन लाने से पहले इस कोयला घोटाले का धन वापस जनता के पास कैसे आएगा?

कोयला घोटाले से लाभान्वित ब़डी कंपनियों के नाम

  1. हिंडाल्को
  2. जयप्रकाश असोसिएट्‌स
  3. एस्सार पावर
  4. भूषण पावर स्टील
  5. जीवीके पावर
  6. जिंदल पावर एंड स्टील
पूरी लिस्ट देखने के लिए क्लिक करें …
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46 thoughts on “सरकार ने देश को बेच डालाः 26 लाख करोड़ का महा घोटाला

  • February 4, 2015 at 6:04 PM
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    मनमोहन, सोनिआ,राहुल,प्रियंका और रोबर्ट वाड्रा को चौराहे पर खड़ा कर के फांसी दे देनी चाहिए. कांग्रेस ने देश को बेच डाला. इन को शर्म भी नहीं आई की इस देश का क्या होगा. सोनिआ ने सारा माल इटली राहुल के हाथ से भेज दिया जब राहुल को इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर १,५०,००० विदेशी मुद्रा के साथ पकड़ा गया था तभी उसको जेल में भेज देना चाहिए था ये सभी देश क गद्दार हैं. बाकि काम रोबर्ट वाड्रा ने कर दिया. इन सभी को जेल में पागलों की चैम्बर में रखना चाहिए. इनको देख कर पागल शायद ठीक हो जाएंगे पर ये नहीं.
    इसीलिए कहते हैं –
    ” इस देश का महान इंसान , फिर भी मेरा देश महान”
    जय हिन्द. वन्दे मातरम.

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  • October 21, 2014 at 8:31 AM
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    इस वेबसाइट पर अपने पूरे काम के लिए धन्यवाद. किम इंटरनेट अनुसंधान कर रही प्राप्त है और यह क्यों समझ में आसान है. हम में से अधिकांश सम्मोहक मोड के बारे में आप सभी ब्लॉग के माध्यम से प्रभावी ट्रिक्स निर्माण और यहां तक ​​कि इस विषय पर लोगों से योगदान को बढ़ावा देने के अलावा हमारे अपने बाल हमेशा एक बहुत समझना है. वर्ष के शेष भाग में आनंद लेते हैं. आप हमेशा एक चमकदार काम कर रहे हैं.

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  • December 6, 2013 at 6:19 AM
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    मम सिंह पहले से गद्दार है -वूस कमीने को पाकर कर मारना चेहया.

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  • November 26, 2013 at 11:15 PM
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    लाजवाब भारत! मुझे भारतीय होने का गर्व है। :-))
    पूंजीवादी व्यवस्था में इसी तरह के खेल,खिलाडी और इसके नियम होते हैं, जनता तो सिर्फ दर्शक है।मजा नहीं आ रहा है तो दूसरा खेल देख लें या फिर इस खेल (पूंजीवादी व्यस्था) को ही बदल डालें।
    पर अफ़सोस:-)) एक ही खेल है इस पूंजीवादी लोकतंत्र नामक टीवी में,एक ही चैनल है।
    टीवी आपका है, बंद कर दें या फिर तोड़ डालें। खरीदें हैं तोड़ नहीं सकते हैं आप,क्योंकि आपने मेहनत के पैसे से खरीदी है इसे। ज्यादा समय तक बंद करके भी नहीं रह सकते।
    सबसे अच्छा उपाय है इस खेल को बदल दें इसके नियम अपने आप बदल जायेंगे।

    नया खेल हो सकता है………सोचें जवाब मिल जायेगा।
    देखें और मजे उठायें

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  • October 14, 2013 at 8:01 PM
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    अब कांग्रेस पर से लोगों का भरोसा उठ चूका है !आम आवाम की आवाज दिन पर दिन मोदी जी बनते जा रहे है,फिर भी तनिक लज्जा भी नही आ रही सरकार को ?

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  • August 29, 2013 at 9:34 PM
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    इन घोटालो ko मिटाना है तो बन्दुक उठाना है रोटी मांगने से नहीं दी आजतक अब इसे chhinana है ho जाओ तयार गोली की करांति के लिए .

