बच्चों की अब तक जिन हिंसक मामलों में भागीदारी पाई गई है, उनके कारणों को लेकर हमेशा शोध होता रहा है. सवाल यह भी उठता रहा है कि क्या कंप्यूटर पर हिंसक खेल खेलने का असर हमारे व्यवहार पर पड़ता है? हाल में किए गए एक सर्वे से इस बात की पुष्टि होती है कि हिंसक खेल हमारे व्यवहार पर असर डालते हैं. इस सर्वे से और भी कई चौंकाने वाले नतीजे प्राप्त हुए हैं. ओहियो स्टेट और मिशिगन यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए सर्वे के नतीजों के अनुसार, हिंसक खेलों का असर खेल खेलने के 24 घंटे बाद भी रहता है. इस सर्वे के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ स्वयंसेवकों की सहायता ली और उन्हें 20 मिनट तक हिंसक खेल जैसे कि मोर्टल कोम्बेट खेलने को कहा या फिर गिटार हीरो जैसा अहिंसक खेल. इसके बाद हिंसक खेल खेलने वाले आधे खिलाड़ियों को कहा गया कि उन्हें कल भी यही खेल खेलना है और उन्हें मन ही मन आज से अच्छा खेल दिखाने की तैयारी करनी है. दूसरे दिन शोधकर्ताओं की टीम ने सभी स्वयंसेवकों की आक्रामकता की परीक्षा ली. इस समीक्षा से पता चला कि जिन पुरुष खिलाड़ियों ने हिंसक खेल खेला था, परंतु जिन्हें अगले दिन के लिए रणनीति बनाने को नहीं कहा गया था, उनकी आक्रामकता सामान्य से अधिक नहीं थी. लेकिन जिन खिलाड़ियों को अगले दिन अच्छी तैयारी के साथ आने को कहा गया था, उनकी आक्रामकता काफी बढ़ गई थी. दूसरी तऱफ अहिंसक खेल खेलने वाले लोगों की आक्रामकता सामान्य से कम ही रही. इससे साबित होता है कि जो लोग लगभग हर दिन हिंसक खेल खेलते हैं और बाक़ी समय अपने खेल को सुधारने के बारे में सोचते रहते हैं, उनमें आक्रामकता भी अधिक होती है और वे लोग जाने-अनजाने लोगों से उलझते रहते हैं. दूसरी बात यह भी है कि इस सर्वे के लिए मात्र 20 मिनट तक ही खेल खेलने को कहा गया, जबकि कंप्यूटर गेम के नशे से ग्रस्त लोग इससे कहीं अधिक समय तक खेल खेलते रहते हैं और इसका असर उनके दिमाग़ पर छाया रहता है. इसलिए अगर आपके बच्चे हिंसक खेलों के शौक़ीन हैं तो सावधान रहिए.
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