बाबा रामदेव और उनके स्वाभिमान ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने संतों के खिला़फ हरिद्वार कोतवाली में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हठयोगी समेत बीस-पच्चीस लोगों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कराकर आग में घी डालने का काम कर दिया है. संत समाज का मुखर विरोध झेल रहे योगगुरु की दिव्य योग पीठ द्वारा प्रकाशित पुस्तक संत दर्शन के एक लेख ने रामदेव की हिंदू विरोधी मानसिकता की कलई खोलकर रख दी है. महाकुंभ आयोजित कराने वाली संतों की संस्था अखाड़ा परिषद के सैकड़ों संतों ने एकजुट होकर दिव्य योग प्रकाशन की पुस्तकों कों हिंदू जनमानस विरोधी घोषित करते हुए सरेआम उनकी होली जलाई.
इस घटना के बाद अपने बढ़ते विरोध से बचने के लिए बाबा समर्थकों ने आनन-फानन में हरिद्वार कोतवाली पहुंच कर धर्मनगरी के छब्बीस संतों के खिला़फ आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया. हरिद्वार कोतवाली में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश कुमार ने जो तहरीर संतों के खिलाफ दी, उसके आधार पर हरिद्वार पुलिस ने बीते 23 मार्च को मुकदमा अपराध संख्या 122, भारतीय दंड संहिता की धारा 353 ए-बी, 295 ए और 504 के तहत हठयोगी सहित 26 संतों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत करके जांच दारोगा आर पी कनौजिया को सौंप दी है.
मामले के विवेचनाधिकारी कनौजिया का कहना है कि धार्मिक भावना भड़काने का आरोप सही पाए जाने पर इन संतों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. विवेचनाधिकारी के थाना क्षेत्र से बाहर होने के कारण दो दिनों तक पुलिस इन संतों पर कोई दबाव नहीं बना सकी. सर्वाधिक मुखर विरोध करने वाले संत हठयोगी का कहना है कि रामदेव एवं उनकी संस्था की हिंदू विरोधी कार्यवाही का हर स्तर पर विरोध करने के फैसले पर वह और परिषद के संत अभी भी कायम हैं. उनका कहना है कि सनातन हिंदू धर्म का अपमान और उस पर प्रहार हम किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नही करेंगे, चाहे हम संतों पर एक नहीं, हज़ार मुकदमे लाद दिए जाएं. बाबा की दिव्य योग पीठ से प्रकाशित संत दर्शन नामक उक्त पुस्तक के पेज नंबर 186 पर लिखा गया है-हिंदू समाज ऐसे आततायियों का दल है, जो अपने किसी भी सदस्य को एक क्षण भर के लिए सुख की सांस नहीं लेने देता.
अत्याचारी हिंदू समाज अपने सदस्यों को पिछले जन्मों में किए गए पापों का फल भी इसी जन्म में भोगने के लिए विवश करता है. अहिंसा का साइन बोर्ड लगाकर दया का ढ़िढोरा पीटकर कसाइयों की तरह व्यवहार करना, धर्म के नाम पर बड़ी-बड़ी लीलाएं करना, धर्म के लेबल में पाप का बंडल बांधना, चंदन-कपूर का तिलक लगाकर दिन-रात अपनी अंतरात्मा को द्वेषानल से दग्ध करना और संसार की आंखों में मिथ्याचार की धूल झोंकना हिंदू समाज का पेशा है. पुस्तक के पेज नंबर 189 पर भी हिंदुओं को भड़काने वाली बातें लिखी हैं, जैसे-हिंदू समाज कितना मूर्ख है, जो दिन-रात झूठ बोलता हुआ दूसरों से सत्य बोलने की आशा करता है. स्वयं तो व्याभिचार में लीन रहता है, परंतु दूसरों को सदाचार का उपदेश देना अपना परम धर्म समझता है. वह इतना भी नहीं समझता कि एक दर्जन बच्चों का बाप भी अपनी विषय वासना पर काबू नहीं कर सकता तो सोलह-सत्रह वर्ष की अबोध बालिका अपने यौवन को कैसे संभाल सकती है.
धर्म नगरी हरिद्वार के संत अब तक योग गुरु को बाबा मानने से इंकार कर रहे थे, अब वही संत बाबा को हिंदू धर्म विरोधी और संत समाज विरोधी बताकर उन्हें आईना दिखाने पर आमादा हैं. संतों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग करते हुए समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों एवं संत समाज ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है. प्रतिनिधिमंडल ने रामदेव पर हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप भी लगाया है.
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