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  • May 11, 2013 at 3:57 PM
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    हाय रे आपनी देश की सरकार क्या चल रहा हैं की कुछ कहा नहीं जा सकता सोनिया गाँधी का तो यह देश हैं नहीं इसलिए इंकोतो कुछ फरक नहीं परत ये सोनिया तो पुरे देश को बेच देगी ,

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  • May 1, 2013 at 1:06 AM
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    ये सरदार मनमोहन सिंह जो मूक बना रहता है उसने देश का सबसे बड़ा घोटाला कर दिया यकीन नहीं होता….पूरी सरकार भ्रस्त
    हैं..इन माँ बेटे को (सोनिया और राहुल गाँधी ) और इस सरदार को मार मार कर इस देश से निकाल देना चाहिए …

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  • March 12, 2013 at 6:17 PM
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    इस सर्कार को तो जूते मारने चाहिए बेचारे राहुल गंधी इमानदारीलका राग अलापते हुए पागल हुए जा राजे जैन और उनकी ही पार्टी की सरकार पूरी बेईमानी ले साथ काम कर रही है

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  • August 29, 2012 at 6:49 PM
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    मन मोहन सिंह का कार्यकाल भारतीय इतिहास का सर्वाधिक कलंकित अध्याय बनेगा. कांग्रेस के साथ राकांपा, राजद, सपा, बसपा देश के लिए बेहद खतरनाक साबित होंगे. इसके वोटर जननी और जन्मभूमि के प्रति जाने-अनजाने में पाप के भागीदार बनेंगे. ” भगवान भारतवर्ष की रक्षा करो, रक्षा करो “. जयहिंद!

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  • August 21, 2012 at 5:00 PM
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    क्या कोई रास्ता है की आम आदमी सरकार से किसी घोटाले या उसकी कार्यबाही के बारे में पूछ सके.

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  • May 17, 2012 at 5:33 AM
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    The UPA government in its desire to get rid of General Singh, widely recognised in the army as an ‘upright, honest officer’, has left itself wide open.
    This diplomat claimed that the unprecedented media campaign against Gen Singh unleashed by a daily newspaper published from the north was with the tacit approval of the PM. A prime minister getting after his own army chief via the media, if true, can happen only in Banana Republics.
    The delibrate reduction of the war reserve ammo stocks from 30 days to less than 7 days for most offensive ammo could be a CBM by UPA govt to US as part of stability in South Asia. This way no Cold or Warm start in case of TSP or PRC attack. Indian Army will be a defensive force only. So global stability is assured for the US.
    NoBull prize for MMS.( for his treachery against India)
    Three of the people who are being blamed, Tejinder Singh, JJ Singh and Gul Panag are Sikhs. That there is a Sikh lobby in the army is no secret. Its also no secret that Punjab politicians actively bat for officers from their states. Even in Vishnu Bhagwat’s case, the gentleman gunning for his position and lobbying with Kaka was a Sikh officer.
    Does that not amount for Treason and which can be punishable by death?

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  • May 17, 2012 at 5:30 AM
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    Manmohan singh is a fraud who follows chiacago school of economis frauds which has caused misery to the third world in last 20 years and made millions of farmers in India commit suicide.
    this man,mohan singh must be eliminated soon to save India-he is a shame on the name of India -such a fraud with no personality no leadership and no ability to speak coherently is a shame on india; besides he is a traitor for which he should be put into a cage

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  • March 26, 2012 at 7:37 PM
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    London based newspaper फिनान्सिअल Times said इन इट्स रिपोर्ट ठाट अ seniour ऑफिसर well conversant with काग रिपोर्ट has testified that the रिपोर्ट is very near to थे final one, meaning thereby, the government have been trying to steal थे scam from थे public. थे year 2006 is very इम्पोर्तंत पोलितिकाल्ली because our P.M. Mr. Singh was इन charge of coal Ministry.

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  • March 23, 2012 at 1:14 PM
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    इस घोटाले में वर्तमान केंद्रीय कोयला मंत्री के कानपूर एवं अन्य जगहों के औद्योगिक घरानों के साथ रिश्तों की बारीकी से जाँच भी जरूर होनी चाहिए .

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  • March 23, 2012 at 12:19 PM
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    जब हमलोगों चुनवा का मुका मिलता है तो हम कांग्रेश को वोट क्यों दते है हुम्हे कोशिश करना चएये की एके भी एस्सा आदमी संसद न पहुचे .हम कम से कम इतना तो कर सकते है

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  • March 22, 2012 at 10:22 PM
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    In India 1873 law fallows, so don’t worry the decision will coming after 20-25 yrs later….there r hope so???

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  • March 22, 2012 at 9:34 PM
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    मनमोहन सिंह शर्म करो-इस्तीफा दो, भारत को और कलंकित न करो
    मनमोहन सिंह सरकार का देश के माथे पर भ्रष्टाचार का कलंक लगाने वाला
    एक और शर्मनाक घोटाला-कोयला महाघोटाला

    मनमोहन ने निकला देश का दिवाला

    भ्रष्टाचार, मंहगाई और कुशासन से
    जिसने निकाला देश का दिवाला
    उस अमेरिका के प्रिय मनमोहन से
    अब देश को बचायेगा उपर वाला
    कुशासन से छीना जिसने मुंह से निवाला
    उस सोनिया भक्त मनमोहन से
    बचाये मेरे भारत को उपर वाला
    मरणासन भारत की जनता देख
    कैसे दूू आप सबको बधाई
    मनमोहन रूपि इस त्रासदी से
    बचे मेरे सभी प्रिय देशवासी।।
    -देवसिंह रावत-

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  • March 22, 2012 at 7:48 PM
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    क्या ये देशद्रोह नहीं है?????? जो आवाज उठता है उसे कुचल दी जाती है ..ये दमन कारी निति नहीं है?? इसका जबाब देश की जनता वोट से ही देगी …. पर क्या इन घोटालो का पैसा कोई वापस लायेगा???काला धन कोई वापस लायेगा???? ये भाड़ ही खेत को खा रही है…हम सो रहे है.. अब जागो न इस भाड़ को हटके जलादो..

