जन आस्था का केंद्र

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दून के संस्थापक श्रीगुरु राम राय जी का पदार्पण तीन सौ वर्ष पूर्व हुआ. सन्‌ 1676 में गुरु महाराज उत्तराखंड की पावन भूमि देहरादून आए. इन दिनों दुर्गम मार्ग से होकर संत समाज को यहां आने के लिए कंटीले मार्ग से आना पड़ा. संत समाज ने इस धाम की रमणीयता से मुग्ध होकर दून की ऊंची-नीची धरती पर जो डेरा बनाया, उसी के अपभ्रंश स्वरूप इस जगह का नाम डेरादीन से बिगड़ कर डेरादून और फिर देहरादून हो गया. श्रीगुरु राम राय ने इस धरती को अपनी कर्मस्थली बनाया. गुरु महाराज ने दरबार में लोक कल्याण के लिए एक विशाल झंडा लगाकर लोगों को इसी ध्वज से आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया. इसी के साथ झंडा साहब के दर्शन की परंपरा शुरू हो गई. अब भी होली से चार दिन बाद यहां झंडा लगाने के साथ झंडा मेला शुरू हो जाता है. यह मेला एक माह तक चलता है. इस मेले में देश-विदेश से हज़ारों श्रद्धालु आते हैं. सौ फुट से ऊंचे झंडा साहब पर प्रतिवर्ष बड़े हर्षोल्लास से ग़िला़फ चढ़ाया जाता है. झंडे पर ग़िला़फ चढ़ाने की बुकिंग की लंबी कतार होती है. कई वर्ष बाद श्रद्धालुओं को ग़िला़फ चढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त होता है. लोग झंडा साहब का दर्शन कर मन्नतें मांगते हैं. अब यह दरबार झंडा साहब जन आस्था के साथ लोक कल्याण स्थली के रूप में चर्चित हो गया है. यह मेला सांप्रदायिक एकता का भी प्रतीक है. यहां विभिन्न धर्मों के लोग आते हैं. देवभूमि की देव संस्कृति को दर्शाने वाले इस मेले में वैसे तो पूरे देश से संगति आती है, लेकिन सिख धर्म के लोगों द्वारा विशेष रूप से इस दरबार साहब को मान्यता प्रदान की जाती है. गुरुराम राय के 4 सितंबर 1687 में ब्रह्मलीन होने के बाद माता पंजाब कौर ने 1707 में पावन दरबार साहब का निर्माण कराकर महंत परंपरा की नींव रखी.

इस दरबार ने स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा स्थली के रूप में अपनी भूमिका निभाई. इस दरबार से जुड़े महंत-संतों का देवभूमि के लोग ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में आदर करते हैं. इस परंपरा को गौरव प्रदान करने में महंत इंद्रेश चरण दास ने महती भूमिका निभाई. वर्तमान में दरबार साहब में गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास की देखरेख में 120 से अधिक शिक्षण संस्थाओं और चिकित्सालयों का संचालन किया जा रहा है. गीता के कर्मयोग पर पुरी संस्था का संचालन होने से इस संस्था के महंत को अभी स्वामी विवेकानंद सम्मान से सम्मानित किया गया है.

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