कभी आपने सोचा कि कोई व्यक्ति महात्मा, साधु-संत क्यों बनता है और कोई गृहस्थ व्यापारी, चोर, डाकू, वैज्ञानिक, डॉक्टर या भिखारी क्यों बनता है? कितनी बार साधु-संतों के बारे में सोचता हूं तो मन में आता है कि ये कितनी भाग्यशाली आत्माएं हैं, जो प्रभु भजन में ही लीन हैं, परमात्मा की याद में ही मग्न रहती हैं, परमात्मा की ही बात करती हैं, उसके काम में लगी हैं, लेकिन ज़रा सोचें कि वे ऐसे क्यों और हम ऐसे क्यों? जवाब आता है क़िस्मत की बात, पिछले कर्मों का फल. पिछले जन्म में हम क्या थे, कौन थे, कैसे थे, कोई नहीं जानता. पास्ट लाइफ रिगे्रशन भी पक्का सबूत नहीं होता, लेकिन आज हम जो हैं, जैसे हैं, जहां हैं, क्या वह भी पूरी तरह जान पाते हैं? क्या हमें अपनी संपूर्ण क्षमता का ज्ञान है? हम किस हद तक अच्छे या बुरे कर्म करने की क्षमता रखते हैं, क्या इसका ज्ञान है हमें? समझना यह है कि अच्छा और बुरा क्या? आज जिस स्टेज पर समाज का चरित्र खड़ा है, हमें स्वयं ही असमंजस है कि सही या ग़लत क्या? नानी, दादी, बड़े-बू़ढों की सीख थी कि मन की आवाज़ सुनो. अंदर की आवाज़ सही रास्ते का ़फैसला कर देगी, लेकिन आज की इस बाहरी शोर से भरी ज़िंदगी में अंदर की आवाज़ आनी भी तो बंद हो गई है. फिर
कभी-कभी वह आवाज़ गुहार लगाती है तो हम उसे बहला- फुसला कर, डांट-डपट कर, मजबूरियों की दुहाई देकर, समय की मांग कहकर हर बार बंद कर देते हैं, तभी तो कर्मों का बोझ उठाए थके-हारे-चिड़चिड़े से इस ज़िंदगी को जिए जा रहे हैं.
मन तो करता है कि इस भंवर से बाहर निकल जाएं, ज़िंदगी की इस किताब को एक नए सिरे से शुरू कर पाएं, लेकिन कुछ भी करने से पहले डर लगता है कि अपनी बनी-बनाई ज़िंदगी को बदलना पड़ेगा, सब कुछ छोड़ना पड़ेगा. पर अगर सब कुछ जैसा चल रहा, वैसा ही चलता रहे और जो बदलना है, वह आपके अंदर ही बदले, तब क्या होगा. ऐसा ही होता है, जब परमात्मा की शक्ति का अनुभव आप जीवन में करते हैं. सृष्टि चक्र में हम उस मोड़ पर हैं, जब स़िर्फ उसके प्रति सजग होने की आवश्यकता है, उसके होने का अनुभव स्वतः ही होने लगेगा. वह आपके जीवन के हर पल का साथी बन जाएगा, जब आप उसे पुकार कर साथी बनाएंगे. अब वह आपके जीवन के हर मुद्दे का साथी होगा तो आप भी तो उसके जीवन में शामिल होंगे. ज़रूरत इस बात की है कि हम यह देखें कि उसका कार्य, उसका परिवार कौन सा है. यह पूरा संसार उसका परिवार और हर आत्मा को प्रेम, शांति, उमंग, उल्लास एवं शक्ति का एहसास दिलाना उसका काम. अब सोचें कि परमात्मा के कार्य का हिस्सा बनने में कितना समय लगेगा और क्या जीवन का बाक़ी कुछ छूटेगा? नहीं न, तो आज ही इस जागरूकता के साथ परमात्मा के कार्य के निमित्त बनें, आपके काम स्वयं होते जाएंगे.
ओम साई राम.
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