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  • March 22, 2012 at 6:52 PM
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    Sarkar toh badal jaaegi per aane wali sarkar ka kya bharosa..groupless democracy model is needed..which is doing well in some states of switzerland..yeh groups hi hain jo apni apni jaruratein puri krne k liye apni satta bnaye rakhne k liye ese kaam krte hain..gaddi maaro enki tashreef pe..

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  • March 22, 2012 at 2:24 PM
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    हम सभी को सरकार से इस का उत्तर चाहिया मनमोहन सिंह को इस का जबाब देना होगा क्यों की सरे घोटाले होते रहते है और प्रधान मंत्री को कुछ पता नहीं होता हो क्यों की वो खुली खानखो से भी सोते रहते है

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  • March 22, 2012 at 11:56 AM
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    देश के सभी नागरिको से मेरी विनम्र अपील है की आजादी के इतने वर्षो में देश का दिवाला निकालने वाली इस कांग्रेस को पूरी तरह से खत्म करदे, हलाकि देश के सभी नेता व दल लगभग भष्ट्र है, इसलिए हमें इन सब भष्ट्र में से कम भष्ट्र को चुने ताकि जनता का दवाब काम कर सके, क्यों की कम ताकतवर सरकार जनता से डरेगी i

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  • March 22, 2012 at 9:18 AM
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    इस सर्कार ने भारत को संपूर्ण बेच दिया है जिस तरह घोटाले निकल रहे है इस से लगता है की इस देश में आदमी नहीं जानवर रहते है जो की घास फूस खाते हैं और जिंदगी बसर करते हैं सर्कार जिस तरह उनको हंक्ले वोह वैसे ही चलते हैं आज वक़्त आगया है की हम सब इस सर्कार को उखड फेंके और नेइ सर्कार बनाये पर हमारे विरोधी पार्टी बहुत कमजोर हैं हमको एक नया विरोधी दल बनाना है और सब छोटे पार्टी उसमे सामिल होकर इस सर्कार को निकल फेंकना है

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  • May 21, 2011 at 10:35 AM
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    जिसे शिखंडी समझा था वह तो घोटालेवाजों का सरदार निकला. यह आदमी धूर्त और बेशर्म भी है. ऐसे विलेन नुमा मुखिया को पाकर देश शर्मसार है

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  • May 2, 2011 at 7:53 AM
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    मैं आपके इस लेख को चौथी दुनिया में पढ़ा था . अगर इसकी जाँच होती है तो कोयले की लपटों से शायद प्रधान मंत्री का बचाना भी मुश्किल होगा . लेकिन हमारी राजनीतिक व्यवस्था तथा दल नहीं चाहते भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कारगर काररवाई हो . पीअसी में मुलायम और मायावती के नुमायांदो ने जो किया जाहिर है . आपको २२ अप्रैल को यादो में आलोक मे सुना । एक भावुक इंसान दिखे , साफ़ दिल का ।

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  • April 30, 2011 at 3:46 AM
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    सचमुच अब तो सारी सीमाए पार कर दी, देशद्रोही किसे कहे? देश के रखवाले को? इससे बुरा और क्या होगा? अब तो सब अच्छा ही होना है, अब तो गद्दी पे वही बैठे जो अंग्रेजी क़ानून को ख़त्म करे. और नया क़ानून बनाए, भारत स्वाभिमान आन्दोलन के मुद्दे और नीति बिलकुल सही हें बस इसे जनता समझ जाए. वरना ऐसे क्रांतिकारी न्यूज़ का भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

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  • April 28, 2011 at 10:57 PM
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    मैं बहुत दुखी हु ये देख कर,विकाश के बजाय विनाश हो रहा है, क्या होगा आने वाली नस्लों का क्या फिर वो गुलाम हो जायेंगे,मैं हर सत्य के साथ हु,कीर्प्या मेरा सहयोग दे मैं भी घतली से पीडित हु,

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  • April 27, 2011 at 10:36 PM
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    बड़े घोटाले का लाभ देखिये… पिछले सभी धुल जाते हैं… दूसरा हर घोटाला औरों के लिये प्रतिस्पर्धा का काम करता है… सब चलेगा… अभी एक कमेन्ट पढ़ रहा था, जिसमें यह लिखा था कि भाजपा क्या कर रही है… मैं हैरत में हूं भाजपा जो कर रही है या नहीं कर रही है वो सबको दिखाई दे रहा है… लेकिन बड़ा दोषी कौन… जिसके कारण घोटाला हुआ या भाजपा जो इस मुद्दे को उठा नहीं रही…

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  • April 26, 2011 at 4:31 PM
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    बड़े ही शर्म की बात है के चारो तरफ भ्रष्ट नेता लोग है और देश को दीमक की तरह चाट रहे है. आम आदमी को अब आगे आना होगा और एक क्रांति की शुरुआत करनी होगी चाहे वो अन्ना के रूप में हो या फिर और कोई नया कानून.

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  • April 26, 2011 at 4:07 PM
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    हम सबने देखा है और देख भी रहे हैं की इस सर्कार के समय में ही सबसे ज्यादा घोटाले हुए हैं और सभी मंत्री से लेकर संत्री तक इसमें शामिल हैं प्रधानमंत्री या तो सब कुछ जानते हैं या वह भी इसमें शामिल है उनको तुरंत ही इस पैर रोक लगनी चाहिए

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  • April 26, 2011 at 1:51 PM
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    भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को क्यों नहीं उठा रही है.. ये समझ में नहीं आ रहा है.. लगता है जिन कंपनियों के लिस्ट आपने दिए हैं उनमें से भारतीय जनता पार्टी के लोगों की भी कंपनियां है या फिर भारतीय जनता पार्टी भी बिक चुकी है.. कांग्रेस पार्टी से पैसे लेकर बैठ गई है.. ये शर्म की बात है कि देश के राजनीतिक दलों ने सबकुछ बेच दिया..

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  • April 26, 2011 at 12:34 AM
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    Bahut badiya aap ne to congress ke bakhiya hi ukhar kar rakh di …………. ase hi print media ki jarurat hai desh ko .
    Sadar dahanyawad

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  • April 25, 2011 at 11:33 PM
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    सुप्रीम कोर्ट भी तो भ्रष्ट है , ये किसने कहा की सुप्रीम कोर्ट महानायक है ? सुप्रीम कोर्ट तो महा भ्रष्ट है , एक एक उसका जज भ्रष्ट है .

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  • April 25, 2011 at 11:18 PM
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    UPA = United Plunderer’s Association.

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  • April 25, 2011 at 10:06 PM
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    मनमोहन सिंह को and sonia घंधी,,,अ रजा,,,दिग्विजय,,,सरद पवार,,चिदंबरम,,,को बिच से फाड़ डालो ये

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  • April 25, 2011 at 8:34 PM
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    बेहतरीन लेख इस तरह का लेख ही आम जनता को जागरूक करेगी.
    अब्दुल रशीद
    सिंगरौली पत्रिका

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  • April 25, 2011 at 8:14 PM
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    ४०० लाख करोड़ का घोटाला हुआ है . अभी तो सिर्फ सुरुआत है , आगे सोनिया गाँधी की सर्कार के पोल खुलनी बाकि है

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  • April 25, 2011 at 4:57 PM
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    “26 लाख करोड़ का महा घोटाला” ??????????
    राजनीति की काली दुनिया

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  • April 25, 2011 at 4:28 PM
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    ऐसे लोगो को फंसी नहीं /दोनों हाथ और पाव काट कर सड़को पर फेक देना chahiye

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  • April 25, 2011 at 3:58 PM
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    मनमोहन सिंह जी, क्या आपको शर्म नहीं आती है? सोनिया मैडम तो इटालियन हैं, आप तो लेकिन भारतीय थे| आपको क्या हो गया है? आप ब्रष्ट हो गए हैं माननीय प्रधानमंत्री जी| हमें शर्म है ऐसी सरकार पर, जिस के भरोसे हमने देश को सौंप दिया. आपको शर्म आनी चाहिए|

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  • April 25, 2011 at 12:24 PM
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    हिंदुस्तान घोटालो का देश बन गया है
    अब जरूरत है घोटालेबाजों को जेल में बंद करने के बजाय फंसी देनी चाहिए
    ताकि दूसरा कोई हिम्मत ही न जुटा सके.

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  • April 25, 2011 at 11:43 AM
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    प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह, A Raja के भी बाप है | A Raja ने तो 1 लाख 75 हज़ार
    करोड़ का घोटाला किया था | लेकिन
    मनमोहन सिंह ने तो 26 लाख
    करोड़ का गबन कर दिया | और कोई
    नीरा राडिया टेप भी रिलीज़ नहीं हुई | है ना
    हाथ की सफाई ….

    Reply
  • April 25, 2011 at 10:36 AM
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    आँखें खोल देने वाला

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